तमिलनाडु में छात्रों के प्रदर्शन पर सरकार की सख्ती? विश्वविद्यालयों को भेजे निर्देश, CJP ने बताया ‘असंवैधानिक’
CENTRAL NEWS DESK: तमिलनाडु में छात्रों के राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने को लेकर सरकार के एक निर्देश पर विवाद खड़ा हो गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 14 अगस्त को राज्य के विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को भेजे गए निर्देश में छात्रों को वामपंथी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से आयोजित प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सीजेपी के नेतृत्व में छात्रों और युवाओं का आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। जुलाई में दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में वामपंथी छात्र संगठनों ने भी समर्थन दिया था।
विश्वविद्यालयों से लेकर जिला प्रशासन तक को जिम्मेदारी
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ इस मुद्दे पर कार्रवाई करने को कहा है। विश्वविद्यालयों के स्तर पर भी छात्रों की राजनीतिक गतिविधियों और प्रदर्शनों में भागीदारी पर नजर रखने की बात सामने आई है। सरकार का तर्क बताया जा रहा है कि छात्रों को ऐसे राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखा जाए, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों और परिसरों में राजनीतिक टकराव की स्थिति न बने।
सीजेपी ने बताया ‘असंवैधानिक’
सरकार के इस कदम पर कॉकरोच जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन ने इसे ‘असंवैधानिक’ बताते हुए आदेश तत्काल वापस लेने की मांग की है। सीजेपी का आंदोलन हाल के महीनों में परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों के अधिकारों जैसे मुद्दों को लेकर तेजी से चर्चा में आया है। जुलाई में आंदोलन के दबाव के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था और सरकार ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर सहमति जताई थी।
वामपंथी छात्र संगठन भी रहे आंदोलन में सक्रिय
दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन में वामपंथी दलों और उनके छात्र संगठनों की भागीदारी भी देखने को मिली थी। सीपीआई और अन्य वाम दलों ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया था। तमिलनाडु में भी सीजेपी के आंदोलन को वामपंथी संगठनों का समर्थन मिला। चेन्नई में सीजेपी से जुड़े छात्रों और युवाओं ने नीट तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन किया था।
अब बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद
सरकार के निर्देश के बाद सबसे बड़ा सवाल छात्रों के राजनीतिक अधिकार और विश्वविद्यालयों की स्वतंत्रता को लेकर उठ रहा है। एक तरफ सरकार शैक्षणिक संस्थानों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने की कोशिश कर रही है, वहीं विरोध करने वाले संगठन इसे छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी पर रोक के तौर पर देख रहे हैं। फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि सरकार द्वारा जारी निर्देश को किस तरह लागू किया जाता है और क्या इसे आगे कानूनी चुनौती दी जाती है।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
