महाराष्ट्र में अब सांप काटने का हर मामला होगा दर्ज, सरकार ने घोषित किया ‘नोटिफायबल डिजीज’; अस्पतालों को देना होगा पूरा ब्योरा

0
devendra-fadnavis-033127930-16x9

CENTRAL NEWS DESK: महाराष्ट्र सरकार ने सांप के काटने यानी स्नेकबाइट को ‘नोटिफायबल डिजीज’ घोषित कर दिया है। अब राज्य के सभी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सांप काटने के हर संदिग्ध या पुष्ट मामले और उससे होने वाली मौत की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होगा। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने मंगलवार को इस फैसले की जानकारी दी।

सरकार का कहना है कि इस कदम से सांप काटने के मामलों की सही निगरानी हो सकेगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल पाएगा। साथ ही एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) की उपलब्धता और जरूरत के हिसाब से उसकी आपूर्ति की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।

यह फैसला गढ़चिरौली के जपतलाई गांव में हुई दर्दनाक घटना के कुछ दिन बाद आया है। 9 अगस्त को राज्य सरकार की सहायता प्राप्त आवासीय स्कूल में जहरीले सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद सरकार ने स्कूल का लाइसेंस भी रद्द कर दिया था।

गंभीर मामलों की तुरंत देनी होगी जानकारी

नई व्यवस्था के तहत हर स्वास्थ्य संस्थान और डॉक्टर को सांप काटने के मामलों की जानकारी संबंधित जिला स्वास्थ्य अधिकारी या जिला सर्जन को देनी होगी। गंभीर और जानलेवा मामलों की सूचना उपलब्ध संचार माध्यमों से तुरंत देनी होगी।

सरकार इन मामलों का रिकॉर्ड हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम, इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम या सरकार द्वारा तय किसी अन्य रिपोर्टिंग सिस्टम में दर्ज करेगी।

मरीज का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा

अस्पतालों को सांप काटने वाले मरीज की पूरी जानकारी सुरक्षित रखनी होगी। इसमें शामिल होगी-

  • सांप काटने की तारीख और जगह
  • मरीज की उम्र और लिंग
  • घटना की परिस्थितियां
  • जहर के असर के लक्षण
  • दिया गया इलाज
  • कितनी एएसवी की शीशियां दी गईं
  • दूसरे अस्पताल में भेजे जाने की जानकारी
  • इलाज का परिणाम
  • मौत होने पर उससे जुड़ी जानकारी

एंटी-स्नेक वेनम का भी रखना होगा हिसाब

सांप काटने वाले मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों को एएसवी के स्टॉक, इस्तेमाल और उपलब्ध मात्रा का रिकॉर्ड भी अपडेट रखना होगा। इससे उन इलाकों में समय पर एएसवी पहुंचाने में मदद मिलेगी, जहां सांप काटने के मामले ज्यादा सामने आते हैं।

राज्य से जिले तक बनेगा नोडल सिस्टम

सांप काटने की रोकथाम और इलाज के लिए राज्य से जिला स्तर तक नोडल व्यवस्था बनाई जाएगी। राज्य स्तर पर निदेशक अस्पताल इसकी निगरानी करेंगे, जबकि जिलों में जिला सर्जन और स्वास्थ्य अधिकारी नोडल अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। नगर निगम क्षेत्रों में मेडिकल हेल्थ ऑफिसर या अतिरिक्त मेडिकल हेल्थ ऑफिसर यह जिम्मेदारी संभालेंगे।

‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज पर जोर

स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों को जागरूक करने और सांप काटने के बाद जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचने पर जोर दिया है। सरकार के मुताबिक शुरुआती 60 मिनट यानी गोल्डन ऑवर में सही इलाज मिलने से जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

सरकार अब सांप काटने की घटनाओं की जगह, मौसम, परिस्थितियों और मौतों के कारणों का अध्ययन कर स्थानीय स्तर पर बचाव की रणनीति तैयार करेगी। इसके साथ ही जिलों में लोगों को सांप से बचाव, प्राथमिक उपचार, तुरंत सूचना और समय पर अस्पताल पहुंचने को लेकर जागरूक किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *