भारत-चीन रिश्तों में सीमा शांति सबसे अहम, अरुणाचल में तनाव की खबरों के बीच नई दिल्ली का सख्त संदेश

0
images (22)

भारत ने चीन के साथ संबंधों को लेकर एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय रिश्तों के सामान्य विकास के लिए बेहद जरूरी है। विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है जब अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर रिपोर्टें सामने आई हैं।

भारत का संदेश ऐसे समय भी महत्वपूर्ण है जब दोनों देश हाल के वर्षों में सीमा तनाव कम करने और रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अगस्त की शुरुआत में हुई सीमा वार्ता में भी दोनों पक्षों ने LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखने को व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के लिए जरूरी बताया था।

अरुणाचल के ताकसिंग में क्या हुआ?

हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश के ताकसिंग क्षेत्र में जुलाई के अंत में दोनों देशों की पेट्रोलिंग टीमों के बीच आमना-सामना हुआ था। इसके बाद चीनी सैनिकों की गतिविधियों और क्षेत्र में अस्थायी ढांचे लगाए जाने को लेकर भी दावे सामने आए।

हालांकि, भारतीय रक्षा अधिकारियों ने चीनी सैनिकों के भारतीय नियंत्रण वाले क्षेत्र में घुसने और वहां टेंट लगाने संबंधी कुछ दावों को अपुष्ट बताया है। वहीं, स्थानीय संगठनों ने क्षेत्र में चीनी गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। इसलिए फिलहाल उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर इसे किसी बड़े सैन्य टकराव के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। सीमा पर स्थिति को लेकर भारत और चीन दोनों के आधिकारिक रुख और स्थानीय रिपोर्टों में अंतर दिखाई देता है।

चीन ने भी बताया- स्थिति सामान्य

बीजिंग ने सीमा की मौजूदा स्थिति को ‘सामान्य रूप से स्थिर’ बताया है। चीन की ओर से कहा गया है कि दोनों देश संपर्क बनाए रखने और सीमा पर शांति सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा संवाद तंत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी दोनों देशों की ओर से तनाव बढ़ाने के बजाय संवाद के माध्यमों को सक्रिय रखने का संकेत दिया गया है।

36वीं WMCC बैठक में क्या हुआ?

6 अगस्त को नई दिल्ली में भारत और चीन के बीच Working Mechanism for Consultation and Coordination on India-China Border Affairs (WMCC) की 36वीं बैठक हुई। इस बैठक में दोनों पक्षों ने LAC की स्थिति की समीक्षा की। बातचीत में सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, संवाद तंत्र और सीमा-पार सहयोग जैसे मुद्दे शामिल रहे। भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की बुनियादी शर्त है। दोनों पक्षों ने सीमा से जुड़े मुद्दों को मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्रों के जरिए संभालने पर जोर दिया।

मई में भी हुई थी अहम बातचीत

इससे पहले 27 मई को बीजिंग में WMCC की 35वीं बैठक हुई थी। तब दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने में हुई प्रगति पर संतोष जताया था। बैठक में सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, नए संवाद तंत्र और सीमा-पार सहयोग पर चर्चा हुई थी। दोनों पक्षों ने राजनयिक और सैन्य स्तर पर नियमित संपर्क जारी रखने पर भी सहमति जताई थी।

इससे संकेत मिलता है कि भारत और चीन एक तरफ सीमा पर संभावित तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ व्यापक रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने का प्रयास भी जारी है।

2020 के गलवान संघर्ष की छाया अभी बाकी

भारत-चीन संबंधों में मौजूदा संवेदनशीलता की बड़ी वजह 2020 का गलवान संघर्ष है। पूर्वी लद्दाख में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों ने सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात किए थे। इसके बाद कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ताओं के जरिए तनाव कम करने की कोशिश हुई। 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद सीमा पर गश्त और सैन्य तनाव कम करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ने के संकेत मिले।

अब BRICS बैठक पर भी नजर

मौजूदा घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली में होने वाले आगामी BRICS शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे में भारत-चीन सीमा पर शांति और द्विपक्षीय रिश्तों का मुद्दा दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत के संदर्भ में अहम हो सकता है। भारत का ताजा संदेश साफ है सीमा पर शांति होगी तभी व्यापक भारत-चीन संबंधों में स्थिर और टिकाऊ सुधार संभव है। वहीं, ताकसिंग क्षेत्र की हालिया गतिविधियों पर दोनों देशों की सेनाओं और राजनयिक चैनलों के जरिए स्थिति पर नजर बनी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *