कॉकरोच जनता पार्टी की कमान संभालेंगे 12 युवा चेहरे, सभी 35 साल से कम; चुनाव नहीं, अब सरकार पर बनाएंगे दबाव

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CENTRAL NEWS DESK: जंतर-मंतर के लंबे छात्र आंदोलन के बाद चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अब अपने अगले चरण की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन ने फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने से इनकार करते हुए खुद को एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर सक्रिय रखने का फैसला किया है। गुरुवार को सीजेपी ने अपनी 12 सदस्यीय कोर टीम की घोषणा की। खास बात यह है कि टीम में शामिल सभी सदस्य 35 साल से कम उम्र के हैं।

इस टीम में वकील, सीए, इंजीनियर, पत्रकार और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े युवा शामिल हैं। संगठन का दावा है कि आने वाले समय में यही टीम देशभर में युवाओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाएगी।

जंतर-मंतर आंदोलन से बनी पहचान

कॉकरोच जनता पार्टी का नाम पहली बार उस समय चर्चा में आया, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबा आंदोलन शुरू हुआ। आंदोलन के दौरान पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

धीरे-धीरे आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा जुड़ते गए। इसके बाद सीजेपी ने इसे सिर्फ दिल्ली तक सीमित रखने के बजाय देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की रणनीति तैयार की है।

कौन हैं सीजेपी के प्रमुख चेहरे?

सीजेपी के सबसे प्रमुख चेहरों में इसके संस्थापक अभिजीत दिपके शामिल हैं। करीब 30 साल के दिपके राजनीतिक कम्युनिकेशन और पब्लिक रिलेशंस से जुड़े रहे हैं। उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर डिग्री की है।

संगठन में आशुतोष रांका और सौरव दास भी प्रमुख भूमिका में हैं। रांका इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से आते हैं और आईआईटी कानपुर तथा लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई कर चुके हैं। वहीं सौरव दास पत्रकारिता और रिसर्च से जुड़े रहे हैं।

टीम में रत्ना सिंह, वैश्णवी गौर, आफरीन नवाज और दीपक बालियान जैसे नाम भी सामने आए हैं। इन सदस्यों ने जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान संगठनात्मक, मीडिया और रणनीतिक जिम्मेदारियां संभाली थीं।

12 सदस्यीय टीम में वकील से लेकर इंजीनियर तक

सीजेपी की कोर टीम को खास तौर पर युवा प्रोफेशनल्स का समूह बताया जा रहा है। इसमें कानून, पत्रकारिता, इंजीनियरिंग, अकाउंटिंग और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े लोग शामिल हैं।

संगठन का मकसद ऐसी टीम तैयार करना है जो सिर्फ प्रदर्शन आयोजित करने तक सीमित न रहे, बल्कि अलग-अलग मुद्दों पर रिसर्च करे, जनता की समस्याएं सामने लाए और सरकारों से सवाल पूछे।

अभी चुनाव नहीं लड़ेगी सीजेपी

जंतर-मंतर आंदोलन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी चुनावी राजनीति में उतरने वाली है। फिलहाल संगठन ने इसका जवाब नहीं में दिया है। सीजेपी का कहना है कि वह अभी चुनाव लड़ने के बजाय प्रेशर ग्रुप की भूमिका निभाएगी। यानी संगठन सरकार और राजनीतिक दलों पर जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर दबाव बनाएगा। इस रणनीति के तहत चुनावी टिकट या उम्मीदवार उतारने के बजाय आंदोलन, जनसंवाद और मुद्दा आधारित कैंपेन पर फोकस किया जाएगा।

सितंबर से देशभर में निकलेगी टीम

सीजेपी अब सितंबर से देशव्यापी अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है। संगठन ने इस अभियान का नाम ‘क्या बोलती पब्लिक’ रखा है। इस अभियान के तहत सीजेपी की टीम अलग-अलग राज्यों में जाएगी और छात्रों, युवाओं, नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों और आम लोगों से सीधे बातचीत करेगी।

टीम का फोकस स्थानीय समस्याओं को समझने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाने पर रहेगा।

युवाओं के मुद्दे होंगे केंद्र में

सीजेपी के एजेंडे में फिलहाल युवाओं से जुड़े मुद्दे सबसे ऊपर हैं। इनमें पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, सरकारी भर्तियां, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल हैं। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान भी इन्हीं मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया गया था। अब संगठन इन्हें देश के अलग-अलग राज्यों तक ले जाने की तैयारी में है।

क्या सीजेपी बनेगी राजनीतिक दलों के लिए चुनौती

सीजेपी के पास अभी कोई चुनावी आधार या विधानसभा-लोकसभा में प्रतिनिधित्व नहीं है। इसके बावजूद संगठन की ताकत युवा वर्ग और सोशल मीडिया में उसकी पहुंच को माना जा रहा है। अगर ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान के जरिए सीजेपी अलग-अलग राज्यों में युवाओं को जोड़ने में सफल होती है, तो आने वाले चुनावों में राजनीतिक दलों के लिए यह एक नया दबाव समूह बन सकता है।

खासकर उन राज्यों में जहां बड़ी संख्या में युवा प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरियों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर नाराज हैं, वहां सीजेपी का अभियान राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकता है।

असली परीक्षा अब शुरू होगी

जंतर-मंतर का आंदोलन सीजेपी के लिए बड़ी पहचान लेकर आया, लेकिन आंदोलन को एक स्थायी राष्ट्रीय संगठन में बदलना उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। 12 सदस्यीय युवा टीम के सामने अब देशभर में संगठन खड़ा करने, स्थानीय मुद्दों को समझने और लगातार जनता के बीच सक्रिय रहने की चुनौती है।

फिलहाल सीजेपी ने चुनावी राजनीति से दूरी बनाकर जनता की आवाज और सरकार पर दबाव को अपना रास्ता चुना है। अब देखना होगा कि सितंबर से शुरू होने वाला ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान इस नए युवा संगठन को कितना बड़ा जनआंदोलन बना पाता है।

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