तुकाराम मुंढे: 21 साल की सेवा में 25वीं बार ट्रांसफर, अब महाराष्ट्र FDA की कमान, अशोक खेमका से क्यों होने लगी तुलना
CENTRAL NEWS DESK: महाराष्ट्र कैडर के चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपने तबादले को लेकर चर्चा में हैं। सख्त प्रशासनिक शैली, रूल्स के पालन और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए पहचाने जाने वाले मुंढे को मई 2026 में महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA का कमिश्नर बनाया गया। यह उनकी करीब 21 साल की प्रशासनिक सेवा में 25वीं बार ट्रांसफर हुआ.
दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल 2026 में भी उनका तबादला हुआ था। उन्हें प्रधान सचिव, राहत एवं पुनर्वास विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन यह नियुक्ति ज्यादा समय नहीं चली। मई में उन्हें फिर हटाकर FDA कमिश्नर बनाया गया। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल से मई के बीच हुए इस बदलाव के चलते उनके लगातार तबादलों पर एक बार फिर सवाल उठे।
महाराष्ट्र FDA के कमिश्नर तुकाराम मुंढे
7 अगस्त 2026 तक तुकाराम मुंढे महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के कमिश्नर हैं। उन्होंने मई 2026 में इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी। एफडीए राज्य में खाद्य पदार्थों, दवाओं और संबंधित उत्पादों की गुणवत्ता तथा नियमों के अनुपालन की निगरानी करने वाली प्रमुख नियामक एजेंसी है।
पद संभालने के बाद मुंढे की कार्यशैली फिर सुर्खियों में आई। रिपोर्टों के मुताबिक एफडीए ने मिलावट, नकली या गैर-अनुपालन वाले खाद्य उत्पादों और अन्य उल्लंघनों के खिलाफ कार्रवाई तेज की। उनकी सख्त छवि के कारण महाराष्ट्र में उन्हें कई बार ‘सिंघम’ जैसी उपमा भी दी गई है।
25वीं पोस्टिंग तक कैसे पहुंचा आंकड़ा?
तुकाराम मुंढे 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने 2004 की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की थी। इसके बाद महाराष्ट्र में उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर नगर निकाय और राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
उनकी पोस्टिंग में नांदेड़, सोलापुर, नागपुर, वाशिम, नासिक, नवी मुंबई, पुणे और अन्य स्थानों की जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। वे कलेक्टर, नगर आयुक्त और विभिन्न विभागों में सीनियर प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं।
उपलब्ध ट्रांसफर रिकॉर्ड के अनुसार उनकी 23वीं पोस्टिंग जून 2024 में असंगठित कामगार विकास आयुक्त के रूप में हुई थी। अगस्त 2025 में उन्हें दिव्यांग कल्याण विभाग का आयुक्त बनाया गया। अप्रैल 2026 में उन्हें प्रधान सचिव, राहत एवं पुनर्वास विभाग बनाया गया और मई 2026 में एफडीए कमिश्नर की जिम्मेदारी दी गई। यही मई वाली नियुक्ति उनके 25वें ट्रांसफर के रूप में दर्ज की गई है।
बार-बार तबादलों की वजह क्या है?
मुंढे के बार-बार तबादलों को लेकर अलग-अलग समय में कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं। उनके समर्थक इसे उनकी कठोर और नियम आधारित कार्यशैली से जोड़ते हैं, जबकि प्रशासनिक हलकों में उनके काम करने के तरीके को लेकर अलग-अलग राय भी रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि हर तबादले को किसी राजनीतिक दबाव या ईमानदारी की वजह से हुआ बताना सही नहीं होगा। कई तबादले प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा भी होते हैं और हर आदेश में कारण सार्वजनिक रूप से विस्तार से नहीं बताया जाता।
2019 और 2020 के आसपास भी मुंढे के लगातार तबादले चर्चा में रहे थे। उस समय मीडिया रिपोर्टों में उनके साथ काम कर चुके अधिकारियों ने उनकी सख्त कार्यशैली का उल्लेख किया था।
‘मिस्टर क्लीन’ और ‘सिंघम’ जैसी छवि कैसे बनी?
मुंढे की पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में बनी है जो नियमों के पालन और प्रशासनिक अनुशासन पर जोर देते हैं। उन्होंने नगर निकायों और जिला प्रशासन में काम करते हुए अवैध निर्माण, प्रशासनिक अनियमितताओं और नागरिक सेवाओं से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाया।
उनकी यही शैली उन्हें दूसरे अधिकारियों से अलग पहचान देती है। हालांकि, उनके काम करने के तरीके की प्रशंसा के साथ-साथ यह आलोचना भी सामने आती रही है कि वे कई बार बेहद कठोर प्रशासनिक रुख अपनाते हैं। इसलिए मुंढे की छवि को केवल ‘ईमानदार अधिकारी’ के रूप में देखना पूरी कहानी नहीं बताता; उनकी कार्यशैली को लेकर समर्थन और आलोचना दोनों रहे हैं।
अब अशोक खेमका से हो रही तुलना
तुकाराम मुंढे की लगातार तबादलों की कहानी ने उन्हें हरियाणा के चर्चित आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की याद दिला दी है। खेमका अपने लंबे प्रशासनिक करियर और असाधारण रूप से बड़ी संख्या में हुए तबादलों के लिए देशभर में चर्चित रहे।
अशोक खेमका 1991 बैच के हरियाणा कैडर के अधिकारी रहे और 34 साल के करियर में 57 बार ट्रांसफर हुए। 2012 में रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े गुरुग्राम भूमि सौदे की म्यूटेशन रद्द करने के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर खास चर्चा में आए। अप्रैल 2025 में वे अतिरिक्त मुख्य सचिव, परिवहन विभाग के पद से सेवानिवृत्त हुए।
इस लिहाज से दोनों अधिकारियों में सबसे बड़ा समानता-बिंदु बार-बार होने वाले प्रशासनिक तबादले और सख्त प्रशासनिक छवि है। हालांकि, दोनों की सेवा, कैडर, कुल तबादलों और उनके पीछे रहे प्रशासनिक संदर्भ अलग-अलग हैं। इसलिए उन्हें पूरी तरह एक जैसा मानना उचित नहीं होगा।
मुंढे के करियर का अगला अध्याय एफडीए में
मई 2026 में एफडीए की कमान मिलने के बाद अब मुंढे के सामने एक बड़ा नियामक विभाग है। खाद्य मिलावट, घटिया खाद्य पदार्थ, दवाओं की गुणवत्ता और नियमों के उल्लंघन जैसे मुद्दे सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े हैं।
यही वजह है कि उनकी नई जिम्मेदारी पर महाराष्ट्र में खास नजर है। सवाल यह भी है कि क्या एफडीए में उनकी सख्त कार्यशैली लंबे समय तक चल पाएगी या आने वाले समय में एक बार फिर तबादला आदेश चर्चा में आएगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 21 साल की सेवा में 25 ट्रांसफर/पोस्टिंग का आंकड़ा तुकाराम मुंढे को देश के सबसे ज्यादा तबादले झेलने वाले चर्चित आईएएस अधिकारियों में शामिल करता है। और अगस्त 2026 में उनकी मौजूदा जिम्मेदारी महाराष्ट्र एफडीए के कमिश्नर की है।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
