जिस पेपर लीक के खिलाफ कभी आंदोलन किया, उसी विवाद में धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
CENTRAL N EWS DESK: देश के शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान ने पेपर लीक विवाद के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले 35 दिनों से छात्र संगठन और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर भी छात्र राजनीति और पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन से ही शुरू हुआ था। कभी वह परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन करते नजर आए थे, लेकिन वर्षों बाद उसी मुद्दे पर उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
एबीवीपी से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से की। कॉलेज के दिनों में वह छात्र संगठन के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। वर्ष 1993 में उन्हें एबीवीपी का राज्य सचिव बनाया गया और 1995 में राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद 1998 में वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए और सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।
1997 में पेपर लीक के खिलाफ बने थे आंदोलन का चेहरा
वर्ष 1997 में ओडिशा में तत्कालीन मुख्यमंत्री जानकी बल्लभ पटनायक की सरकार के दौरान परीक्षा पेपर लीक के विरोध में बड़ा छात्र आंदोलन हुआ था। भुवनेश्वर में राज्य सचिवालय के बाहर हुए इस प्रदर्शन में करीब 1500 छात्र शामिल हुए थे। धर्मेंद्र प्रधान उस आंदोलन के प्रमुख छात्र नेताओं में शामिल थे और एबीवीपी की ओर से विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।
‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान 18 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी के सक्रिय आयोजक बन गए थे। उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से एंथ्रोपोलॉजी में पढ़ाई की और 1994 से 1997 के बीच दो बार एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव रहे।
ओडिशा विधानसभा से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर
धर्मेंद्र प्रधान ने वर्ष 2000 में ओडिशा की चुनावी राजनीति में कदम रखा और 2000 से 2004 तक विधानसभा सदस्य रहे। इसी दौरान उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (बीजेवाईएम) का ओडिशा अध्यक्ष बनाया गया। वर्ष 2002 में वह भाजपा के राष्ट्रीय सचिव भी बने।
संसदीय समितियों में निभाई अहम भूमिका
लोकसभा सांसद बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने कई संसदीय समितियों में काम किया। वह कमेटी ऑन पेटिशंस, कमेटी ऑन एनर्जी, स्टैंडिंग कमेटी ऑन एनर्जी, कमेटी ऑन गवर्नमेंट एश्योरेंसेज़ और टेलीकॉम लाइसेंस व स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच करने वाली जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सदस्य भी रहे। जून 2024 में वह 18वीं लोकसभा के लिए फिर चुने गए।
केंद्र सरकार में संभाले कई बड़े मंत्रालय
धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, इस्पात, कौशल विकास और उद्यमिता जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। जुलाई 2021 में उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया। जून 2024 में नई सरकार बनने के बाद उन्होंने दोबारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में पदभार संभाला।
सम्मान और निजी जीवन
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ। उनके पिता का नाम देबेंद्र प्रधान और माता का नाम बसंत मंजरी प्रधान है। उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से एंथ्रोपोलॉजी में मास्टर डिग्री हासिल की। वर्ष 1998 में उनकी शादी मृदुला ठाकुर प्रधान से हुई। उनके दो बच्चे हैं। ओडिशा विधानसभा ने उन्हें उत्कृष्ट विधायी कार्य के लिए उत्कलमणि गोपबंधु प्रतिभा सम्मान से भी सम्मानित किया है।
एक राजनीतिक विडंबना
धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यही मानी जा रही है कि जिस पेपर लीक के खिलाफ उन्होंने छात्र नेता के रूप में आंदोलन किया था, उसी मुद्दे पर शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्हें तीखे विरोध का सामना करना पड़ा और अंततः पद छोड़ना पड़ा। इससे उनका राजनीतिक सफर भारतीय छात्र राजनीति से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक और फिर विवादों के बीच इस्तीफे तक एक अलग अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
