130 साल तक गांव के तालाब में रहा मगरमच्छ, मौत पर पूरे गांव ने नहीं जलाया चूल्हा, अब NCERT की किताब में पढ़ेंगे बच्चे

0
crocodiles_thomas-couillard_unsplash_0 (1)

CENTRAL NEWS DESK: मगरमच्छ का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। लोग उससे दूरी बनाकर रखते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव में एक मगरमच्छ ऐसा भी था, जिसे ग्रामीण परिवार के सदस्य की तरह मानते थे। गांव वाले उसे प्यार से गंगाराम बुलाते थे। ग्रामीणों के अनुसार, गंगाराम करीब 130 वर्षों तक गांव के तालाब में रहा और इस दौरान उसने कभी किसी ग्रामीण को नुकसान नहीं पहुंचाया। यही वजह थी कि लोगों और इस मगरमच्छ के बीच डर के बजाय विश्वास और अपनापन बन गया था।

तालाब में मगरमच्छ, फिर भी नहीं था ग्रामीणों को डर

गांव की महिलाएं रोज इसी तालाब से पानी भरती थीं। किसान अपने पशुओं को भी तालाब में पानी पिलाते थे। बच्चे तालाब के किनारे खेलते थे। मगरमच्छ के मौजूद होने के बावजूद ग्रामीणों के मन में उसके प्रति डर नहीं, बल्कि एक अलग तरह का भरोसा था। गंगाराम गांव की पहचान बन चुका था। उसकी कहानी धीरे-धीरे आसपास के इलाकों तक पहुंची तो वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यटकों की भी इस गांव में रुचि बढ़ने लगी।

2019 में हुई गंगाराम की मौत, गांव में पसरा मातम

साल 2019 में गंगाराम की मौत हो गई। मगरमच्छ की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने उसे परिवार के सदस्य की तरह अंतिम विदाई दी। बताया जाता है कि गंगाराम की मौत के दिन ग्रामीणों ने अपने घरों में चूल्हा तक नहीं जलाया। गांव वालों ने पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया।

अब एनसीईआरटी की किताब में पढ़ेंगे बच्चे

बावा मोहतरा के गंगाराम मगरमच्छ की यह अनोखी कहानी अब देशभर के बच्चों तक पहुंचने वाली है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने इस कहानी को अपने नए पाठ्यक्रम में शामिल किया है। यह कहानी ‘माई इंडिया! – अ बॉन्ड बिटवीन ह्यूमन्स एंड एनिमल्स’ शीर्षक वाले पाठ्यक्रम का हिस्सा है। इसके जरिए बच्चों को इंसान और वन्यजीवों के बीच संबंध, सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का महत्व समझाने की कोशिश की गई है।

इंसान और वन्यजीवों के रिश्ते की मिसाल बना गंगाराम

गंगाराम की कहानी सिर्फ एक मगरमच्छ की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसान और वन्यजीवों के बीच बने अनोखे रिश्ते की मिसाल भी है। जहां आमतौर पर मगरमच्छ और इंसानों के बीच दूरी और डर देखा जाता है, वहीं बावा मोहतरा के ग्रामीणों ने वर्षों तक गंगाराम के साथ सह-अस्तित्व का रिश्ता बनाए रखा। अब एनसीईआरटी के जरिए यह कहानी देशभर के छात्रों तक पहुंचेगी और उन्हें वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संदेश देगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed