महाराष्ट्र विधानसभा में महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक पास: अब महिला किसानों को मिलेगी अलग पहचान, सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ
CENTRAL NEWS DESK: महाराष्ट्र विधानसभा ने गुरुवार को सर्वसम्मति से महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक पारित कर दिया। इस ऐतिहासिक विधेयक का उद्देश्य खेती और उससे जुड़े कार्यों में योगदान देने वाली महिलाओं को आधिकारिक रूप से महिला किसान का दर्जा देना और उन्हें सरकारी योजनाओं, संस्थागत ऋण, कृषि सेवाओं तथा विशेष पहचान पत्र का लाभ दिलाना है। अब यह विधेयक मंजूरी के लिए विधान परिषद में पेश किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि यह देश का अपनी तरह का पहला कानून है, जो महिलाओं के कृषि योगदान को कानूनी पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
महिला किसानों को मिलेगी नई पहचान
अब तक खेती में पुरुषों के बराबर मेहनत करने के बावजूद अधिकांश महिलाओं को किसान के रूप में मान्यता नहीं मिलती थी। इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि ज्यादातर कृषि भूमि पुरुषों के नाम पर दर्ज होती है। ऐसे में महिलाएं कई सरकारी योजनाओं और कृषि सुविधाओं से वंचित रह जाती थीं। नए विधेयक के लागू होने के बाद खेती, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, पोल्ट्री और अन्य कृषि आधारित कार्यों से जुड़ी महिलाओं को भी आधिकारिक तौर पर किसान माना जाएगा।
मिलेगा महिला किसान पहचान पत्र
विधेयक के तहत महिला किसानों को महिला किसान पहचान पत्र जारी किया जाएगा। इस पहचान पत्र के जरिए महिलाएं कई सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से उठा सकेंगी।
इन सुविधाओं में शामिल हैं:
- सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ
- कृषि ऋण
- बीज और उर्वरक उपलब्धता
- ई-किसान सेवाएं
- प्रत्यक्ष बाजार से जुड़ने का अवसर
- वित्तीय सहायता
सरकार का मानना है कि इससे महिला किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें कृषि क्षेत्र में स्वतंत्र पहचान मिलेगी।
महिला किसान सशक्तिकरण परिषद बनेगी
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए बताया कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महिला किसान सशक्तिकरण परिषद बनाई जाएगी। इस परिषद की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे। इसके अलावा राज्य स्तर की समिति और महिला किसान सशक्तिकरण प्रकोष्ठ भी बनाया जाएगा, जो योजनाओं के संचालन, निगरानी और मूल्यांकन का काम करेगा।
एम.एस. स्वामीनाथन का किया उल्लेख
विधेयक पेश करते समय कृषि मंत्री ने हरित क्रांति के जनक एम.एस. स्वामीनाथन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा कृषि विकास के केंद्र में किसानों के कल्याण और विशेष रूप से महिला किसानों की भूमिका को महत्व देने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि यह कानून उसी सोच को आगे बढ़ाने वाला कदम है।
केवल खेती नहीं, पशुपालन करने वाली महिलाएं भी होंगी शामिल
सरकार ने महिला किसान की परिभाषा को व्यापक बनाया है।
अब केवल खेत में फसल उगाने वाली महिलाएं ही नहीं बल्कि
- पशुपालन
- डेयरी
- पोल्ट्री
- मत्स्य पालन
- मधुमक्खी पालन
- कृषि आधारित अन्य गतिविधियों
से जुड़ी महिलाओं को भी किसान का दर्जा मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह ग्रामीण भारत की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार किया गया प्रावधान है।
विधानसभा में सभी दलों ने किया समर्थन
विधेयक को सत्ता और विपक्ष दोनों का समर्थन मिला। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि यह केवल कानून नहीं बल्कि उन लाखों महिलाओं को सम्मान देने का प्रयास है, जिन्होंने वर्षों से कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।
आदित्य ठाकरे ने उठाए स्वास्थ्य और कर्जमाफी के मुद्दे
शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता आदित्य ठाकरे ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि महिलाओं को अक्सर केवल कृषि मजदूर समझा जाता है, जबकि वे खेती में बराबर की भागीदार होती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कानूनी पहचान मिलना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ग्रामीण महिलाओं में कुपोषण, आयरन, कैल्शियम और विटामिन-बी12 की कमी जैसी समस्याओं पर भी सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने अगली विधानसभा बैठक से पहले किसानों के लिए व्यापक कर्जमाफी की भी मांग की।
महिलाओं को सह-स्वामित्व देने की उठी मांग
एनसीपी (एसपी) नेता जयंत पाटिल ने परिवार की कृषि भूमि में महिलाओं को सह-स्वामित्व देने की मांग रखी। वहीं शिवसेना (यूबीटी) विधायक भास्कर जाधव ने सवाल उठाया कि किसान बनने के लिए भूमि स्वामित्व का क्या प्रावधान होगा और क्या सरकार महिलाओं को जमीन के अधिकार से भी जोड़ेगी।
सरकार ने दिया जवाब
कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने स्पष्ट किया कि इस कानून का उद्देश्य केवल उन महिलाओं को पहचान देना नहीं है जिनके नाम जमीन दर्ज है, बल्कि हर उस महिला को किसान का दर्जा देना है जो खेती या उससे जुड़े कार्यों में योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
लागू करने के लिए बनाई जाएगी विशेष समिति
सरकार ने बताया कि कानून लागू होने के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है। यह समिति महिलाओं को योजनाओं से जोड़ने और क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस कानून के लागू होने के बाद लाखों महिलाओं को पहली बार कृषि क्षेत्र में स्वतंत्र पहचान मिलेगी और वे सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता, कृषि ऋण तथा अन्य सुविधाओं का लाभ सीधे प्राप्त कर सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस कानून का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हुआ, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है और महिला किसानों को अधिकार दिलाने की दिशा में नई शुरुआत साबित होगा।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
