सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला: बोलीं- गाज़ा में बच्चों को निशाना बनाया जा रहा, भारत की चुप्पी चिंताजनक

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CENTRAL NEWS DESK: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने गाज़ा में जारी युद्ध और फ़िलिस्तीनी नागरिकों की मौतों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि गाज़ा में बच्चों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन भारत सरकार इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है।

सोनिया गांधी ने कहा कि दुनिया के कई देश अब इज़राइल की सैन्य कार्रवाई पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भारत लगातार चुप बना हुआ है। उनके मुताबिक, यह चुप्पी केवल नैतिक रूप से ही नहीं बल्कि भारत के रणनीतिक हितों के लिहाज़ से भी चिंता का विषय है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का दिया हवाला

सोनिया गांधी ने अपने लेख में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की जून 2026 में जारी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आयोग की 94 पन्नों की रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया है कि गाज़ा में फ़िलिस्तीनियों के अस्तित्व को समाप्त करने के उद्देश्य से बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इस आयोग की अध्यक्षता भारत के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार गाज़ा में अब तक करीब 20 हजार बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 44 हजार से अधिक बच्चे घायल हुए हैं। बड़ी संख्या में बच्चे स्थायी रूप से विकलांग भी हो गए हैं।

स्कूल, अस्पताल और स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित

सोनिया गांधी ने कहा कि रिपोर्ट में गाज़ा की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की भयावह स्थिति का भी उल्लेख किया गया है।

उन्होंने दावा किया कि—

  • गाज़ा के लगभग 97 प्रतिशत स्कूल क्षतिग्रस्त या नष्ट हो चुके हैं।
  • बच्चों के अस्पतालों सहित स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
  • गर्भपात और प्रसव संबंधी जटिलताओं में लगभग 300 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
  • मारे गए और घायल लोगों में लगभग 27 प्रतिशत बच्चे शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में बच्चों के सिर और गर्दन पर गोली लगने के निशान मिले हैं, जिससे गंभीर सवाल खड़े होते हैं।


हमास का हमला गलत था, लेकिन जवाबी कार्रवाई भी अमानवीय: सोनिया

सोनिया गांधी ने कहा कि करीब ढाई वर्ष पहले हमास द्वारा इज़राइल पर किया गया हमला बेहद भयावह और पूरी तरह अस्वीकार्य था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद इज़राइली सेना की सैन्य कार्रवाई अंधाधुंध हिंसा और अत्यधिक बल प्रयोग में बदल गई, जिसका सबसे अधिक असर आम नागरिकों और बच्चों पर पड़ा।


“भारत अकेला देश, जिसने चुप्पी साध रखी”

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाज़ा में हो रही तबाही पर लगातार चिंता जता रहा है, तब भारत सरकार ने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने कहा कि जस्टिस एस. मुरलीधर की रिपोर्ट आने के बाद भी केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।


जस्टिस एस. मुरलीधर के तबादले का भी किया जिक्र

सोनिया गांधी ने अपने लेख में जस्टिस एस. मुरलीधर के दिल्ली हाईकोर्ट से तबादले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनका तबादला उस समय हुआ था जब उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों से पहले कथित भड़काऊ भाषणों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे।


भारत की विदेश नीति पर भी उठाए सवाल

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की पहचान हमेशा उपनिवेशवाद के विरोध, अंतरराष्ट्रीय शांति और विकासशील देशों के समर्थन के लिए रही है। लेकिन वर्तमान समय में भारत वैश्विक मानवीय संकटों पर पहले जैसी सक्रिय भूमिका निभाता दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि भारत को अपने नैतिक मूल्यों और ऐतिहासिक विदेश नीति की परंपरा के अनुरूप स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।


अमेरिका के समर्थन पर भी साधा निशाना

सोनिया गांधी ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाली सरकार के समर्थन ने इज़राइल को अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के विरोध के कारण कई मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने कथित युद्ध अपराधों से जुड़े तथ्यों का विस्तृत दस्तावेज़ तैयार किया है।


कई देशों ने बदला अपना रुख

सोनिया गांधी के मुताबिक अब दुनिया के कई देश इज़राइल की नीतियों से दूरी बना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि—

  • फ़्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने फ़िलिस्तीन को मान्यता देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
  • दक्षिण अफ्रीका ने इज़राइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में मामला दायर किया है।
  • कई यूरोपीय देशों ने इज़राइल को हथियारों की आपूर्ति सीमित या बंद कर दी है।
  • कई लैटिन अमेरिकी देशों ने इज़राइल के साथ अपने कूटनीतिक संबंध कम या समाप्त कर दिए हैं।

पांच वर्षीय हिंद रजब की कहानी का किया उल्लेख

सोनिया गांधी ने अपने लेख में पांच वर्षीय फ़िलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि जनवरी 2024 में गाज़ा सिटी से निकलते समय हिंद रजब के परिवार की कार पर गोलियां चलाई गईं। इस हमले में उसके छह परिजनों की मौत हो गई। कई घंटे तक वह कार में फंसी रही। बाद में उसे बचाने पहुंचे दो पैरामेडिक्स भी मारे गए। उन्होंने कहा कि यह घटना गाज़ा के मानवीय संकट की सबसे दर्दनाक तस्वीरों में से एक है।


भारत में फिल्म रिलीज़ को लेकर भी उठाया सवाल

सोनिया गांधी ने कहा कि हिंद रजब की घटना पर बनी फिल्म को भारत में लंबे समय तक रिलीज़ की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक दबाव बढ़ने के बाद ही फिल्म को मंजूरी दी गई।


“दुनिया इज़राइल से दूरी बना रही, भारत करीब जा रहा”

सोनिया गांधी ने कहा कि वर्तमान समय में जब दुनिया का बड़ा हिस्सा इज़राइल की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, तब भारत उसके और करीब जाता दिखाई दे रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़राइल यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दौरा ऐसे समय हुआ जब कुछ ही दिनों बाद इज़राइल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की।


पाकिस्तान को मिला कूटनीतिक अवसर

सोनिया गांधी ने दावा किया कि भारत की चुप्पी का फायदा पाकिस्तान ने उठाने की कोशिश की और उसने खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने पुराने संबंधों और वैश्विक साख के कारण इस भूमिका में अधिक प्रभावी हो सकता था, लेकिन सरकार की मौजूदा नीति के कारण यह अवसर हाथ से निकल गया।


फ़िलिस्तीनी बच्चों के समर्थन में आवाज़ उठाने की अपील

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत को फ़िलिस्तीन के आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों के पक्ष में स्पष्ट और मानवीय रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित और मानवीय मूल्य दोनों यही मांग करते हैं कि गाज़ा में हो रही हिंसा, नागरिकों की मौत और पश्चिमी तट में फ़िलिस्तीनी परिवारों के विस्थापन के खिलाफ स्पष्ट आवाज़ उठाई जाए।

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