ईरान-अमेरिका वार्ता में बड़ी प्रगति, 60 दिनों में अंतिम समझौते का रोडमैप तैयार; लेबनान संकट बना सबसे बड़ी चुनौती
बर्गेनस्टॉक में आयोजित उच्चस्तरीय शांति वार्ता में हिस्सा लेने पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची। बातचीत का केंद्र लेबनान संकट, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत रहा।
CENTRAL NEWS DESK: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है। स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के पहले दौर के बाद ईरान ने बातचीत को “सकारात्मक और प्रगतिशील” बताया है। हालांकि, लेबनान में जारी संघर्ष और इजराइल-हिज्बुल्लाह टकराव अब भी समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने अगले 60 दिनों के भीतर एक व्यापक और अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए रोडमैप पर सहमति जताई है। आने वाले दिनों में तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रहेगी।
तनावपूर्ण शुरुआत के बावजूद आगे बढ़ी बातचीत
वार्ता की शुरुआत तनावपूर्ण माहौल में हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की कोशिश की तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रम्प के इस बयान पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताई और कुछ समय के लिए वार्ता भी बाधित हो गई। हालांकि बाद में कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत दोबारा शुरू हुई और दोनों पक्ष आगे की प्रक्रिया पर सहमत हो गए।
लेबनान संकट पर विशेष तंत्र बनेगा
वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु लेबनान में जारी संघर्ष रहा। संयुक्त बयान के अनुसार अमेरिका, ईरान और मध्यस्थ देशों ने लेबनान में युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष “डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल” बनाने पर सहमति जताई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि लेबनान में शांति बहाल करना इस समझौते की पहली और सबसे बड़ी परीक्षा होगी। उनका कहना है कि यदि वहां हिंसा नहीं रुकी तो व्यापक समझौते पर असर पड़ सकता है।
ईरान को मिलेगी आर्थिक राहत
वार्ता के दौरान आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ा कदम उठाया गया। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग अगले 60 दिनों के लिए तेल, पेट्रोकेमिकल और उससे जुड़े उत्पादों पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील देने की तैयारी कर रहा है। इससे ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने और भुगतान प्राप्त करने में राहत मिलेगी। विशेष रूप से चीन के साथ तेल व्यापार फिर से तेज होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा कतर में फंसी ईरानी संपत्तियों को लेकर भी एक समझौता हुआ है, जिससे ईरान को अरबों डॉलर की वित्तीय राहत मिल सकती है।
परमाणु कार्यक्रम पर भी आगे बढ़ेगी चर्चा
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के बीच हुई बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा हुई। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करे, जबकि ईरान भविष्य में शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम जारी रखने के अधिकार पर जोर दे रहा है। हालांकि इस मुद्दे पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है, लेकिन दोनों पक्षों ने तकनीकी वार्ता जारी रखने का फैसला किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बनेगा संचार तंत्र
दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी सैन्य या समुद्री टकराव से बचने के लिए एक सीधी संचार व्यवस्था स्थापित करने पर भी सहमति जताई है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार की स्थिरता के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
मध्य पूर्व में शांति की नई उम्मीद
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अगले 60 दिनों में लेबनान संकट नियंत्रित होता है और परमाणु कार्यक्रम पर सहमति बनती है, तो यह मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। फिलहाल दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने और तनाव कम करने की इच्छा दिखाई है, जिससे क्षेत्र में शांति की नई उम्मीद जगी है।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
