अमेरिका ने भारत पर नए टैरिफ लगाने का नोटिस जारी किया, कारण बताया ‘रूसी धमकी’
Central News Desk: अमेरिका ने भारत पर अचानक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। यह कदम 27 अगस्त से लागू होगा। अमेरिकी प्रशासन ने इसे “रूस से मिली धमकियों का जवाब” बताते हुए जायज़ ठहराने की कोशिश की है। हालाँकि, व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि यह मसौदा नोटिस बेतुका और अव्यवहारिक है, क्योंकि भारत का सीधे तौर पर रूस की धमकियों से कोई संबंध नहीं है।
क्या है अमेरिका का मसौदा नोटिस?
अमेरिकी वाणिज्य विभाग की ओर से जारी इस नोटिस में कहा गया है कि — 27 अगस्त से भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ विशेष उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। यह नियम उन उत्पादों पर भी लागू होगा जो पहले से अमेरिका पहुंच चुके हैं लेकिन अभी तक कस्टम्स क्लियरेंस या गोदाम से बाहर नहीं निकले।
नोटिस में सीधे तौर पर कहा गया है कि यह कार्रवाई रूस की ओर से हाल में मिली धमकियों के जवाब में है और भारत को इस संदर्भ में शामिल किया जा रहा है।
भारत पर क्यों डाला गया दबाव?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका का यह कदम भू-राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है।
भारत ने पिछले कुछ सालों में रूस से तेल, गैस और रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाई है।
अमेरिका और पश्चिमी देश लगातार भारत पर दबाव बना रहे हैं कि वह रूस से दूरी बनाए।
चूँकि भारत रूस से तेल खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, अमेरिका इसे अप्रत्यक्ष रूप से “रूस की मदद” मानता है।
किन उत्पादों पर असर पड़ेगा?
हालाँकि अभी अमेरिकी नोटिस में साफ़ सूची जारी नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि— स्टील और एल्युमिनियम उत्पाद, टेक्सटाइल और लेदर गुड्स, फार्मा और केमिकल्स, आईटी हार्डवेयर व इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स
इन सेक्टर्स पर टैरिफ बढ़ सकता है। ये भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात का बड़ा हिस्सा हैं।
भारत की संभावित प्रतिक्रिया
भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने अभी इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार—
भारत जल्द ही WTO (विश्व व्यापार संगठन) में इस नोटिस को चुनौती दे सकता है।
कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका से बातचीत शुरू की जाएगी।
भारत प्रतिशोधी कदम के तौर पर अमेरिका से आने वाले कुछ उत्पादों पर काउंटर-टैरिफ लगाने पर भी विचार कर सकता है।
वैश्विक असर
अगर यह टैरिफ लागू हुआ तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में खटास आ सकती है।
अमेरिका भारत का बड़ा निर्यात बाजार है, खासकर IT और फार्मा के लिए।
ऐसे हालात में भारत को यूरोप, अफ्रीका और एशियाई देशों में नए बाजार तलाशने पड़ सकते हैं।
अमेरिका का यह कदम भारत पर सीधा राजनीतिक दबाव है, न कि व्यापारिक आवश्यकता। रूस से जुड़े मुद्दों में भारत को घसीटना अमेरिकी रणनीति का हिस्सा लगता है। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि भारत इस चुनौती का जवाब कैसे देता है।
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