एमपी हाईकोर्ट में टाइपिंग एरर से जमानत में बड़ा उलटफेर, कुछ घंटों में सुधारा आदेश

0
theheadlinetoday

Central News Desk: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ग्वालियर पीठ में सोमवार को एक हैरान करने वाली गलती सामने आई। यहां एक मामूली टाइपिंग एरर ने जमानत के पूरे खेल को पलट कर रख दिया। वेबसाइट पर अपलोड हुए आदेश में जिन दो आरोपियों के नाम थे, वे आपस में बदल गए, जिससे वह आरोपी बेल पर रिहा हो गया जिसे जेल में रहना था, और जिसे जमानत मिलनी थी उसकी अर्जी खारिज हो गई।

हत्या के आरोप में गिरफ्तार पिता-पुत्र
मामला विदिशा के त्योंदा का है, जहां पिछले साल 5 जुलाई को दुकानदार प्रकाश पाल की पीट-पीटकर हत्या के शक में पिता हल्के और बेटा अशोक गिरफ्तार हुए थे। दोनों ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी। लेकिन कोर्ट के आदेश में टाइपो एरर से हल्के के लिए जमानत मंजूर और अशोक के लिए जमानत खारिज लिख दिया गया।

कोर्ट में मच गई हलचल
जैसे ही आदेश वेबसाइट पर अपलोड हुआ, हल्के के वकील अमीन खान ने बेल बांड जमा कर दिए और जेल अधिकारियों को रिहाई का आदेश भेजा गया। हल्के की खुशी ज्यादा देर नहीं टिक पाई क्योंकि कुछ ही घंटों में कोर्ट कर्मचारियों ने वकील को बताया कि आदेश में गड़बड़ी हुई है।

जज ने तुरंत सुधारी गलती
गड़बड़ी का पता लगते ही ग्वालियर पीठ के जज राजेश कुमार गुप्ता ने पहले वाला आदेश वापस लेते हुए नया आदेश जारी किया। कोर्ट ने साफ किया कि यह केवल टाइपिंग की गलती थी, जिसे अब सुधार दिया गया है।

कानूनी हलकों में चर्चा
इस घटना ने कोर्ट परिसर और कानूनी हलकों में हलचल मचा दी। वकीलों का कहना है कि ऐसे मामलों में सावधानी बेहद जरूरी है क्योंकि एक छोटी सी चूक भी न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *