बांग्लादेश में भारत विरोध की आग: शेख हसीना को बताया ‘हत्यारिन’, NCP नेता ने मुजीबपंथ को बताया ख़तरा
World News Desk: बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर सियासी बवाल की आग में झुलस रही है। बुधवार को आयोजित एक कट्टरपंथी रैली में नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के युवा नेता सरजिस आलम ने न केवल भारत समर्थक विचारधारा पर हमला बोला, बल्कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ‘हत्यारिन’ कहकर उनके खिलाफ मुकदमे की मांग कर दी।
इस बयान के साथ ही गोपालगंज, जो कि शेख मुजीबुर रहमान का पैतृक जिला है, हिंसा की चपेट में आ गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और कर्फ्यू लगा दिया गया है।
“भारत समर्थक ताकतों को खत्म करना होगा” — सरजिस आलम का ज़हर
ढाका की इस रैली में सरजिस आलम ने खुले मंच से कहा:
“भारत समर्थक ताकतें बांग्लादेश को खोखला कर रही हैं। मुजीबपंथ आज भी भारत के इशारे पर काम करता है। ऐसे सभी विचारों को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर पूरी तरह से खत्म करना जरूरी है।”
NCP नेता ने इस बात पर ज़ोर दिया कि “अब केवल कानूनी लड़ाई काफी नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति की ज़रूरत है”। यह बयान उस समय आया है जब बांग्लादेश में 2026 के आम चुनावों की चर्चा तेज हो चुकी है और सत्ता विरोधी ताकतें मैदान में उतरने लगी हैं।
गोपालगंज बना युद्धक्षेत्र, झड़पों के बाद लगा कर्फ्यू
बयानबाज़ी का असर ज़मीन पर साफ दिखा। जैसे ही NCP के छात्र संगठन ने गोपालगंज में मार्च निकाला, सैकड़ों की संख्या में शेख हसीना समर्थक भी सड़कों पर उतर आए। पुलिस ने हालात काबू में लाने की कोशिश की, लेकिन दोनों पक्षों में जबरदस्त टकराव हुआ।
लाठीचार्ज, पत्थरबाज़ी और आगजनी के बाद प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा।
सरजिस आलम ने इस पर कहा:
“गोपालगंज में आज भी मुजीबपंथी ताकतों के गढ़ मौजूद हैं। अगर हम इन्हें आज नहीं रोकते, तो बांग्लादेश की पहचान मिट जाएगी।”
“हमें कठपुतली न्यायपालिका नहीं चाहिए” – हसीना पर हमला
रैली में सरजिस ने शेख हसीना को लेकर कहा:
“वो सिर्फ एक नेता नहीं, हत्यारिन हैं। 5 अगस्त 2024 को हजारों छात्रों ने जिन सपनों के लिए जान दी, आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला। उनके खिलाफ मुकदमा चलना चाहिए।”
उन्होंने एक स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका की मांग की और कहा कि बांग्लादेश को ऐसी सरकार चाहिए जो “सिर्फ सत्ता की नहीं, आम जनता के अधिकारों की सेवा करे।”
🔻 राजनीतिक मतभेद नहीं, राष्ट्रहित ज़रूरी: विपक्षी गठजोड़ का इशारा?
सरजिस आलम ने अपने भाषण में यह भी संकेत दिए कि विपक्षी दलों को एक मंच पर आना होगा।
“राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन देश की संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए हमें एकजुट होना होगा। क्रांति के सभी सिपाही एक साथ खड़े हों।”
यह बयान बांग्लादेश में एक नए विपक्षी गठजोड़ के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले चुनावों में अवामी लीग सरकार को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
