राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की फाइनल रिपोर्ट, चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम नहीं, 8 आरोपी जेल में
CENTRAL NEWS DESK: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और अनियमितताओं के मामले में जांच अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, अंतिम रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के खिलाफ चोरी में संलिप्तता का कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
एसआईटी की रिपोर्ट सरकार की ओर से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई के लिए सौंप दी गई है। इससे पहले मामले में आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी और सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान की रकम की गिनती के दौरान कथित चोरी और गड़बड़ी की शिकायतों के बाद मामला सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया।
एसआईटी ने शुरुआती जांच के बाद 23 जून को सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें चढ़ावे की गिनती, निगरानी व्यवस्था, कर्मचारियों की भूमिका और सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में एफआईआर की सिफारिश भी की गई थी।
आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
एसआईटी की शुरुआती जांच के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव के नाम शामिल हैं।
इन सभी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ और उनके ठिकानों पर जांच की। जुलाई के अंत तक भी सभी आठ आरोपी जेल में थे और उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई थी।
चढ़ावे की गिनती के दौरान चोरी का आरोप
जांच में सबसे अहम पहलू चढ़ावे की गिनती के दौरान हुई कथित चोरी है। एसआईटी की शुरुआती जांच में ऐसे सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों का उल्लेख सामने आया, जिनमें कर्मचारियों पर रकम छिपाने के आरोपों की जांच की गई।
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, जांचकर्ताओं को करीब 40 दिनों के दौरान चोरी के कई संदिग्ध मामलों का पता चला। सीसीटीवी फुटेज में कर्मचारियों द्वारा नोटों को कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाने जैसे कथित घटनाक्रम भी जांच के दायरे में आए।
चंपत राय और अनिल मिश्रा को लेकर क्या निकला?
इस मामले में शुरुआत से ही मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस होती रही। शुरुआती रिपोर्टों में चंपत राय, अनिल मिश्रा और अन्य पदाधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए थे।
हालांकि, बाद में दर्ज एफआईआर में चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बनाया गया। अब अंतिम रिपोर्ट को लेकर सामने आई ताजा जानकारी में भी दोनों के खिलाफ चोरी में संलिप्तता का निष्कर्ष नहीं बताया गया है। यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति का नाम रिपोर्ट में चर्चा या प्रशासनिक जवाबदेही के संदर्भ में आना और उसे आपराधिक आरोपी ठहराना अलग-अलग बातें हैं।
पहले आई रिपोर्ट में उठे थे निगरानी पर सवाल
एसआईटी की शुरुआती जांच में सिर्फ चोरी करने वाले कर्मचारियों की भूमिका नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे। जांच में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया, कर्मचारियों की जांच, सुरक्षा मानकों और निगरानी तंत्र की कमियों को भी देखा गया था।
यानी जांच का दायरा केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं था कि रकम किसने उठाई, बल्कि यह भी देखा गया कि ऐसी स्थिति बनने से रोकने के लिए बनाए गए नियमों और सुरक्षा व्यवस्था का पालन क्यों नहीं हुआ।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिए थे इस्तीफे
मामला सामने आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। उस समय दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी और उन्हें मामले में नामजद आरोपी भी नहीं बनाया गया था। अब एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में दोनों के खिलाफ आपराधिक संलिप्तता का निष्कर्ष सामने नहीं आने की खबर से इस मामले में उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा था मामला
राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं पहुंची थीं। एसआईटी ने जुलाई में शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी स्थिति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत के इस रुख के बाद रिपोर्ट के सभी विवरण सार्वजनिक दस्तावेज के रूप में सामने नहीं आए।
अब आगे क्या होगा?
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में जांच और अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
वहीं, एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ आपराधिक भूमिका नहीं पाए जाने की जानकारी इस मामले का सबसे बड़ा नया घटनाक्रम है। हालांकि, रिपोर्ट के हर निष्कर्ष का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं है, इसलिए अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत में होने वाली आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
सबसे बड़ा सवाल: चोरी हुई तो जिम्मेदार कौन?
पूरे मामले में अब मुख्य सवाल यही है कि चढ़ावे की रकम में कथित चोरी किस स्तर पर हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और निगरानी व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
आठ आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चल रही है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद अब जांच का फोकस आरोपियों की कथित भूमिका, बरामदगी और उपलब्ध सीसीटीवी व दस्तावेजी साक्ष्यों पर रहेगा। वहीं, मंदिर में चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर किए जाने वाले बदलाव भी महत्वपूर्ण होंगे।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
