पहलगाम हमला: कब और कैसे घुसे आतंकी, कौन है असल मास्टरमाइंड?
Central News Desk: 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हिंदू पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन महादेव के तहत 28 जुलाई को तीनों आतंकियों को मार गिराया गया, जिनके पास से मिले सबूतों ने इस पूरी साजिश के पीछे पाकिस्तान और लश्कर-ए-तैयबा की सीधी संलिप्तता को उजागर कर दिया है।
भारत में कैसे घुसे थे आतंकी?
भारतीय खुफिया सूत्रों के मुताबिक—
हमले में शामिल आतंकी सुलैमान शाह उर्फ फैजल जट्ट, अबु हमजा उर्फ अफगान, और यासिर उर्फ जिब्रान मई 2022 में एलओसी पार कर गुरेज सेक्टर के रास्ते भारत में दाखिल हुए थे। भारत में घुसपैठ के बाद ये आतंकी पहलगाम के जंगलों में एक झोंपड़ी में छिप गए, जहां स्थानीय मददगार परवेज और बशीर अहमद जठार ने उन्हें शरण दी।
इनके रेडियो सिग्नल को तभी से इंटरसेप्ट किया जा रहा था, लेकिन वे लगातार गुप्त लोकेशन बदलते रहे और सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर थे।
ऑपरेशन महादेव: निर्णायक कार्रवाई
28 जुलाई को भारतीय सेना ने दाचिगाम-हरवान जंगल क्षेत्र में आतंकी ठिकाने पर हमला कर तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया।
उनके पास से तीन AK-103 राइफल, सेटेलाइट फोन, और एक माइक्रो-एसडी कार्ड बरामद हुआ, जिसमें पाकिस्तान की NADRA एजेंसी का बायोमेट्रिक डेटा था। दो आतंकियों के पास से पाकिस्तानी वोटर ID कार्ड मिले, जो लाहौर और गुजरांवाला से जारी थे। इसके अलावा पाकिस्तानी पैक्ड चॉकलेट और खाने-पीने का सामान भी मिला, जिन पर मुजफ्फराबाद से 2024 में भेजे गए शिपमेंट के लॉट नंबर दर्ज थे।

असल मास्टरमाइंड कौन है?
इस हमले की पूरी साजिश पाकिस्तान में रची गई थी। लश्कर-ए-तैयबा के लाहौर स्थित ऑपरेशनल चीफ साजिद सैफुल्लाह जट्ट को इस हमले का मुख्य मास्टरमाइंड बताया गया है। रावलकोट निवासी रिज़वान अनीस ने इन आतंकियों की गायबाना नमाज-ए-जनाज़ा भी आयोजित की, जिससे यह साबित होता है कि पाकिस्तान में आतंकियों को ‘शहीद’ बताकर नायक की तरह महिमामंडित किया जा रहा है।
सबूत जो पाकिस्तान को बेनकाब करते हैं
गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में बयान देते हुए कहा:
“हमारे पास अब पहली बार पाकिस्तान की तरफ से जारी किए गए सरकारी दस्तावेज़ हैं, जो यह निर्विवाद रूप से साबित करते हैं कि पहलगाम हमले के आतंकी पाकिस्तानी नागरिक थे।”
बरामद सेटेलाइट फोन से मिले डेटा, वोटर ID, पाकिस्तानी खाद्य उत्पाद, और फॉरेंसिक जांच में गोलियों के खोखे AK-103 राइफल से मेल खाना—ये सभी इस साजिश के पीछे पाकिस्तान की संलिप्तता की पुष्टि करते हैं।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
