NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI का बड़ा एक्शन, NTA के 3 विषय विशेषज्ञों पर आरोपपत्र दाखिल; दोषी साबित हुए तो उम्रकैद तक की सजा

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CENTRAL NEWS DESK: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक यानी नीट-यूजी 2026 के कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। तीनों पर सार्वजनिक सेवक के रूप में काम करते हुए आपराधिक विश्वासघात करने और परीक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है।

सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में मनीषा गुरुनाथ मंधारे, प्रह्लाद कुलकर्णी और मनीषा संजय हवलदार को आरोपी बनाया है। तीनों नीट-यूजी 2026 के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े विषय विशेषज्ञ थे।

तीनों आरोपियों पर लगाई गईं कई गंभीर धाराएं

सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS, 2023 की धारा 316(5), सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम, 2024 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 समेत कई धाराएं लगाई हैं।

बीएनएस की धारा 316(5) सार्वजनिक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात से संबंधित है। इसके तहत आरोप सिद्ध होने पर उम्रकैद या 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान

जांच एजेंसी ने सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई हैं। इन प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो गए हैं। मामले में अंतिम फैसला अदालत में होने वाली सुनवाई और सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।

प्रश्नपत्र तैयार करने वाली टीम का हिस्सा थे आरोपी

सीबीआई की जांच के मुताबिक, तीनों आरोपी नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या उससे जुड़ी गोपनीय सामग्री किस तरह बाहर पहुंची। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कथित प्रश्नपत्र लीक में किसी तरह की लापरवाही, मिलीभगत या जानबूझकर नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया।

3 मई को हुई थी नीट-यूजी 2026 परीक्षा

नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक को लेकर विवाद सामने आया, जिसके बाद मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपी गई। नीट देश की सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। लाखों विद्यार्थी इसमें शामिल होते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र की गोपनीयता और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर किसी भी तरह की गड़बड़ी विद्यार्थियों के भविष्य पर सीधा असर डाल सकती है।

आगे और लोगों पर हो सकती है कार्रवाई

तीन विषय विशेषज्ञों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित प्रश्नपत्र लीक की पूरी श्रृंखला में और कौन-कौन लोग शामिल थे और गोपनीय प्रश्नपत्र तक उनकी पहुंच किस तरह बनी।

मामले में आगे और गिरफ्तारियां या आरोपपत्र सामने आते हैं या नहीं, यह जांच की प्रगति और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।

आरोप साबित होना अभी बाकी

सीबीआई की कार्रवाई के बावजूद तीनों आरोपियों को फिलहाल कानून की नजर में दोषी नहीं माना जा सकता। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की न्यायिक जांच होगी और अदालत में आरोप सिद्ध होने के बाद ही सजा का सवाल आएगा।

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