बिहार चुनाव 2025: कांग्रेस ने बदली रणनीति, सीमांचल में बनेगी ‘सीनियर’, 63 सीटों पर ठोका दावा
Bihar News Desk: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीटों का बंटवारा बड़ा मुद्दा बन गया है। इस बार कांग्रेस ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदलते हुए सीमांचल पर खास फोकस किया है और यहां ‘सीनियर पार्टनर’ की भूमिका निभाने का दावा ठोका है। पार्टी का कहना है कि सीमांचल की राजनीति में उसका प्रभाव सबसे ज्यादा है और यही कारण है कि सीटों के बंटवारे में अबकी बार उसका पलड़ा भारी रहेगा।
महागठबंधन का कुनबा बढ़ा, सीटों का बंटवारा मुश्किल
2020 के चुनाव में महागठबंधन में सिर्फ पाँच दल थे – आरजेडी, कांग्रेस, माले, सीपीआई और सीपीएम। लेकिन 2025 के चुनाव में इसका कुनबा बढ़कर आठ दलों तक पहुँच गया है। इसमें मुकेश सहनी की वीआईपी, हेमंत सोरेन की जेएमएम और पशुपति पारस की एलजेपी भी शामिल हो गए हैं। ऐसे में 243 सीटों का बंटवारा और भी जटिल हो गया है।
कांग्रेस का नया फॉर्मूला: 63 सीटों पर दावा
पिछली बार कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन केवल 19 पर ही जीत दर्ज कर पाई थी। तब कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि आरजेडी ने उसे जानबूझकर हारने वाली सीटें दीं।
इस बार कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह न केवल अपनी 19 सीटिंग सीटों पर, बल्कि पिछली बार दूसरे नंबर पर रही 44 सीटों पर भी दावा करेगी। यानी कांग्रेस कुल 63 सीटों पर मजबूत दावेदारी पेश कर रही है।
सीमांचल पर कांग्रेस की नजर
कांग्रेस का कहना है कि सीमांचल की 24 सीटों में उसका आधार सबसे मजबूत है। कटिहार से तारिक अनवर और किशनगंज से मोहम्मद जावेद जैसे दो सांसद कांग्रेस के खाते में हैं। इसके अलावा पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने भी कांग्रेस को समर्थन दिया है। यही कारण है कि कांग्रेस सीमांचल में ‘नंबर वन पार्टी’ होने का दावा कर रही है।
2020 के चुनाव में सीमांचल में कांग्रेस और एआईएमआईएम ने 5-5 सीटें जीती थीं, जबकि आरजेडी और माले को 1-1 सीटें मिली थीं। अगर 2024 के लोकसभा नतीजों को विधानसभा में तब्दील किया जाए तो सीमांचल की 24 में से 14 सीटें महागठबंधन के खाते में जा सकती हैं, जिसमें कांग्रेस को सबसे बड़ा हिस्सा मिल सकता है।
राहुल गांधी की यात्रा से कांग्रेस को नई ऊर्जा
कांग्रेस को सीमांचल में राहुल गांधी की “वोटर अधिकार यात्रा” से भी बड़ी उम्मीदें हैं। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि जिन इलाकों से राहुल की यात्रा गुजरी थी, वहां कांग्रेस को सीधा लाभ मिलेगा। इन इलाकों में मुस्लिम, दलित, अति पिछड़ा और सवर्ण वोटरों का अनूठा कॉम्बिनेशन बनता है, जो कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करता है।
सीट बंटवारे को लेकर सौदेबाजी तेज
आरजेडी ने 2020 में 144 सीटों पर चुनाव लड़ा और 75 सीटें जीती थीं। इस बार भी गठबंधन में सबसे बड़ा हिस्सा उसी का होगा, लेकिन कांग्रेस अब बैकफुट पर नहीं रहना चाहती। कांग्रेस नेताओं ने साफ किया है कि वे सीमांचल में किसी भी हालत में पीछे नहीं हटेंगे।
महागठबंधन में शामिल बाकी दल भी अपनी-अपनी सीटों की सौदेबाजी में जुटे हैं। लिहाज़ा, आने वाले दिनों में सीट बंटवारे पर खींचतान और भी तेज़ हो सकती है।
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