हाईवे पर हादसा हुआ तो अब एंबुलेंस के लिए नहीं करना पड़ेगा इंतजार, हर टोल प्लाजा पर 24 घंटे तैनाती की तैयारी
CENTRAL NEWS DESK: राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसे के बाद घायलों को जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देश के हर टोल प्लाजा पर एक एंबुलेंस चौबीसों घंटे तैनात करने की योजना तैयार की है। खास बात यह है कि इन एंबुलेंस को राज्यों की आपातकालीन सेवा के 112 नंबर से जोड़ा जाएगा।
केंद्र सरकार सिर्फ एंबुलेंस उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इनके संचालन का खर्च भी वहन करने की तैयारी में है। राज्यों को इनका संचालन करना होगा और तय समय के भीतर दुर्घटनास्थल तक पहुंचने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
करीब 1200 टोल प्लाजा, अभी 500 पर एंबुलेंस
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क करीब 1.46 लाख किलोमीटर तक फैला हुआ है। मंत्रालय के अनुसार देश में लगभग 1200 टोल प्लाजा हैं, लेकिन फिलहाल करीब 500 टोल प्लाजा पर ही एंबुलेंस उपलब्ध हैं। अब सरकार की योजना बाकी टोल प्लाजा को भी एंबुलेंस सुविधा से जोड़ने की है। इसका मकसद दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द प्राथमिक चिकित्सा और अस्पताल तक पहुंचाना है।
राज्यों को मिलेगी एंबुलेंस, खर्च केंद्र उठाएगा
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर के मुताबिक, राज्यों के साथ मिलकर इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में काम तेज किया गया है। योजना के तहत केंद्र सरकार राज्यों को एंबुलेंस उपलब्ध कराएगी। इनके संचालन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी, जबकि इनके संचालन का खर्च किस व्यवस्था के तहत केंद्र वहन करेगा, इसकी विस्तृत जानकारी जल्द जारी होने वाले दिशा-निर्देशों में दी जाएगी।
112 नंबर से जुड़ेगी पूरी व्यवस्था
नई व्यवस्था में सिर्फ टोल प्लाजा पर एंबुलेंस खड़ी करने पर जोर नहीं है, बल्कि उन्हें 112 आपातकालीन सेवा से जोड़ने की शर्त भी रखी गई है। इससे सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही नजदीकी उपलब्ध एंबुलेंस को मौके पर भेजने में मदद मिलेगी। मंत्रालय की कोशिश है कि दुर्घटना के बाद दस मिनट के भीतर एंबुलेंस घटनास्थल तक पहुंच सके।
एनएचएआई केयर के साथ होगा समन्वय
राष्ट्रीय राजमार्गों पर पहले से ही एनएचएआई केयर के तहत करीब तीन हजार एंबुलेंस संचालित हैं। अब टोल प्लाजा पर तैनात होने वाली नई एंबुलेंस को भी इसी व्यवस्था के साथ समन्वित करने की योजना है। मंत्रालय का मानना है कि दोनों व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल होने से दुर्घटना के बाद राहत और चिकित्सा सेवा तेजी से पहुंचाई जा सकेगी।
जहां टोल गेट नहीं, वहां भी मिलेगी एंबुलेंस
देश के कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों पर मल्टीलेन फ्री फ्लो व्यवस्था लागू होने के कारण पारंपरिक टोल गेट नहीं हैं। ऐसे हिस्सों में भी एंबुलेंस की तैनाती की जाएगी। हालांकि यहां टोल प्लाजा के बजाय जरूरत और दुर्घटना की संवेदनशीलता के आधार पर स्थान तय करने की जिम्मेदारी राज्यों की होगी।
सड़क हादसों में हर साल जा रही बड़ी संख्या में जान
सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब सड़क हादसे देश में बड़ी चुनौती बने हुए हैं। वर्ष 2025 में करीब 1.83 लाख लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई। मंत्रालय का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर हादसों में तुलनात्मक रूप से कमी आई है, लेकिन दुर्घटनाओं के बाद घायलों को समय पर इलाज दिलाना भी सड़क सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा है।
जल्द जारी होंगे दिशा-निर्देश
मंत्रालय अब इस योजना को अंतिम रूप देने में जुटा है। एंबुलेंस की तैनाती, संचालन, खर्च और राज्यों की जिम्मेदारियों से जुड़े नियम जल्द जारी किए जाएंगे। सरकार की कोशिश है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर हादसे के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके, ताकि गंभीर रूप से घायल लोगों की जान बचाने की संभावना बढ़े।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
