“कहानी से स्क्रीन तक, फिल्ममेकिंग में बढ़ रही AI की भूमिका”: विष्णु विजयन

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CENTRAL NEWS DESK: फिल्म निर्माण की दुनिया में एआई तेजी से नए बदलाव ला रही है। इसी बदलती तकनीक और इसके व्यावहारिक इस्तेमाल से विद्यार्थियों को रूबरू कराने के लिए 6 सितंबर को एआई फिल्ममेकिंग विषय पर वेबिनार आयोजित किया गया। द इंडी फिल्म स्कूल, नोएडा और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस वेबिनार में फिल्म निर्माण से जुड़े विद्यार्थियों और प्रतिभागियों ने आधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल की।

प्रॉम्प्टिंग से लेकर विजुअल इफेक्ट्स तक समझी तकनीक

वेबिनार में विष्णु विजयन् और उनकी टीम विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुई। उन्होंने प्रस्तुति के साथ अपने वास्तविक प्रोजेक्ट्स के उदाहरण साझा करते हुए बताया कि एआई का इस्तेमाल फिल्म निर्माण के अलग-अलग चरणों में किस तरह किया जा सकता है। प्रतिभागियों को प्रॉम्प्टिंग, एआई आधारित पूर्व-निर्माण और निर्माणोत्तर प्रक्रिया के साथ विजुअल इफेक्ट्स तथा विज्ञापन निर्माण की तकनीकों से भी परिचित कराया गया।

पारंपरिक फिल्ममेकिंग और एआई के बीच अंतर पर चर्चा

सत्र के दौरान पारंपरिक फिल्म निर्माण और एआई आधारित फिल्ममेकिंग के बीच अंतर को भी समझाया गया। उदाहरणों के जरिए विद्यार्थियों को बताया गया कि कहानी की कल्पना से लेकर दृश्य तैयार करने और अंतिम रूप देने तक एआई किस तरह रचनात्मक प्रक्रिया को आसान और प्रभावी बना सकती है।

सवालों के जवाब देकर दूर की विद्यार्थियों की जिज्ञासा

वेबिनार को संवादात्मक बनाए रखने के लिए प्रतिभागियों को टिप्पणियों के माध्यम से सवाल पूछने का अवसर दिया गया। विष्णु विजयन् और उनकी टीम ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब देते हुए एआई फिल्ममेकिंग से जुड़ी शंकाओं को दूर किया। इससे विद्यार्थियों को तकनीक के व्यावहारिक पहलुओं को करीब से समझने का अवसर मिला।

दोनों संस्थानों की टीम और विद्यार्थी रहे मौजूद

कार्यक्रम में द इंडी फिल्म स्कूल के संस्थापक संक्षय बब्बर और सह-संस्थापक शिवेंद्र त्रिवेदी मौजूद रहे। वहीं जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन की ओर से धीरज के साथ उनकी टीम और विद्यार्थी भी वेबिनार से जुड़े।

भविष्य की फिल्ममेकिंग को लेकर मिली नई समझ

वेबिनार के समापन पर प्रतिभागियों ने फिल्म निर्माण में एआई की मौजूदा भूमिका के साथ-साथ इसके भविष्य की संभावनाओं को समझा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह जानने का अवसर दिया कि तेजी से विकसित हो रही एआई तकनीक रचनात्मकता और फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को किस तरह नया स्वरूप दे रही है।

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