नेपाल बाढ़ की तबाही: 669 मौतें, करीब 3 हजार लापता; 287 भारतीय अब भी गायब, भारत ने बढ़ाया रेस्क्यू ऑपरेशन

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CENTRAL N EWS DESK: नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे हिमालयी इलाकों में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। 29 अगस्त 2026 के ताजा अपडेट के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या 669 पहुंच गई है, जबकि तिब्बत में भी 7 लोगों की मौत की सूचना है। पूरे आपदा क्षेत्र में करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

इस आपदा के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। पहाड़ी इलाकों में मलबा, टूटी सड़कें और पुल तथा दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कई गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है और कुछ इलाकों में पूरा बुनियादी ढांचा बाढ़ की चपेट में आ गया है

बचाव दलों ने अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला है। प्रभावित इलाकों से लोगों को हेलीकॉप्टर और दूसरे माध्यमों से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। हालांकि कई जगहों पर मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश अभी भी जारी है।

287 भारतीय अब भी लापता, 88 सुरक्षित निकाले गए

भारत के लिए भी यह आपदा बेहद चिंताजनक है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में 88 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि 287 भारतीय अभी भी लापता हैं। इसके अलावा 128 भारतीय मूल के लोग, जिनके पास दूसरे देशों की नागरिकता है, उनके बारे में भी अभी जानकारी नहीं मिल सकी है।

शनिवार को रसुवा जिले की एक हाइड्रोपावर परियोजना से चार और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया। उन्हें काठमांडू लाया जा रहा है। इसके अलावा चीन के रास्ते करीब 120 भारतीय नागरिक नेपाल पहुंचे हैं और भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है।

फॉरेंसिक टीम नेपाल भेजने की तैयारी

भारत ने नेपाल में चल रहे राहत और बचाव अभियान में सहायता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय ने छह सदस्यीय फॉरेंसिक टीम नेपाल भेजने की तैयारी की है, जो बरामद शवों की पहचान में मदद करेगी।इसके साथ ही भारत ने सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेषज्ञ टीम भी भेजी है। शनिवार को 11 सदस्यीय भारतीय मेडिकल और टनल-रेस्क्यू टीम नेपाल पहुंची और प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद बचाव अभियान की जरूरतों का आकलन शुरू किया।

भारतीय दूतावास ने नेपाल में 24 घंटे की हेल्पलाइन भी सक्रिय रखी है, ताकि प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों के साथ संपर्क बनाया जा सके। भारत की ओर से मेडिकल सहायता, जरूरी सामान और राहत सामग्री भी भेजी जा रही है।

हाइड्रोपावर परियोजनाओं में सबसे ज्यादा चिंता

बाढ़ ने नेपाल के हाइड्रोपावर सेक्टर को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई परियोजनाओं के कर्मचारी लापता हैं और कुछ सुरंगों में बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है।

सबसे ज्यादा चिंता अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर परियोजना को लेकर है, जहां 100 से ज्यादा लोगों के मलबे से भरी सुरंग में फंसे होने की आशंका जताई गई है। भारतीय विशेषज्ञों की टीम इसी तरह के मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन में नेपाल की मदद कर रही है।

दूसरी बाढ़ का खतरा भी बना हुआ

बाढ़ के बाद हिमालयी क्षेत्र में बनी एक नई झील और जमा पानी को लेकर भी निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञों और प्रशासन की चिंता है कि यदि पानी का प्राकृतिक अवरोध अचानक टूटता है तो एक और फ्लैश फ्लड आ सकती है। हालांकि ताजा रिपोर्टों के अनुसार पानी का स्तर घट रहा है, फिर भी प्रभावित नदी घाटियों में निगरानी जारी है।

राहत के बीच सबसे बड़ी चुनौती

नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी, सेना और बचावकर्मी राहत अभियान में जुटे हैं। लेकिन ऊंचे पहाड़, संकरी घाटियां, मलबे से बंद रास्ते और क्षतिग्रस्त पुल अभियान को बेहद कठिन बना रहे हैं। भारत समेत कई देशों की सहायता से राहत प्रयासों को मजबूती मिली है। फिलहाल सबसे बड़ा फोकस लापता लोगों को ढूंढने, सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, शवों की पहचान करने और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने पर है।

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