सड़क से रेलवे और बिजली से पानी तक बदला भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर, 12 साल के विकास की पूरी तस्वीर आपको चौंका देगी

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CENTRAL NEWS DESK: पिछले एक दशक में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। ट्रांसपोर्ट, रेलवे, सड़क, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेट्रो, बंदरगाह, इनलैंड वाटरवेज, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ऊर्जा, पेयजल, आवास और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर परियोजनाएं आगे बढ़ी हैं। पीएम गतिशक्ति, प्रगति और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी जैसी पहलों के जरिए अलग-अलग सेक्टर की परियोजनाओं को एकीकृत तरीके से विकसित करने पर जोर दिया गया है।

इस बदलाव का व्यापक उद्देश्य देश की कनेक्टिविटी को मजबूत करना, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करना, इंडस्ट्रियल कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाना, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना और नागरिकों तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच बेहतर करना है।

रेलवे में बजटीय सपोर्ट से विद्युतीकरण तक बड़ा विस्तार

भारतीय रेलवे में पिछले एक दशक के दौरान मॉडर्नाइजेशन और कैपेसिटी एक्सपेंशन पर विशेष जोर दिया गया है। रेलवे का बजटीय सपोर्ट 2014-15 में करीब 32 हजार करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 2.78 लाख करोड़ रुपये होने का आंकड़ा दिया गया है।

रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन में भी बड़ा बदलाव आया है। 2014 में करीब 20 प्रतिशत रेल नेटवर्क इलेक्ट्रिफाइड था, जबकि 2026 में यह आंकड़ा 99.6 प्रतिशत तक पहुंचने का दावा किया गया है। कुल 69,873 किलोमीटर रेल रूट के इलेक्ट्रिफिकेशन से एनर्जी एफिशिएंसी बढ़ाने, ऑपरेटिंग कॉस्ट घटाने और डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। रेलवे में वंदे भारत एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी नई ट्रेनों ने पैसेंजर सर्विस को आधुनिक बनाने की दिशा में बदलाव किया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश में 162 वंदे भारत सर्विस और 60 अमृत भारत ट्रेनें ऑपरेशनल हैं।

हाई-स्पीड रेल और स्टेशन मॉडर्नाइजेशन

भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विकसित करने की दिशा में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर काम जारी है। इसके अलावा देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में भी पहल की गई है।

स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए 2023 में अमृत भारत स्टेशन स्कीम शुरू की गई। इसके तहत देशभर के 1,338 रेलवे स्टेशनों को मॉडर्नाइजेशन के लिए चिन्हित किया गया है, जिनमें से 208 स्टेशनों के आधुनिकीकरण का आंकड़ा दिया गया है।

कवच से रेल सेफ्टी को मजबूत करने की कोशिश

रेल सेफ्टी के लिए कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम का विस्तार किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कवच करीब 3,103 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर डिप्लॉय किया जा चुका है। रेल दुर्घटनाओं की संख्या में भी कमी का आंकड़ा सामने आया है। 2014-15 में 135 दुर्घटनाओं के मुकाबले 2025-26 में यह संख्या 16 बताई गई है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से माल ढुलाई को रफ्तार

भारत के फ्रेट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 2,843 किलोमीटर के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के विकास का उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक उपलब्ध कराकर उनकी स्पीड और कैपेसिटी बढ़ाना है। इससे पैसेंजर रेलवे नेटवर्क पर माल ढुलाई का दबाव भी कम करने की कोशिश की गई है।

पीएम गतिशक्ति के तहत 139 ऑपरेशनल कार्गो टर्मिनल और 300 अप्रूव्ड कार्गो टर्मिनल का भी आंकड़ा दिया गया है।


नेशनल हाईवे से एक्सप्रेसवे तक सड़क नेटवर्क का विस्तार

भारत का रोड नेटवर्क बढ़कर लगभग 63.73 लाख किलोमीटर हो गया है। नेशनल हाईवे की लंबाई 2014 के 91,287 किलोमीटर से बढ़कर मार्च 2026 में 1,46,572 किलोमीटर होने का आंकड़ा दिया गया है।

चार लेन और उससे अधिक क्षमता वाली सड़कों की लंबाई भी 2014 के 18,371 किलोमीटर से बढ़कर 2026 में 45,516 किलोमीटर हो गई है।

देश में अब करीब 3,644 किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे होने का आंकड़ा दिया गया है। इन एक्सप्रेसवे का उद्देश्य प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों के बीच ट्रैवल टाइम और ट्रैफिक कंजेशन कम करना है।

गांवों तक सड़क कनेक्टिविटी

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 99.6 प्रतिशत एलिजिबल हैबिटेशन को रोड कनेक्टिविटी मिलने का दावा किया गया है। योजना का बजट एलोकेशन भी 2014-15 के 386 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 19 हजार करोड़ रुपये बताया गया है।

भारतमाला परियोजना से आर्थिक कॉरिडोर मजबूत

2017 में शुरू भारतमाला परियोजना के तहत 22,590 किलोमीटर सड़कें पूरी होने का आंकड़ा साझा किया गया है। परियोजना के जरिए फ्रेट मूवमेंट, बॉर्डर कनेक्टिविटी, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और आर्थिक केंद्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने पर जोर दिया गया है।

एयरपोर्ट और रीजनल एयर कनेक्टिविटी में तेजी

भारत में ऑपरेशनल एयरपोर्ट की संख्या 2014 के 74 से बढ़कर 2026 में 165 होने का आंकड़ा दिया गया है। उड़ान स्कीम के तहत 95 एयरपोर्ट से जुड़े 665 रूट ऑपरेशनल होने और 1.64 करोड़ से अधिक पैसेंजर्स को इसका लाभ मिलने का उल्लेख है। इसका मकसद छोटे शहरों, दूरदराज और अंडरसर्व्ड क्षेत्रों को अफोर्डेबल एयर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। मोपा, कन्नूर, होलोंगी, नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नोएडा-जेवर एयरपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को दिखाते हैं। एविएशन सेक्टर में डिजी यात्रा के जरिए पेपरलेस और कॉन्टैक्टलेस ट्रैवल को बढ़ावा दिया गया है। वहीं गगन सिस्टम ने एयरक्राफ्ट नेविगेशन की एक्यूरेसी और फ्लाइट सेफ्टी को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।


मेट्रो नेटवर्क 248 से बढ़कर 1,155 किलोमीटर

भारत का मेट्रो रेल नेटवर्क 2014 के 248 किलोमीटर से बढ़कर 2026 में 1,155 किलोमीटर होने का आंकड़ा दिया गया है। यह नेटवर्क 26 शहरों तक पहुंच चुका है। मेट्रो रेल पॉलिसी 2017 के जरिए इंटीग्रेटेड अर्बन मोबिलिटी प्लानिंग, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और मेक इन इंडिया आधारित मेट्रो सिस्टम को बढ़ावा दिया गया। 2024 में कोलकाता में हुगली नदी के नीचे भारत की पहली अंडरवाटर मेट्रो टनल शुरू हुई। वहीं कोच्चि में वॉटर मेट्रो ने अर्बन ट्रांसपोर्ट को इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट से जोड़ने का नया मॉडल पेश किया। दिल्ली-Meerut कॉरिडोर पर नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम ने रीजनल हाई-स्पीड कनेक्टिविटी की दिशा में नया विकल्प उपलब्ध कराया है।


पोर्ट कैपेसिटी में करीब दोगुना इजाफा

भारत के एक्सटर्नल ट्रेड में मैरीटाइम ट्रांसपोर्ट की बड़ी भूमिका है। करीब 95 प्रतिशत ट्रेड वॉल्यूम और 70 प्रतिशत ट्रेड वैल्यू समुद्री परिवहन से जुड़ी बताई गई है।

मेजर पोर्ट कैपेसिटी:

2014 में 873 एमएमटीपीए से बढ़कर 2026 में 1,726 एमएमटीपीए होने का आंकड़ा दिया गया है।

कार्गो हैंडलिंग भी 581 एमएमटी से बढ़कर 915 एमएमटी हुई है। वहीं वेसल टर्नअराउंड टाइम 94 घंटे से घटकर 48.8 घंटे होने का आंकड़ा साझा किया गया है।

सागरमाला से पोर्ट-लेड डेवलपमेंट

2015 में शुरू सागरमाला प्रोग्राम का उद्देश्य पोर्ट्स को इंडस्ट्रियल क्लस्टर, रोड, रेलवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ना है। इससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने और भारत की ट्रेड कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।


नेशनल वाटरवेज 5 से बढ़कर 111

भारत में इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट को भी एक वैकल्पिक और कम लागत वाले परिवहन माध्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। नेशनल वाटरवेज की संख्या 2014 के 5 से बढ़कर 2026 में 111 हो गई है। इनकी कुल लंबाई करीब 20,187 किलोमीटर बताई गई है। इनलैंड वाटरवेज कार्गो मूवमेंट 29 एमएमटी से बढ़कर 218 एमएमटी होने का आंकड़ा दिया गया है। रो-पैक्स पैसेंजर ट्रैफिक 10.55 करोड़ तक पहुंचने का उल्लेख है। जल मार्ग विकास परियोजना और अर्थ गंगा पहल के जरिए नेशनल वाटरवे-1 यानी गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली में वाटर ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। 2025 में वाराणसी में भारत के पहले हाइड्रोजन फ्यूल सेल वेसल के ऑपरेशनल होने का उल्लेख भी किया गया है।


इंडस्ट्रियल पार्क और स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी पर जोर

भारत में इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए 4,220 इंडस्ट्रियल पार्क मैप किए गए हैं। इनमें करीब 6.98 लाख हेक्टेयर जमीन शामिल है। इनमें से लगभग 1.33 लाख हेक्टेयर जमीन भविष्य के इंडस्ट्रियल एक्सपेंशन के लिए उपलब्ध बताई गई है। देश में 272 प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए गए हैं। इसके अलावा भाव्य स्कीम के तहत 100 नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की योजना का उल्लेख किया गया है।

सरकार ने सात प्रमुख इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में 20 इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी को मंजूरी दी है। इन शहरों में ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, यूटिलिटीज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ विकसित करने का लक्ष्य है। केमिकल पार्क, पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, एमएसएमई क्लस्टर और बायोफार्मा शक्ति जैसे सेक्टर-स्पेसिफिक प्रोग्राम भी इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।


पीएम गतिशक्ति से बदली इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग

2021 में शुरू पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान को भारत की इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसमें 58 मंत्रालयों और विभागों को जोड़ा गया है और 3,202 से अधिक डेटा लेयर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। जीआईएस आधारित प्लानिंग के जरिए सड़क, रेलवे, पोर्ट, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल पार्क और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को एक-दूसरे से जोड़कर विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

इसका उद्देश्य परियोजनाओं में डिले कम करना, इंटर-मिनिस्ट्री कोऑर्डिनेशन बढ़ाना और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट का बेहतर इस्तेमाल करना है।

नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी से सप्लाई चेन को मजबूती

2022 में शुरू नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करना और सप्लाई चेन की एफिशिएंसी बढ़ाना है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ल्ड बैंक लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 54 से बढ़कर 38 हुई है। 2030 तक टॉप 25 देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है। यूएलआईपी, लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक और फास्टैग जैसे डिजिटल सिस्टम लॉजिस्टिक्स और फ्रेट मूवमेंट को अधिक ट्रांसपेरेंट और एफिशिएंट बनाने में मदद कर रहे हैं।


जल जीवन मिशन से ग्रामीण घरों तक पहुंचा नल का पानी

2019 में शुरू जल जीवन मिशन के तहत जून 2026 तक करीब 15.86 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराने का आंकड़ा दिया गया है। ग्रामीण घरों में टैप वाटर कवरेज करीब 81.94 प्रतिशत होने का उल्लेख है। मिशन को 2028 तक बढ़ाया गया है ताकि ग्रामीण भारत में यूनिवर्सल टैप वाटर कवरेज का लक्ष्य हासिल किया जा सके। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जरिए सिंचाई और वाटर-यूज एफिशिएंसी बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

नमामि गंगे कार्यक्रम के जरिए नदी पुनर्जीवन, सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रदूषण नियंत्रण पर काम किया जा रहा है। वहीं केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को भारत का पहला रिवर इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट अंडर इंप्लीमेंटेशन बताया गया है।


पीएम आवास योजना से करोड़ों घरों का निर्माण

पीएम आवास योजना-अर्बन के तहत करीब 98.10 लाख घर पूरे किए जाने का आंकड़ा दिया गया है। इनमें करीब 96 प्रतिशत घर महिलाओं को अलॉट या महिलाओं के साथ ज्वाइंट ओनरशिप में होने का उल्लेख है। पीएम आवास योजना-ग्रामीण के तहत करीब 3.06 करोड़ ग्रामीण घर पूरे किए गए हैं। लगभग 75 प्रतिशत लाभार्थियों के महिलाएं होने का आंकड़ा दिया गया है। 2019 में शुरू स्वामिह फंड ने करीब 63 हजार स्टॉल्ड हाउसिंग यूनिट्स को पूरा कराने में सहायता की है। इसका कॉर्पस करीब 15,531 करोड़ रुपये बताया गया है।

भारत में इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए 4,220 इंडस्ट्रियल पार्क मैप किए गए हैं। इनमें करीब 6.98 लाख हेक्टेयर जमीन शामिल है। इनमें से लगभग 1.33 लाख हेक्टेयर जमीन भविष्य के इंडस्ट्रियल एक्सपेंशन के लिए उपलब्ध बताई गई है।

देश में 272 प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए गए हैं। इसके अलावा भाव्य स्कीम के तहत 100 नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की योजना का उल्लेख किया गया है। सरकार ने सात प्रमुख इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में 20 इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी को मंजूरी दी है। इन शहरों में ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, यूटिलिटीज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक साथ विकसित करने का लक्ष्य है।

केमिकल पार्क, पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, एमएसएमई क्लस्टर और बायोफार्मा शक्ति जैसे सेक्टर-स्पेसिफिक प्रोग्राम भी इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।


पीएम गतिशक्ति से बदली इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग

2021 में शुरू पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान को भारत की इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसमें 58 मंत्रालयों और विभागों को जोड़ा गया है और 3,202 से अधिक डेटा लेयर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। जीआईएस आधारित प्लानिंग के जरिए सड़क, रेलवे, पोर्ट, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल पार्क और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को एक-दूसरे से जोड़कर विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

इसका उद्देश्य परियोजनाओं में डिले कम करना, इंटर-मिनिस्ट्री कोऑर्डिनेशन बढ़ाना और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट का बेहतर इस्तेमाल करना है।

नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी से सप्लाई चेन को मजबूती

2022 में शुरू नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करना और सप्लाई चेन की एफिशिएंसी बढ़ाना है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ल्ड बैंक लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 54 से बढ़कर 38 हुई है। 2030 तक टॉप 25 देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है।

यूएलआईपी, लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक और फास्टैग जैसे डिजिटल सिस्टम लॉजिस्टिक्स और फ्रेट मूवमेंट को अधिक ट्रांसपेरेंट और एफिशिएंट बनाने में मदद कर रहे हैं।


जल जीवन मिशन से ग्रामीण घरों तक पहुंचा नल का पानी

2019 में शुरू जल जीवन मिशन के तहत जून 2026 तक करीब 15.86 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराने का आंकड़ा दिया गया है। ग्रामीण घरों में टैप वाटर कवरेज करीब 81.94 प्रतिशत होने का उल्लेख है। मिशन को 2028 तक बढ़ाया गया है ताकि ग्रामीण भारत में यूनिवर्सल टैप वाटर कवरेज का लक्ष्य हासिल किया जा सके। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जरिए सिंचाई और वाटर-यूज एफिशिएंसी बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

नमामि गंगे कार्यक्रम के जरिए नदी पुनर्जीवन, सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रदूषण नियंत्रण पर काम किया जा रहा है। वहीं केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट को भारत का पहला रिवर इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट अंडर इंप्लीमेंटेशन बताया गया है।


पीएम आवास योजना से करोड़ों घरों का निर्माण

पीएम आवास योजना-अर्बन के तहत करीब 98.10 लाख घर पूरे किए जाने का आंकड़ा दिया गया है। इनमें करीब 96 प्रतिशत घर महिलाओं को अलॉट या महिलाओं के साथ ज्वाइंट ओनरशिप में होने का उल्लेख है।

पीएम आवास योजना-ग्रामीण के तहत करीब 3.06 करोड़ ग्रामीण घर पूरे किए गए हैं। लगभग 75 प्रतिशत लाभार्थियों के महिलाएं होने का आंकड़ा दिया गया है।

2019 में शुरू स्वामिह फंड ने करीब 63 हजार स्टॉल्ड हाउसिंग यूनिट्स को पूरा कराने में सहायता की है। इसका कॉर्पस करीब 15,531 करोड़ रुपये बताया गया है। वहीं अमृत और अमृत 2.0 के तहत करीब 2.79 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर होने, 2.53 करोड़ के आसपास टैप वाटर कनेक्शन उपलब्ध कराने और 7,943 अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे होने का आंकड़ा दिया गया है।


बिजली क्षमता 248 गीगावाट से बढ़कर 532.74 गीगावाट

भारत की इंस्टॉल्ड पावर कैपेसिटी 2014 के करीब 248 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 में 532.74 गीगावाट हो गई है। भारत ने नॉन-फॉसिल फ्यूल सोर्स से 40 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी कैपेसिटी हासिल करने का सीओपी21 लक्ष्य निर्धारित समय से लगभग एक दशक पहले हासिल करने का दावा किया है। भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी क्लीन एनर्जी कैपेसिटी और चौथी सबसे बड़ी इंस्टॉल्ड विंड एनर्जी कैपेसिटी वाले देशों में बताया गया है। पावर शॉर्टेज 2014 के 4.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 0.03 प्रतिशत होने का आंकड़ा दिया गया है। ग्रामीण इलाकों में बिजली की उपलब्धता भी 12.5 घंटे प्रतिदिन से बढ़कर 22.6 घंटे प्रतिदिन होने का उल्लेख है।


सोलर एनर्जी और क्लीन कुकिंग को भी बढ़ावा

2024 में शुरू पीएम सूर्य घर योजना के जरिए रूफटॉप सोलर को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं गोबरधन योजना के जरिए वेस्ट-टू-एनर्जी और सर्कुलर इकोनॉमी आधारित एनर्जी सॉल्यूशन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सौभाग्य योजना के तहत करीब 2.86 करोड़ घरों को इलेक्ट्रिफाइड किए जाने का आंकड़ा दिया गया है।

एलपीजी कवरेज भी 2014 के 55.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 107.2 प्रतिशत होने का आंकड़ा साझा किया गया है। एलपीजी कंज्यूमर्स की संख्या 14.51 करोड़ से बढ़कर 33.39 करोड़ हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 49.21 करोड़ एलपीजी रिफिल और 25 लाख नए एलपीजी कनेक्शन का उल्लेख किया गया है।


डिजिटल कनेक्टिविटी में भी बड़ा उछाल

भारत में इंटरनेट कनेक्शन की संख्या 2014 के 25.15 करोड़ से बढ़कर 2025 में 100.29 करोड़ होने का आंकड़ा दिया गया है। टेली-डेंसिटी 75.23 प्रतिशत से बढ़कर 86.23 प्रतिशत हुई है।

पीएम-वाणी के तहत 4.10 लाख से अधिक पब्लिक वाई-फाई हॉटस्पॉट का उल्लेख है। वहीं 2026 तक 5जी सर्विस करीब 85 प्रतिशत आबादी तक पहुंचने का आंकड़ा दिया गया है।

जैम ट्रिनिटी यानी जन धन, आधार और मोबाइल को यूपीआई के साथ जोड़कर डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को मजबूत किया गया है। डिजिलॉकर, उमंग, कॉमन सर्विस सेंटर, ई-हॉस्पिटल, पीएम ई-विद्या, दीक्षा और स्वयं जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी सेवाओं, हेल्थकेयर और एजुकेशन तक पहुंच आसान हुई है।


इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से आर्थिक और सामाजिक बदलाव

भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार अब केवल निर्माण गतिविधि नहीं रह गया है। बेहतर रोड और रेलवे नेटवर्क से फ्रेट मूवमेंट तेज हो सकता है, पोर्ट और वाटरवेज लॉजिस्टिक्स को मजबूत कर सकते हैं और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे सकते हैं।

ग्रामीण रोड, आवास, बिजली और टैप वाटर जैसी योजनाएं सीधे ग्रामीण जीवन की क्वालिटी को प्रभावित करती हैं। वहीं मेट्रो, रीजनल रैपिड ट्रांजिट और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर शहरों में मोबिलिटी और प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाने में भूमिका निभाते हैं।

पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में पुल, टनल, रेलवे और रोड प्रोजेक्ट क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और इकोनॉमिक इंटीग्रेशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

विकास के साथ चुनौतियां भी मौजूद

इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी के बावजूद देश के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें लैंड एक्विजिशन, फाइनेंसिंग गैप, रेगुलेटरी हर्डल, एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस और प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन कैपेसिटी प्रमुख हैं।

बड़ी परियोजनाओं में कॉस्ट ओवररन, कंस्ट्रक्शन क्वालिटी, मेंटेनेंस, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की सफलता केवल किलोमीटर, पुलों या परियोजनाओं की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि इन परियोजनाओं से ट्रैवल टाइम, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और रोजगार में कितना बदलाव आया, निवेश कितना आकर्षित हुआ और आम नागरिकों को वास्तविक लाभ कितना मिला।

विकसित भारत के लक्ष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका

भारत के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट अब केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की बुनियादी जरूरत बन चुका है। रेलवे, रोड, पोर्ट, एयरपोर्ट और वाटरवेज को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स पार्क और डिजिटल सिस्टम से जोड़कर एक इंटीग्रेटेड इकोनॉमिक नेटवर्क तैयार किया जा सकता है। इससे मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेड, एक्सपोर्ट, रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।

वहीं ग्रामीण सड़क, आवास, बिजली, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को इंक्लूसिव ग्रोथ से जोड़ता है। आने वाले वर्षों में भारत के सामने चुनौती केवल ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की नहीं होगी, बल्कि उसे क्वालिटी, सस्टेनेबिलिटी, सेफ्टी, एफिशिएंसी और अफोर्डेबिलिटी के साथ विकसित करने की होगी। यही एकीकृत दृष्टिकोण भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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