POK का सच छिपाने में जुटा पाकिस्तान, विरोध-प्रदर्शनों की खबर दिखाने वाली कई न्यूज वेबसाइटों और चैनलों पर लगाई रोक
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध-प्रदर्शनों और अशांति की खबरों को दबाने के लिए पाकिस्तान ने डिजिटल सेंसरशिप और कड़ी कर दी है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई समाचार वेबसाइटों, वीडियो मंचों और अंतरराष्ट्रीय प्रसारण सेवाओं तक लोगों की पहुंच सीमित कर दी गई है।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पाकिस्तान के कई हिस्सों में स्थानीय और क्षेत्रीय समाचार वेबसाइटें खुलनी बंद हो गई हैं। इसके अलावा कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रसारण संस्थानों की सेवाओं तक भी लोगों की पहुंच बाधित हुई है।
पीओके की खबरें दिखाने वाले मंच बने निशाना
बताया जा रहा है कि जिन समाचार मंचों ने पीओके में हालिया विरोध-प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और स्थानीय लोगों के बढ़ते असंतोष की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित कीं, उन पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इन पाबंदियों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
विपक्ष और पत्रकार भी कार्रवाई के दायरे में
24 जून के एक न्यायिक आदेश के आधार पर पाकिस्तान की मुख्य विपक्षी पार्टी, उसके नेताओं, जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जुड़े कई डिजिटल मंचों और सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों के चैनलों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। इस कदम को लेकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
कई वीडियो चैनलों पर भी गिरी गाज
इससे पहले जुलाई में अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्था अल जज़ीरा ने अपनी रपट में बताया था कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी की सिफारिश पर अदालत ने कई वीडियो चैनलों को बंद करने के आदेश दिए थे। रपट के अनुसार, करीब 27 सामग्री निर्माताओं को सूचना दी गई थी कि यदि उन्होंने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया तो उनके चैनल बंद किए जा सकते हैं।
डिजिटल अधिकार समूहों ने जताई चिंता
डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि इन प्रतिबंधों से पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सीमित हो जाएगी। उनका कहना है कि जब टेलीविजन और मुद्रित माध्यम पहले से ही कड़े नियंत्रण में हैं, तब सामाजिक माध्यम और डिजिटल समाचार मंच ही लोगों के लिए अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का प्रमुख माध्यम बचे हैं।
चुनाव प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
पीओके में चुनाव के दूसरे चरण के दौरान भी कई इलाकों में विरोध-प्रदर्शन, सड़क जाम और अव्यवस्था देखने को मिली। इससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई और कई मतदान केंद्रों तक मतदाताओं की पहुंच मुश्किल हो गई। इन घटनाओं के बाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर भी नए सवाल उठने लगे हैं।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
