E20 पेट्रोल के खिलाफ पहली बड़ी सड़क पर उतरकर बगावत! माइलेज घटने और इंजन खराब होने का दावा, जंतर-मंतर पर फूटा कार मालिकों का गुस्सा

0
masj dfnsdf

CENTRAL NEWS DESK: देश में पहली बार ई20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के खिलाफ कार मालिकों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित इस प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, इंजन की परफॉर्मेंस प्रभावित हो रही है और फ्यूल सिस्टम तक खराब हो रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से ई20 नीति पर पुनर्विचार करने और उपभोक्ताओं को सामान्य पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की।

यह प्रदर्शन उद्योगपति और सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला तथा उनकी संस्था टीम भारत के बैनर तले आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार ने बिना पर्याप्त तैयारी और परीक्षण के ई20 ईंधन को तेजी से लागू कर दिया, जिससे लाखों वाहन मालिक प्रभावित हो रहे हैं।

‘हमारी गाड़ी, हमारा अधिकार’ के नारे के साथ प्रदर्शन

जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी “हमारी गाड़ी, हमारा अधिकार” का नारा लगाते हुए पहुंचे। उनका कहना था कि अधिकांश कारें ई10 ईंधन के लिए बनाई गई थीं, जबकि अब उन्हें मजबूरन ई20 पेट्रोल भरवाना पड़ रहा है। हालांकि केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि ई20 पेट्रोल से वाहनों को कोई नुकसान नहीं होता और विभिन्न परीक्षणों में इसे सुरक्षित पाया गया है। ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र के कई विशेषज्ञ भी सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का समर्थन कर चुके हैं।

कार मालिकों ने सुनाई अपनी परेशानी

गुरुग्राम के सॉफ्टवेयर इंजीनियर सार्थक ने बताया कि उनकी वर्ष 2018 मॉडल कार पहले 18 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में यह घटकर 14 किलोमीटर प्रति लीटर से भी कम रह गया है। दिल्ली के पटेल नगर निवासी राज सिंह ने दावा किया कि लगातार सात महीने तक ई20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी कार के फ्यूल सिस्टम में गंभीर खराबी आ गई। उनका कहना है कि फ्यूल सिस्टम की सफाई और पार्ट्स बदलवाने में उन्हें 35 हजार रुपये से अधिक खर्च करने पड़े।

वहीं दिल्ली के मुदित अग्रवाल ने बताया कि उनकी कार चलते-चलते अचानक बंद हो गई। बाद में सर्विस सेंटर में उन्हें बताया गया कि ईंधन की वजह से समस्या हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि सर्विस सेंटर में रोजाना कई ऐसी गाड़ियां आ रही हैं जिनमें इसी तरह की शिकायतें मिल रही हैं।

फ्यूल फिल्टर चोक होने का दावा

ऑटो विशेषज्ञ और रैली ड्राइवर रतन ढिल्लों ने कहा कि उनके पास ऐसे तकनीकी प्रमाण हैं जिनसे यह साबित किया जा सकता है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण फ्यूल फिल्टर और पाइपलाइन में रुकावट पैदा हो रही है। उनका दावा है कि कई मामलों में फ्यूल फिल्टर बदलने का खर्च 25 हजार से 80 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि ऊंचाई वाले इलाकों, विशेषकर लेह जैसे क्षेत्रों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण कोल्ड स्टार्ट जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

शुद्ध पेट्रोल का विकल्प देने की मांग

प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि यदि कोई उपभोक्ता ई20 पेट्रोल नहीं भरवाना चाहता तो उसे सामान्य पेट्रोल का विकल्प मिलना चाहिए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार की एथेनॉल नीति का सबसे अधिक फायदा चीनी मिल उद्योग को हो रहा है, क्योंकि एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने से तैयार किया जाता है। उनका कहना था कि वाहन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

सरकार का पक्ष भी स्पष्ट

केंद्र सरकार लगातार कहती रही है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण में कमी आएगी। सरकार का दावा है कि व्यापक परीक्षणों के बाद ही ई20 ईंधन लागू किया गया है और इससे वाहनों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता। भारत के अटॉर्नी जनरल भी पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि ई20 नीति सरकार का नीतिगत फैसला है और इसमें बदलाव की संभावना फिलहाल नहीं है।

फिलहाल जंतर-मंतर पर हुआ यह प्रदर्शन देश में ई20 नीति के खिलाफ पहला सार्वजनिक विरोध माना जा रहा है। हालांकि प्रदर्शन में लोगों की संख्या सीमित रही, लेकिन वाहन मालिकों द्वारा उठाए गए सवाल अब इस नीति पर नई बहस को जन्म दे सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed