ममता बनर्जी का बड़ा बयान: “मैं फ्री बर्ड हूं, इस्तीफा नहीं दूंगी”
CENTRAL NEWS DESK: “मैं कोई कुर्सी नहीं पकड़कर बैठी हूं, मैं एक फ्री बर्ड हूं,” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा। यह बयान उन्होंने उस वक्त दिया, जब वह बंगाल चुनाव और अपनी भवानीपुर सीट दोनों हार चुकी थीं। कुछ ही मिनटों बाद उनका रुख और सख्त हो गया। “मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, मैं हारी नहीं हूं,” 71 वर्षीय ममता बनर्जी ने साफ कहा। उनके इस बयान के बाद संविधानिक सवाल खड़े हो गए कि क्या वह पद पर बनी रह सकती हैं?
क्या ममता बनर्जी सीएम पद पर बनी रह सकती हैं?
संवैधानिक कानून के विशेषज्ञ और पूर्व लोकसभा सेक्रेटरी-जनरल पीडीटी आचार्य के मुताबिक, ऐसा संभव नहीं है उन्होंने कहा, “अगर वह इस्तीफा नहीं भी देती हैं, तो भी फर्क नहीं पड़ता। राज्यपाल उन्हें तब तक पद पर बने रहने के लिए कह सकते हैं, जब तक नया मुख्यमंत्री शपथ नहीं लेता। लेकिन संविधान के अनुसार सरकार पांच साल से ज्यादा नहीं चल सकती। आचार्य ने स्पष्ट किया कि 6 मई के बाद ममता बनर्जी स्वतः ही मुख्यमंत्री पद से हट जाएंगी।
लीगल एक्सपर्ट्स की राय
सीनियर एडवोकेट शेखर नफाड़े ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना किसी तरह का फर्क नहीं डालेगा उन्होंने कहा, “गवर्नर विधानसभा को डिसमिस कर सकते हैं और सरकार का कार्यकाल खत्म हो जाएगा, क्योंकि पांच साल का मैंडेट पूरा हो चुका है। सीनियर एडवोकेट रेबेका एम जॉन ने भी कहा कि इस्तीफा टालने का कोई लीगल आधार नहीं है।
क्या चुनाव परिणाम को चुनौती दी जा सकती है?
रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के तहत चुनाव परिणाम को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है पीडीटी आचार्य के अनुसार, “इलेक्शन पिटीशन दाखिल की जा सकती है, लेकिन इसका सरकार के कार्यकाल खत्म होने से कोई संबंध नहीं है।” शेखर नफाड़े ने कहा कि जब तक कोई कोर्ट चुनाव को रद्द नहीं करता, तब तक चुनाव आयोग द्वारा घोषित परिणाम मान्य रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है?
1986 के अज़हर हुसैन बनाम राजीव गांधी केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनाव परिणामों की न्यायिक जांच जरूरी है ताकि जनता की “सच्ची इच्छा” सामने आ सके।अगर भ्रष्ट आचरण या गड़बड़ी साबित होती है, तो कोर्ट चुनाव रद्द कर सकता है।
SIR डिलीशन और ECI पर आरोप
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे SIR डिलीशन केस का भी मौजूदा चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. अगर बड़े स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है, तो अलग से रिट पिटीशन दाखिल की जा सकती है, लेकिन इससे मुख्यमंत्री के पद पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान का आर्टिकल 172 राज्य विधानसभा की अवधि तय करता है. इसके अनुसार, हर विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है और इसके बाद वह स्वतः भंग हो जाती है। इसका मतलब है कि 7 मई के बाद बंगाल विधानसभा और सरकार दोनों स्वतः समाप्त हो जाएंगे।
बंगाल चुनाव परिणाम
पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत दर्ज की। भाजपा को 207 सीटें मिलीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सिर्फ 80 सीटों पर सिमट गई। यह परिणाम राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट भी हार गईं, जहां उन्हें भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने हराया। टीएमसी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि उसने भाजपा के साथ मिलकर “100 सीटों की लूट” की।
ममता बनर्जी के सामने अगली चुनौती
चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपनी राजनीतिक स्थिति को कैसे संभालें। संविधान के तहत उनका कार्यकाल सीमित है, और अब आगे का रास्ता पूरी तरह राजनीतिक और कानूनी लड़ाई पर निर्भर करेगा।
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