जस्टिस वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर लोकसभा ने गठित की तीन सदस्यीय जांच समिति

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Central News Desk: लोकसभा ने जस्टिस वर्मा को उनके पद से हटाने के प्रस्ताव पर संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करते हुए एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगी। समिति में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और कानूनी क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ शामिल हैं।

लोकसभा सचिवालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, समिति में वरिष्ठ कानूनविद बी.वी. आचार्य, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव को नामित किया गया है। इन तीनों को न्यायिक कार्यों और संवैधानिक मामलों का व्यापक अनुभव है।

संवैधानिक प्रावधान और प्रक्रिया
भारत के संविधान के अनुच्छेद 124(4) तथा न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत, किसी उच्च न्यायिक अधिकारी को उसके पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना आवश्यक होता है। प्रस्ताव पर विचार करने से पहले तथ्यों की पुष्टि के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया जाता है, जो सभी आरोपों की जांच कर अपनी सिफारिश प्रस्तुत करती है।

समिति का कार्य
यह समिति संबंधित पक्षों से दस्तावेज और साक्ष्य मांगेगी, गवाहों के बयान दर्ज करेगी और यदि आवश्यक हुआ तो खुली सुनवाई भी कर सकती है। समिति को यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो। आरोपों की पुष्टि या खंडन करने के बाद समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगी।

आगे की कार्रवाई
समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद लोकसभा में प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। यदि प्रस्ताव विशेष बहुमत से पारित होता है, तो इसे राज्यसभा के समक्ष भेजा जाएगा। दोनों सदनों से अनुमोदन मिलने के बाद ही राष्ट्रपति हटाने के आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, समिति निकट भविष्य में अपनी पहली बैठक आयोजित करेगी और जांच की समय-सीमा तय करेगी। इस मामले पर देशभर में कानूनी और राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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