जयशंकर का रूस दौरा: अमेरिका-रूस तनाव के बीच भारत की कूटनीति का बड़ा दांव

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Central News Desk: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर मंगलवार रात तीन दिनों के दौरे पर रूस की राजधानी मॉस्को पहुंच गए हैं। यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक राजनीति में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है – एक ओर अमेरिका और रूस के बीच अलास्का में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात ने दुनिया का ध्यान खींचा है, वहीं दूसरी ओर भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने दबाव और दंडात्मक टैरिफ लगा दिया है।

भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव

हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर 25% टैरिफ लगा दिया। अमेरिकी प्रशासन के शीर्ष अधिकारी –

पीटर नवारो (ट्रेड एडवाइजर), स्कॉट बेसेंट (वित्त मंत्री), मार्को रुबियो (विदेश मंत्री) ने भारत के रूस से बढ़ते ऊर्जा आयात पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसका सीधा असर भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ा है और यह संदेश गया है कि वाशिंगटन भारत को अपने रणनीतिक फैसलों में नियंत्रित करना चाहता है।

रूस-भारत रिश्तों की गहराई

भारत दशकों से रूस को रक्षा, रणनीति और ऊर्जा क्षेत्र में सबसे भरोसेमंद साझेदार मानता आया है। 2024 में भारत ने रूस से 47 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा हुआ। रक्षा क्षेत्र में भी भारत के लगभग 65% सैन्य उपकरण और हथियार रूसी तकनीक से जुड़े हैं। यही वजह है कि अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत रूस से दूरी नहीं बना सकता।

जयशंकर की व्यस्त डिप्लोमेसी

विदेश मंत्रालय के अनुसार जयशंकर का यह दौरा 19-21 अगस्त 2025 तक चलेगा। इस दौरान उनकी मुख्य गतिविधियां होंगी –

रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव से मुलाकात और द्विपक्षीय एजेंडे की समीक्षा।

रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से आर्थिक और तकनीकी सहयोग पर चर्चा।

20 अगस्त को होने वाली भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) की 26वीं बैठक की सह-अध्यक्षता।

इंडिया-रूस बिजनेस फोरम को संबोधित करना और ऊर्जा-रक्षा सहयोग पर भारत का दृष्टिकोण साझा करना।

मोदी-पुतिन की लगातार बातचीत

जयशंकर का यह दौरा और भी अहम इसलिए है क्योंकि इससे कुछ दिन पहले ही पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर अलास्का में ट्रंप के साथ हुई अपनी वार्ता और रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा की जानकारी दी थी। यह 10 दिनों में मोदी और पुतिन की दूसरी सीधी बातचीत थी। यह बात साफ करती है कि रूस भारत को सिर्फ साझेदार नहीं बल्कि वैश्विक कूटनीति का अहम खिलाड़ी मान रहा है।

आगे की संभावनाएं

सूत्रों के अनुसार – मोदी और पुतिन की मुलाकात इस महीने के अंत में चीन के तियानजिन में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में हो सकती है। इस साल के अंत तक पुतिन के भारत दौरे की संभावना भी है। भारत रूस को केवल ऊर्जा साझेदार नहीं बल्कि एशियाई शक्ति संतुलन का स्थायी स्तंभ मानता है।

जयशंकर का यह दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्र कूटनीति और संतुलित विदेश नीति का प्रदर्शन है। अमेरिका के दबाव, चीन के बढ़ते प्रभाव और रूस की एशियाई राजनीति में सक्रिय भूमिका के बीच भारत यह संदेश दे रहा है कि वह किसी एक धुरी पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपने हितों को ध्यान में रखकर बहु-ध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

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