इसरो ने दिखाई भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की झलक, 2028 में जाएगा पहला मॉड्यूल अंतरिक्ष में
Central News Desk: भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय लिखने की दिशा में इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह के दौरान इसरो ने पहली बार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS) का मॉडल प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा 3.8 मीटर × 8 मीटर आकार का मॉडल (BAS-01), जिसे दिल्ली के भारत मंडपम में लगाया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने घोषणा की कि 2028 तक इसरो अपने स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल अंतरिक्ष में स्थापित करेगा।
भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
इसरो की इस परियोजना के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अपनी कक्षीय प्रयोगशाला (Orbital Laboratory) होगी। अभी तक केवल दो स्पेस स्टेशन मौजूद हैं—
- इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS): जिसे अमेरिका, रूस, जापान, कनाडा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसियां मिलकर संचालित करती हैं।
- चीन का तियांगोंग स्टेशन।
भारत तीसरा देश होगा जो अपना स्वतंत्र स्पेस स्टेशन स्थापित करेगा।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की योजना
- पहला मॉड्यूल BAS-01 होगा, जिसका वजन लगभग 10 टन होगा।
- इसे पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर ऊंचाई पर लो-अर्थ ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा।
- इसरो का लक्ष्य है कि 2035 तक पांच मॉड्यूल जोड़कर पूरा अंतरिक्ष स्टेशन तैयार किया जाए।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की प्रमुख खूबियां
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। इसमें शामिल होंगे –
- ECLSS (Environmental Control and Life Support System): जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को सांस लेने और जीवन यापन के लिए सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।
- भारत डॉकिंग सिस्टम और भारत बर्थिंग मैकेनिज्म – ताकि अन्य यान और मॉड्यूल आसानी से जुड़ सकें।
- ऑटोमेटेड हैच सिस्टम – जिससे सुरक्षा और संचालन आसान होगा।
- माइक्रोग्रैविटी प्रयोगों की सुविधा – विज्ञान, तकनीकी और चिकित्सा से जुड़े रिसर्च किए जा सकेंगे।
- वैज्ञानिक इमेजिंग और व्यू-पोर्ट्स – अंतरिक्ष से पृथ्वी और अंतरिक्ष की अद्भुत झलक देखने और क्रू के मनोरंजन हेतु।
- स्पेस सूट और एयरलॉक सिस्टम – ताकि अंतरिक्ष यात्री बाहर निकलकर स्पेसवॉक (EVA) कर सकें।
- सुरक्षा उपाय – अंतरिक्ष मलबे (MMOD), विकिरण और तापमान के प्रभाव से बचाव।
- फ्यूल और फ्लूड रीफिलिंग सिस्टम – जिससे स्टेशन की लंबी आयु बनी रहे।
- प्लग-एंड-प्ले इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स – ताकि विभिन्न तकनीकी उपकरण आसानी से जोड़े और बदले जा सकें।
भारत का अंतरिक्ष भविष्य
इसरो की योजना के अनुसार, अंतरिक्ष स्टेशन 2028 में पहला कदम उठाएगा और 2035 तक पूरी तरह सक्रिय होगा।
यह भारत के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और अंतरिक्ष यात्रियों को दीर्घकालिक मिशनों के लिए नया मंच देगा।
इसके साथ ही भारत वैश्विक स्तर पर एक स्पेस पावर के रूप में और मजबूत स्थिति में उभरेगा।
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