भारत ने अमेरिका को दिया झटका, रूस से तेल आयात पर बोला- 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं
Central News Desk: भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की नाराज़गी पर दो टूक जवाब दिया है। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा है कि नई दिल्ली अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा को किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव से ऊपर रखेगी। उन्होंने साफ कहा कि भारत की प्राथमिकता 1.4 अरब लोगों के हित हैं और भारतीय कंपनियां वहां से ही खरीदारी करेंगी, जहां उन्हें सबसे अच्छा सौदा मिलेगा।
अमेरिका की नाराज़गी और भारत का जवाब
अमेरिका बार-बार आरोप लगा रहा है कि भारत रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीदकर मॉस्को को यूक्रेन युद्ध में मदद कर रहा है। लेकिन भारत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।
राजदूत विनय कुमार ने रूसी एजेंसी तास को दिए इंटरव्यू में कहा – “हमने साफ कर दिया है कि भारत का उद्देश्य अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा है। रूस के साथ सहयोग ने वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाने में मदद की है। व्यापार केवल व्यावसायिक आधार पर होता है।”
भारत-रूस का सहयोग: आपसी हितों पर आधारित
भारत और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार पूरी तरह आपसी हित और बाजार कारकों पर आधारित है। रूस से मिलने वाला तेल भारत को रियायती दाम पर उपलब्ध होता है, जिससे आम उपभोक्ता और अर्थव्यवस्था दोनों को राहत मिलती है।
कुमार ने कहा कि यह कहना गलत है कि भारत रूस की मदद कर रहा है, जबकि हकीकत यह है कि अमेरिका और यूरोप खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं।

अमेरिका-यूरोप पर पलटवार
भारत ने स्पष्ट किया कि जब पश्चिमी देश खुद रूस से व्यापार कर सकते हैं तो भारत को क्यों रोका जा रहा है।
कुमार ने कहा – “भारत सरकार हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कदम उठाती रहेगी। अमेरिका और यूरोप सहित कई अन्य देश भी रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं, इसलिए यह तर्क अनुचित और अन्यायपूर्ण है।”
विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी जता चुके हैं नाराज़गी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले भी इस मुद्दे पर अमेरिका को खरी-खोटी सुना चुके हैं। उन्होंने कहा था
“यह हास्यास्पद है कि जो लोग खुद रूस से खरीदते हैं, वो भारत पर आरोप लगाते हैं। अगर आपको भारत से तेल खरीदने में दिक्कत है, तो मत खरीदिए। लेकिन यूरोप और अमेरिका तो खुद खरीद रहे हैं।”
क्यों ज़रूरी है रूस से तेल आयात?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। देश की 80% से ज्यादा तेल जरूरतें आयात पर निर्भर हैं।रूस से मिलने वाला तेल भारत को रियायती दरों पर उपलब्ध होता है, जिससे महंगाई और ईंधन कीमतों पर काबू पाया जा सकता है।
भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति और व्यापारिक निर्णय किसी दबाव में नहीं बल्कि राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित हैं।
अमेरिका की आलोचनाओं के बीच भारत का यह रुख इस बात का सबूत है कि नई दिल्ली अब वैश्विक राजनीति में अपने दम पर फैसले ले रही है और “भारत पहले” की नीति पर अडिग है।
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