धराली आपदा: स्वयंसेवकों ने कंधों पर उठाया सेवा का भार

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Central News Desk: उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में 5 अगस्त को हुई भीषण आपदा ने पूरे इलाके की रफ्तार थाम दी है। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण कई घर, दुकानें और सड़कें मलबे में दब गईं। कीचड़, पानी और टूटी पगडंडियां लोगों के लिए बड़ी मुश्किल बनी हुई हैं। कई जगहों पर बिजली और संचार सेवाएं भी ठप हैं।

मंदिर में सामूहिक भोजन व्यवस्था
इस आपदा में जो लोग बच गए हैं, उनके लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था धराली के मंदिर में की जा रही है। मंदिर तक पहुंचना आसान नहीं—कहीं घुटनों तक कीचड़, कहीं फिसलन भरे पत्थर और कहीं तेज ढलान रास्ते में हैं।

कंधों पर बोरी, मन में सेवा भाव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक कंधों पर राशन की बोरी लादे, पत्थरों पर संतुलन बनाते हुए मंदिर तक खाद्य सामग्री पहुंचा रहे हैं। यह कार्य केवल शारीरिक मेहनत का नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और निःस्वार्थ सेवा भावना का भी प्रतीक है।

अनुमति मिलने के बाद राहत कार्यों की शुरुआत
संघ के कार्यकर्ताओं के मुताबिक, आपदा के तुरंत बाद ही उन्होंने राहत कार्य शुरू करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन प्रशासनिक अनुमति मिलने में समय लगा। 10 अगस्त को धराली में प्रवेश मिलने के बाद उन्होंने सहायता केंद्र की शुरुआत की, जहां जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और प्राथमिक चिकित्सा दी जा रही है

प्रशासन की ओर से उठाए गए कदम
जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए NDRF, SDRF और स्थानीय पुलिस की टीमों को तैनात किया है। हेलीकॉप्टर के जरिए भी कुछ आवश्यक सामग्री भेजी जा रही है। अस्थायी शिविरों में प्रभावित परिवारों को ठहराया गया है और चिकित्सा टीम गांव-गांव जाकर जांच कर रही है।

नुकसान का आकलन
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, कई दर्जन मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि खेत और बगीचे भी मलबे में दब गए हैं। अनुमान है कि आर्थिक नुकसान करोड़ों रुपये का हो सकता है। सड़कों के टूटने से आसपास के गांवों से संपर्क भी बाधित है।

पुनर्वास में लगेगा समय
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पुनर्वास में लंबा समय लगेगा, लेकिन इस तरह की सेवा गतिविधियां पीड़ितों के मनोबल को संभालने में बड़ी भूमिका निभा रही है.

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