Delhi Blast Special Report: धमाकों से कब-कब दहली दिल्ली

0
PTI11

लाजपत नगर से हाईकोर्ट तक, अब लाल किला हमला फिर से जगाई दहशत की यादें

New Delhi: लालकिला विस्फोट ने फिर जगाई पुराने जख्मों की यादें

करीब 14 साल बाद, दिल्ली एक बार फिर आतंकी धमाके से हिल गई। लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार शाम हुए भीषण कार विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हैं। यह धमाका न सिर्फ दिल्ली की सुरक्षा पर सवाल उठाता है, बल्कि बीते वर्षों में हुए उन आतंकी हमलों की भयावह यादें भी ताज़ा कर गया — जब दिल्ली दहशत के साए में कांप उठी थी।

लाजपत नगर से सरोजिनी नगर तक — दहशत का सिलसिला

राजधानी दिल्ली का आतंकवाद से रिश्ता नया नहीं। 1996 में लाजपत नगर मार्केट में हुआ शक्तिशाली धमाका अब तक लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है। इस विस्फोट में 13 लोगों की जान गई और कई घायल हुए. 1997 में सदर बाज़ार, रानी बाग़, शनिवन, कौड़िया पुल और करोल बाग़ जैसे इलाकों में श्रृंखलाबद्ध बम धमाके हुए। इनमें 10 लोग मारे गए और 213 घायल हुए।

लाल किला 2000 की गोलीबारी — जब इतिहास के साए में गूंजे गोलियां

दिसंबर 2000 में, आतंकवादियों ने सीधे लाल किला परिसर को निशाना बनाया। उस गोलीबारी में दो लोगों की मौत हुई और राजधानी एक बार फिर खौफ के साए में आ गई। इसके एक साल बाद, दिसंबर 2001 में भारतीय संसद पर हमला हुआ, जिसमें नौ सुरक्षाकर्मी शहीद हुए।

2005 के ब्लास्ट — दीवाली से पहले दिल्ली पर तबाही

29 अक्टूबर 2005, दीपावली से ठीक पहले, सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को झकझोर दिया। इनमें 71 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए।

2008 में पांच धमाके, 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट निशाने पर

2008 में आतंकियों ने दिल्ली के कनॉट प्लेस, ग्रेटर कैलाश और करोल बाग़ में एक साथ पांच धमाके किए। इसमें 20 से ज़्यादा लोग मारे गए और कई घायल हुए।

आखिरी बड़ा हमला 7 सितंबर 2011 को हुआ जब दिल्ली उच्च न्यायालय के गेट नंबर 5 के बाहर बम फटा। इस विस्फोट में 15 लोग मारे गए और 79 घायल हुए। उसके बाद दिल्ली में बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ — जब तक कि अब, 2025 का लाल किला ब्लास्ट नहीं हुआ।

हरियाणा नंबर की कार बनी मौत का हथियार — HR26-7674

इस बार धमाके का केंद्र बनी एक आई20 कार, जिसका नंबर HR26-7674 था। दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि यह गाड़ी नदीम खान के नाम पर रजिस्टर्ड थी, लेकिन असली मालिक सलमान था। करीब डेढ़ साल पहले, इस गाड़ी को दिल्ली के ओखला निवासी देवेंद्र को बेच दिया गया था।

अब सवाल उठता है — क्या यह गाड़ी किसी आतंकी साजिश का हिस्सा थी? या फिर यह सिर्फ एक पुरानी कार, जो गलत हाथों में पहुंच गई?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *