Bangladesh News: बांग्लादेश बवाल की वजह आखिर क्या है? पर्दे के पीछे कौन? जानिए पूरी कहानी

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central news desk: बांग्लादेश अब केवल एक देश नहीं, बल्कि बवाल और अराजकता का दूसरा नाम बन चुका है. कभी खुशहाल और तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला बांग्लादेश आज अपनी बर्बादी की कहानी खुद लिख रहा है. हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि देश की सड़कों पर खून बह रहा है, लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं और पूरी व्यवस्था चरमरा चुकी है.

कभी भारत को अर्थव्यवस्था में टक्कर देने वाला बांग्लादेश आज पाकिस्तान से भी बदतर हालात में पहुंच चुका है. देश भारी अशांति, हिंसा और अस्थिरता की गिरफ्त में है. दिसंबर 2025 आते-आते हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि हर दिन हत्या, धमाके और गोलीबारी की खबरें आम हो गई हैं. कभी हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है तो कभी मुसलमानों की जान जा रही है.

अगस्त 2024 से शुरू हुई तबाही की पटकथा

बांग्लादेश की बर्बादी की कहानी अगस्त 2024 से शुरू होती है. उस वक्त देश में छात्र आंदोलन भड़का. सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे शेख हसीना सरकार के खिलाफ बड़े विद्रोह में बदल गया. हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं. सैकड़ों लोगों की जान चली गई.

हालात इतने बिगड़े कि तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा और जान बचाकर भारत आना पड़ा. इसके बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनी और उसके प्रमुख बने नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस.

यूनुस के सत्ता में आते ही बिगड़ते चले गए हालात

8 अगस्त 2024 को मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुखिया के रूप में शपथ ली. तभी यह साफ हो गया कि शेख हसीना के खिलाफ गुस्सा अचानक नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश थी. यूनुस के सत्ता संभालते ही बांग्लादेश की किस्मत मानो रूठ गई.

हर दिन हिंसा, हर दिन हत्या और हर दिन अराजकता. कभी शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए जाना जाने वाला बांग्लादेश अब कट्टरपंथ का गढ़ बनता जा रहा है. अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले बढ़े. मंदिरों को तोड़ा गया. राजनीतिक विरोधियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया.

चुनाव टालने की चाल और सत्ता की भूख

मुहम्मद यूनुस पर आरोप है कि वे सत्ता छोड़ना नहीं चाहते. अंतरिम सरकार के प्रमुख होने के बावजूद उन्होंने अब तक चुनाव नहीं कराए. वे सुधारों का हवाला देते रहे, कभी चुनावी कानून बदलने की बात कही तो कभी अर्थव्यवस्था सुधारने का बहाना बनाया.

मई 2025 में जब सेना और विपक्ष ने चुनाव की मांग की, तो यूनुस ने इस्तीफे की धमकी दी. जून में चुनाव अगले साल कराने की घोषणा की गई, लेकिन दिसंबर 2025 तक भी हालात नहीं सुधरे. सूत्रों के मुताबिक यूनुस लगातार चुनाव टालने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनकी कुर्सी बनी रहे.

अमेरिका की भूमिका पर उठते सवाल

बांग्लादेश की इस उथल-पुथल में अमेरिका की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं. कहा जाता है कि शेख हसीना के तख्तापलट में अमेरिका की अहम भूमिका रही. शेख हसीना के भारत से करीबी रिश्ते थे और उन्होंने अमेरिका की कई रणनीतिक मांगों को ठुकरा दिया था.

अमेरिका बांग्लादेश में अपने हित साधना चाहता था, खासकर बंदरगाहों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर. इसी वजह से अमेरिका ने मुहम्मद यूनुस का समर्थन किया. माना जा रहा है कि अमेरिका बांग्लादेश के जरिए दक्षिण एशिया में चीन और भारत के प्रभाव को संतुलित करना चाहता है.

पाकिस्तान और आईएसआई का खतरनाक खेल

बांग्लादेश में हिंसा भड़काने में पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका भी सामने आ रही है. आरोप है कि आईएसआई के एजेंट बांग्लादेश में घुसपैठ कर कट्टरपंथी संगठनों को सक्रिय कर रहे हैं.

जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन फिर से सिर उठा रहे हैं. शेख हसीना के दौर में इन पर सख्ती थी, लेकिन उनके हटते ही इन्हें खुली छूट मिल गई. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान 1971 की हार का बदला लेने के लिए बांग्लादेश को कमजोर करना चाहता है.

बांग्लादेशी पत्रकार का बड़ा दावा

बांग्लादेशी पत्रकार सलाहुद्दीन शोएब चौधरी का दावा है कि देश में हो रही हिंसा के पीछे अमेरिका और पाकिस्तान दोनों का हाथ है. उनके मुताबिक पाकिस्तान की आईएसआई खुलेआम कह चुकी है कि वह बांग्लादेश को फिर से पूर्वी पाकिस्तान बनाना चाहती है.

उनका कहना है कि दीपू की हत्या, डिप्टी हाई कमिश्नर के घर पर हमला और लगातार हो रही सांप्रदायिक हिंसा के पीछे आईएसआई की साजिश है. बांग्लादेश में जिहादी ताकतें सक्रिय हैं, जो देश को कट्टरपंथ की ओर धकेल रही हैं.

बर्बादी के मुख्य कारण

  1. बांग्लादेश की मौजूदा हालत के पीछे कई वजहें साफ नजर आती हैं.
  2. शेख हसीना का सत्ता से हटना.
  3. मुहम्मद यूनुस की सत्ता की भूख.
  4. समय पर चुनाव न होना.
  5. अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले
  6. भारत से दूरी और पाकिस्तान से नजदीकी
  7. कट्टरपंथी ताकतों को खुली छूट.

आगे क्या.

कुल मिलाकर बांग्लादेश की बर्बादी एक सुनियोजित साजिश का नतीजा नजर आती है. मुहम्मद यूनुस सत्ता के केंद्र में हैं. अमेरिका पर्दे के पीछे से डोर संभाल रहा है और पाकिस्तान तथा आईएसआई आग में घी डाल रहे हैं.

अगर बांग्लादेश में जल्द चुनाव नहीं हुए, तो हालात और भयावह हो सकते हैं. पूरी दुनिया हालात पर नजर बनाए हुए है. भारत भी पड़ोसी देश की स्थिति को करीब से देख रहा है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि बांग्लादेश की जनता कब तक इस बवाल की कीमत चुकाती रहेगी.

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