सपा के पूर्व MLC कमलेश पाठक को उम्रकैद, जिगरी दोस्ती से खूनी दुश्मनी तक पहुंची कहानी
CENTRAL NEWS DESK: उत्तर प्रदेश के औरैया के बहुचर्चित मंजुल चौबे और सुधा चौबे हत्याकांड में करीब छह साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके दो भाइयों समेत 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले में एक आरोपी नाबालिग है, जिसकी सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में चल रही है।
कभी जिगरी दोस्त थे कमलेश और मंजुल
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कमलेश पाठक और मृतक वकील मंजुल चौबे कभी बेहद करीबी दोस्त हुआ करते थे। मंजुल जब तिलक महाविद्यालय में छात्रसंघ अध्यक्ष बने थे, तब कमलेश पाठक उनके प्रमुख समर्थकों में थे। दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी कि मंजुल को कमलेश का करीबी और भरोसेमंद व्यक्ति माना जाता था।
लेकिन समय के साथ दोनों के रिश्तों में खटास आने लगी। 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान राजनीतिक मतभेद सामने आए और धीरे-धीरे दोनों के बीच दूरी बढ़ती चली गई। बाद में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई ने रिश्ते को और खराब कर दिया।
एक बीघा जमीन ने बढ़ाया विवाद
दोनों के बीच विवाद की बड़ी वजह पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास करीब एक बीघा जमीन बनी। जमीन पर दोनों पक्षों की ओर से दावे किए जा रहे थे। पुराने दोस्तों के बीच यह विवाद इतना बढ़ गया कि मामला हिंसा तक पहुंच गया।
15 जनवरी 2020 को हुआ डबल मर्डर
15 जनवरी 2020 को जमीन के विवाद को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पुलिस और अभियोजन के मुताबिक, विवाद के दौरान गोलीबारी हुई, जिसमें अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की गोली लगने से मौत हो गई। सुधा सरकारी शिक्षिका थीं।
घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया और जांच आगे बढ़ी। बाद में यह मामला प्रदेश के चर्चित डबल मर्डर केस में शामिल हो गया।
छह साल चली सुनवाई, 900 से ज्यादा तारीखें
इस मामले की सुनवाई करीब छह साल तक चली। रिपोर्टों के मुताबिक, केस में 900 से ज्यादा तारीखें पड़ीं और दोनों पक्षों की ओर से करीब 72 गवाह पेश किए गए। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने 19 अगस्त 2026 को दोषियों की सजा का ऐलान किया।
कमलेश पाठक का राजनीतिक सफर
कमलेश पाठक लंबे समय तक समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे। उन्हें सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता था। वह 1990 में पहली बार एमएलसी बने थे। बाद में वह डेरापुर से विधायक भी रहे और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा भी मिला। 2015 में वह दोबारा एमएलसी बने।
दोस्ती से दुश्मनी और अब उम्रकैद
मंजुल चौबे और कमलेश पाठक की कहानी इस मामले का सबसे बड़ा पहलू रही जिस दोस्ती की शुरुआत राजनीतिक साथ से हुई, वही रिश्ता बाद में जमीन और वर्चस्व के विवाद में बदल गया। छह साल की कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने कमलेश पाठक समेत 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
