हाफिज सईद पर कसेगा शिकंजा! 26/11 मामले में BNSS के तहत गैर-मौजूदगी में चलेगा मुकदमा

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CENTRAL NEWS DESK: मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान में बैठे आरोपितों पर भारत में कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी तेज हो गई है। विशेष अदालत में पाकिस्तान के छह आरोपितों के खिलाफ उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। इनमें लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी समेत अन्य आरोपित शामिल हैं।

यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 356 के तहत घोषित भगोड़े अपराधी के खिलाफ उसकी गैर-मौजूदगी में जांच, मुकदमा और फैसला सुनाने का रास्ता खुलता है। इससे उन मामलों में भी न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, जिनमें आरोपित विदेश में रहकर गिरफ्तारी से बच रहे हैं।

छह पाकिस्तानी आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई

26/11 मामले में जिन छह आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया बताई जा रही है, उनमें हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकमा, आसिम उर्फ अबू कहफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा शामिल हैं। अदालत ने इनके खिलाफ उद्घोषणा की प्रक्रिया शुरू की है।

इनमें से कई आरोपित पाकिस्तान में हैं और भारतीय जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर हैं। यही वजह है कि उनकी भारत में व्यक्तिगत मौजूदगी के बिना कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए नए कानून के प्रावधानों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो जाता है।

क्या है बीएनएसएस की धारा 356?

बीएनएसएस की धारा 356 में ‘घोषित अपराधी की गैर-मौजूदगी में जांच, मुकदमा या फैसला’ का प्रावधान है। इसके तहत अगर कोई व्यक्ति अदालत द्वारा घोषित भगोड़ा अपराधी है, जानबूझकर मुकदमे से बचने के लिए फरार है और उसकी तत्काल गिरफ्तारी की कोई संभावना नहीं है, तो अदालत तय प्रक्रिया के बाद उसकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चला सकती है।

हालांकि, यह प्रक्रिया तुरंत शुरू नहीं हो जाती। कानून में आरोपित को अदालत के सामने लाने के लिए वारंट और उद्घोषणा जैसी कई कानूनी प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है। इसके बाद भी आरोप तय होने के कम से कम 90 दिन पूरे होने से पहले गैर-मौजूदगी में मुकदमा शुरू नहीं किया जा सकता।

आरोपित की तरफ से वकील की भी व्यवस्था

गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने का मतलब यह नहीं है कि आरोपित को कानूनी बचाव का अधिकार नहीं मिलेगा। धारा 356 के तहत यदि फरार आरोपित का कोई वकील नहीं है तो अदालत उसके बचाव के लिए वकील नियुक्त कर सकती है।

इस तरह अदालत में अभियोजन के साथ बचाव पक्ष की कानूनी प्रक्रिया भी जारी रहती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी 2026 में अपने एक फैसले में धारा 356 के तहत गैर-मौजूदगी में मुकदमे की प्रक्रिया को विस्तार से स्पष्ट किया है।

26/11 हमले में क्या थी हाफिज सईद की भूमिका?

26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमलों में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने कई स्थानों को निशाना बनाया था। इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।

भारतीय जांच एजेंसियों ने हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी समेत पाकिस्तान स्थित लश्कर नेटवर्क के कई लोगों को हमले की साजिश और संचालन से जोड़ा था। भारत सरकार की ओर से साजिद मीर को भी 26/11 हमले के प्रमुख योजनाकारों में बताया गया है।

साजिद मीर समेत अन्य आरोपितों की भी भूमिका

भारत सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक, साजिद मीर पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर था और 26/11 हमले की योजना बनाने वालों में शामिल था। जांच में सामने आया कि हमले की साजिश, आतंकियों की ट्रेनिंग और मुंबई में हमले के संचालन के लिए पाकिस्तान में मौजूद लश्कर के नेटवर्क ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

जकी-उर-रहमान लखवी को भी 26/11 हमले का प्रमुख योजनाकार बताया गया है। भारतीय एजेंसियां लंबे समय से पाकिस्तान में मौजूद इन आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें भारत लाने की मांग करती रही हैं।

अब आगे क्या होगा?

अब अदालत के सामने सबसे अहम सवाल यह होगा कि बीएनएसएस की धारा 356 के तहत गैर-मौजूदगी में मुकदमा शुरू करने के लिए सभी जरूरी कानूनी शर्तें पूरी हुई हैं या नहीं। उद्घोषणा, वारंट और अन्य अनिवार्य प्रक्रियाओं के बाद अदालत आगे की कार्यवाही तय करेगी।

अगर कानूनी प्रक्रिया पूरी होती है तो पाकिस्तान में मौजूद आरोपितों के भारत आने का इंतजार किए बिना मामले की न्यायिक सुनवाई आगे बढ़ सकती है। 26/11 के पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए यह कदम लंबे समय से लंबित न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

26/11 केस में क्यों अहम है यह कदम?

बीएनएसएस के नए प्रावधान ने भारत में गंभीर अपराधों के उन आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता मजबूत किया है, जो देश से बाहर रहकर न्यायिक प्रक्रिया से बचते हैं। दिल्ली में भी 2026 में एक घोषित भगोड़े के खिलाफ धारा 356 के तहत गैर-मौजूदगी में मुकदमे की कार्यवाही शुरू हो चुकी है।

ऐसे में 26/11 मामले में हाफिज सईद और अन्य पाकिस्तानी आरोपितों के खिलाफ इसी कानूनी व्यवस्था का इस्तेमाल भारत की लंबे समय से चली आ रही आतंकवाद के आरोपितों को न्याय के कटघरे में लाने की कोशिश में अहम कदम माना जा रहा है।

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