अमरनाथ यात्रा बनेगी देश की पहली ‘जीरो लैंडफिल’ तीर्थयात्रा, 4 लाख श्रद्धालुओं के बीच भी नहीं फैलेगा कचरा

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CENTRAL NEWS DESK: जम्मू-कश्मीर में चल रही पवित्र अमरनाथ यात्रा इस साल एक नई मिसाल कायम करने जा रही है। प्रशासन ने श्री अमरनाथ यात्रा-2026 को देश की पहली ‘जीरो लैंडफिल तीर्थयात्रा’ बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसका मतलब है कि यात्रा के दौरान निकलने वाले कचरे को लैंडफिल में फेंकने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से संसाधनों में बदला जाएगा।

3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलने वाली इस 57 दिवसीय यात्रा में इस बार 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद पूरे यात्रा मार्ग पर कचरा प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की गई है।

खच्चरों के गोबर से बनेगी बायोगैस

यात्रा के दौरान इस्तेमाल होने वाले खच्चरों के गोबर का भी बेहतर उपयोग किया जाएगा। प्रशासन इसके जरिए बायोगैस तैयार करेगा। वहीं प्लास्टिक कचरे को कम करने के लिए यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर वाटर एटीएम लगाए गए हैं, ताकि श्रद्धालु बार-बार प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल न करें। इस पहल को स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट और जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण स्वच्छता विभाग मिलकर लागू कर रहे हैं।

700 मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण की तैयारी

प्रशासन का अनुमान है कि पूरी यात्रा के दौरान करीब 700 मीट्रिक टन कचरा निकल सकता है। इसके लिए बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर बड़ी संख्या में डस्टबिन लगाए गए हैं। साथ ही विशेष सफाई दल तैनात किए गए हैं, जो ठोस और तरल कचरे का संग्रह कर वैज्ञानिक तरीके से उसका निस्तारण कर रहे हैं। ग्रामीण स्वच्छता विभाग की महानिदेशक अनु मल्होत्रा ने बताया कि यात्रा के पहले दिन से ही सफाई अभियान लगातार जारी है और हाई-टेक मशीनों के जरिए कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है।

पांच दिन में एक लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

3 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में शुरुआती चार दिनों में करीब 86 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। पांचवें दिन यह संख्या एक लाख के पार पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। इस वर्ष यात्रा के लिए 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है और आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

9 जुलाई तक सभी पंजीकरण स्लॉट फुल

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बिना पंजीकरण यात्रा पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं से फिलहाल यात्रा स्थगित करने की अपील की है। प्रशासन के अनुसार, 9 जुलाई तक सभी पंजीकरण स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं। बिना पंजीकरण वाले श्रद्धालुओं को बालटाल और पहलगाम मार्ग के चेक प्वाइंट्स पर रोक दिया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल पंजीकृत श्रद्धालुओं को ही यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।

पूरी तरह पिघला प्राकृतिक हिम शिवलिंग

यात्रा के शुरुआती दिनों में ही अमरनाथ गुफा में बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग लगभग पूरी तरह पिघल चुका है। यह शिवलिंग किसी बर्फ के ब्लॉक को तराशकर नहीं बनाया जाता, बल्कि गुफा की छत से टपकने वाला पानी जमकर प्राकृतिक रूप से इसका निर्माण करता है। मौसम, तापमान और पानी की उपलब्धता के आधार पर हर साल इसका आकार बदलता रहता है।

दो मार्गों से होती है अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ यात्रा दो प्रमुख मार्गों से कराई जाती है। पहला पारंपरिक नुनवान-पहलगाम मार्ग है, जिसकी लंबाई लगभग 48 किलोमीटर है और इसे अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। दूसरा बालटाल मार्ग है, जिसकी लंबाई करीब 14 किलोमीटर है, लेकिन इसमें खड़ी चढ़ाई होने के कारण यह अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 28 अगस्त तक जारी रहेगी।

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