बिहार चुनाव 2025: पहले चरण की 121 सीटों पर किसका पलड़ा भारी?

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पिछले नतीजे बताते हैं पूरा समीकरण

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के प्रचार के थमते ही सियासी पारा चरम पर है। अब सबकी नजरें उन 121 सीटों पर टिकी हैं जहां पहले फेज में वोटिंग होगी। सवाल यह है कि क्या इस बार भी पिछली बार की तरह आरजेडी का जलवा रहेगा या एनडीए वापसी करेगी? पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजे इन सीटों का राजनीतिक रुझान साफ करते हैं।

2020 में आरजेडी बनी थी सबसे बड़ी ताकत

2020 के विधानसभा चुनाव में पहले चरण की इन 121 सीटों पर आरजेडी (RJD) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 42 सीटें जीती थीं। वहीं बीजेपी (BJP) ने 32 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि जेडीयू (JDU) महज 23 सीटों तक सिमट गई थी। इसके अलावा कांग्रेस (INC) को 8 और वामदलों (Left Parties) को 11 सीटों पर जीत मिली थी। इन आंकड़ों से साफ है कि इन सीटों पर आरजेडी और बीजेपी का सीधा मुकाबला देखने को मिला था।

आरजेडी का ग्राफ लगातार ऊपर

अगर पिछले तीन चुनावों का रुझान देखा जाए तो आरजेडी का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है।

2020: 42 सीटें
यानी पिछले एक दशक में पार्टी ने इन इलाकों में मजबूत पकड़ बनाई है। तेजस्वी यादव की नेतृत्व क्षमता और यादव-मुस्लिम गठजोड़ इसका मुख्य आधार रहा है।

2010: केवल 15 सीटें

2015: 46 सीटें

बीजेपी का उतार-चढ़ाव वाला सफर

बीजेपी का ग्राफ इन 121 सीटों पर काफी अनिश्चित रहा है।

2020: 32 सीटें (वापसी)
पार्टी ने 2020 में फिर से दमदार वापसी की थी। अब देखना दिलचस्प होगा कि 2025 में मोदी-शाह फैक्टर इन इलाकों में कितना असर दिखाता है।

2010: 46 सीटें (चरम पर)

2015: 20 सीटें (गिरावट)

जेडीयू की घटती पकड़, नीतीश पर दबाव बढ़ा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का प्रभाव लगातार घट रहा है।

2020: 23 सीटें
लगातार गिरावट से साफ है कि इन इलाकों में जेडीयू का जनाधार कमजोर हुआ है। अब यह चुनाव नीतीश के लिए “पुनः प्रतिष्ठा” की लड़ाई बन गया है।

2010: 59 सीटें

2015: 46 सीटें

कांग्रेस की स्थिति लगभग स्थिर

कांग्रेस ने 2010 में एक भी सीट नहीं जीती थी। लेकिन 2015 और 2020 दोनों चुनावों में 8-8 सीटें जीतकर पार्टी ने अपनी मौजूदगी जरूर दर्ज कराई। हालांकि अभी भी कांग्रेस इन सीटों पर सीमित प्रभाव वाली पार्टी मानी जाती है।

2025 का मुकाबला दिलचस्प

इन सीटों का इतिहास बताता है कि आरजेडी-बीजेपी का सीधा टकराव तय है। जेडीयू और कांग्रेस की स्थिति निर्णायक नहीं दिख रही। अब देखना होगा कि 2025 के पहले चरण में जनता किसे मौका देती है तेजस्वी की युवा ऊर्जा या नीतीश-मोदी की जोड़ी को फिर से भरोसा?

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