बरेली हिंसा की साज़िश : तौकीर रज़ा के खास सहयोगियों की अवैध संपत्तियों पर प्रशासन का शिकंजा

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Central News Desk: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में जुमे की नमाज के बाद भड़की हिंसा के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस पूरे मामले में अब तक 72 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पुलिस जांच में यह साफ हो गया है कि इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रज़ा खान के दो सबसे बड़े सहयोगियों — नदीम खान और डॉ. नफीस — की सक्रिय भूमिका रही है।

अवैध संपत्तियों की पहचान

प्रशासन ने तौकीर रज़ा के सहयोगियों से जुड़ी आठ अवैध संपत्तियों की पहचान की है। इसमें नावेल्टी चौराहे का कॉम्प्लेक्स भी शामिल है, जहां की 70 दुकानों से हर महीने 8–10 लाख रुपये की वसूली होती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर दुकान का किराया 10–20 हजार रुपये तक तय था। यह रकम सीधे नफीस और नदीम के नेटवर्क तक पहुंचती थी।

नदीम खान – पुलिस के वायरलेस सेट तक छीना

पुलिस ने खुलासा किया कि हिंसा भड़काने में नदीम खान उर्फ मीनू की अहम भूमिका थी।

  • उसने पुलिस का वायरलेस हैंडसेट छीन लिया था, ताकि पुलिस मूवमेंट की जानकारी ले सके।
  • उसके पास से तमंचा भी बरामद किया गया।
  • पुलिस का कहना है कि हिंसा के दौरान व्हाट्सएप कॉल के जरिए उसने भीड़ को जुटाया।
  • इलाके में उसका इतना दबदबा है कि स्थानीय लोग उसके खिलाफ बोलने से डरते थे।

फिलहाल नदीम खान पुलिस की गिरफ्त में है और उससे कई अहम जानकारियां जुटाई जा रही हैं।

नफीस का उग्र वीडियो और फरारी

मौलाना तौकीर रज़ा का दूसरा करीबी, डॉ. नफीस, पार्टी का प्रवक्ता है।

  • नफीस का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह थाने के SHO का हाथ काटने की धमकी देता नजर आया।
  • इस मामले में उसके खिलाफ थाना क़िला में मुकदमा दर्ज है।
  • नफीस फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है।

पर्दे के पीछे की साज़िश

जांच में सामने आया है कि इस हिंसा की साजिश में कई और लोग शामिल थे।

फ़रहत और फ़रमान, जो फाइक इन्क्लेव के रहने वाले हैं, पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं।कई नाबालिग बच्चों को आगे कर हिंसा करवाई गई, पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि पैसे का लेन-देन किन लोगों के बीच हुआ।

    प्रशासन की सख्ती

    बरेली पुलिस और प्रशासन अब इन अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह नकेल कसने की तैयारी में है।

    • आठ संपत्तियों को सील करने की कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
    • पुलिस ने नदीम खान को मीडिया के सामने पेश किया और यह भी बताया कि उसने कई बार फर्जी हस्ताक्षरों और संदेशों के जरिए प्रशासन को गुमराह किया।

    बरेली की हिंसा किसी अचानक हुई घटना का नतीजा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साज़िश थी। इसमें तौकीर रज़ा के करीबी सहयोगियों की भूमिका उजागर हो चुकी है। प्रशासन ने अब न सिर्फ अवैध संपत्तियों पर शिकंजा कसना शुरू किया है, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने की दिशा में तेजी से कार्रवाई हो रही है।

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