UGC New Rules Controversy: जातीय भेदभाव का आरोप, छात्रों का विरोध, ABVP-NSUI का समर्थन

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UGC RULES

CENTRAL NEWS DESK: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी और छात्र संगठनों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को अलीगढ़, संभल, कुशीनगर समेत कई जिलों में छात्रों और सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और इन नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि UGC के नए नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को बढ़ावा देंगे और यह सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ हैं।

अलीगढ़ में UGC का पुतला फूंका

अलीगढ़ में विरोध उस वक्त उग्र हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्ट्रेट के पास हाथरस से भाजपा सांसद अनूप प्रधान के काफिले को रोक दिया। राष्ट्रवादी छात्र संगठन के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन को क्षत्रिय महासभा, अलीगढ़ का भी समर्थन मिला।
प्रदर्शनकारियों ने UGC का पुतला जलाया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाए और चेतावनी दी कि अगर नियम वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। बाद में छात्रों ने जिला प्रशासन के जरिए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपकर नए नियमों को तत्काल रद्द करने की मांग की।

संभल और कुशीनगर में भी गूंजा विरोध

संभल के चंदौसी में ‘ब्राह्मण शक्ति संघ’ के सदस्यों ने फव्वारा चौक पर प्रदर्शन करते हुए “काला कानून वापस लो” के नारे लगाए। संगठन ने नियमों में संशोधन या पूरी तरह वापसी की मांग करते हुए राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। वहीं कुशीनगर में ‘अंतरराष्ट्रीय ब्राह्मण संगठन’ के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नए नियम शिक्षा में योग्यता और समान अवसर की भावना को कमजोर करते हैं।

NSUI का रुख अलग, नियमों का किया स्वागत

इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने UGC के नए नियमों का समर्थन किया है। NSUI ने कहा कि जाति आधारित भेदभाव पर UGC की पहल स्वागत योग्य है, लेकिन इसे सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं बनने दिया जाना चाहिए।

NSUI की प्रमुख मांगें:

  • समिति में SC, ST और OBC छात्रों का अनिवार्य प्रतिनिधित्व
  • SC, ST और OBC पृष्ठभूमि के शिक्षकों की भागीदारी
  • समिति में सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को शामिल किया जाए

हालांकि NSUI ने सवाल भी उठाया कि कमेटी का चेयरपर्सन कौन होगा, इस पर UGC की चुप्पी चिंता बढ़ाती है। संगठन ने साफ कहा कि अगर कमेटी विश्वविद्यालय प्रशासन के नियंत्रण में रही, तो समानता और न्याय का उद्देश्य विफल हो जाएगा।

ABVP की प्रतिक्रिया पर नजर

UGC के नए नियमों को लेकर जहां NSUI समर्थन के साथ सवाल खड़े कर रही है, वहीं ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के रुख को लेकर भी छात्रों की निगाहें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा छात्र राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय बहस का रूप ले सकता है।

बढ़ सकता है आंदोलन

UGC के नए नियमों को लेकर विरोध थमता नजर नहीं आ रहा। छात्र संगठनों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यदि केंद्र सरकार ने नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन सड़कों से संसद तक पहुंच सकता है।


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