संभल की जामा मस्जिद का होगा सर्वे, हाईकोर्ट ने दी मंजूरी

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हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष का दावा भी माना जायज़

Central News Desk: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने की अनुमति दे दी है और मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही, हिंदू पक्ष की ओर से दायर दीवानी मुकदमे को भी वैध (सुनवाई योग्य) माना है।

क्या है मामला?
हिंदू पक्ष का कहना है कि संभल की यह मस्जिद असल में प्राचीन हरिहर महादेव मंदिर था, जिसे तोड़कर मस्जिद में बदला गया। उनका दावा है कि मस्जिद में आज भी मंदिर के चिह्न और शिलालेख मौजूद हैं।

कोर्ट ने कहा कि जब किसी स्थान के इतिहास को लेकर ठोस प्रमाण सामने आते हैं, तो उसका निरीक्षण और तथ्यात्मक जांच ज़रूरी है। ऐतिहासिक सच्चाई को नज़रअंदाज़ करना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ होगा।

मस्जिद कमेटी की याचिका खारिज
मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 80(2) के तहत वाद सही तरीके से दायर हुआ है और इसमें कोई प्रक्रिया संबंधी त्रुटि नहीं है।

मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि उन्हें हाईकोर्ट के फैसले से निराशा हुई है और वे इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देंगे। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के प्रमुख मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी फैसले को अफसोसनाक बताया और कहा कि इस्लाम में किसी और की ज़मीन पर मस्जिद बनाना मान्य नहीं है।

शहर में सुरक्षा बढ़ाई गई
हाईकोर्ट के फैसले के बाद संभल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बल के साथ पैदल मार्च किया और आम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। प्रशासन ने कहा कि यदि कोई माहौल बिगाड़ने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब आगे क्या होगा?
अब संभल की ज़िला अदालत में हिंदू पक्ष की याचिका पर नियमित सुनवाई होगी। इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करेगा, जिससे यह स्पष्ट होगा कि यह स्थल मस्जिद है या मंदिर।

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