गर्भगृह से शिखर तक… राम मंदिर जितना भव्य, उतना ही वैज्ञानिक चमत्कार
Ayodhya Ram Mandir
हर पत्थर में छिपी प्राचीन आस्था और आधुनिक इंजीनियरिंग
News Desk Ayodhya: (Avneesh mishra): अयोध्या में बना श्रीराम जन्मभूमि मंदिर सिर्फ़ आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय वास्तुकला और आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्वितीय संगम है। गर्भगृह से लेकर शिखर तक इसकी हर नक्काशी, हर पत्थर और हर संरचना में ऐसा वैज्ञानिक कौशल छिपा है जिसे दुनिया आने वाले 1000 वर्षों तक अध्ययन करेगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंदिर के 191 फीट ऊँचे शिखर पर केसरिया धर्मध्वज फहराने के साथ यह भव्य ऐतिहासिक निर्माण पूर्ण घोषित हुआ और इसके पीछे की वैज्ञानिक कहानी अब सामने आ रही है।
राम मंदिर का पूरा निर्माण बिना लोहे और बिना सीमेंट के 1000 वर्षों तक टिके ऐसा भूकंपरोधी ढांचा, राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के 32,800 बलुआ पत्थरों का उपयोग, 15 मीटर गहरी, 56-लेयर वाली RCC नींव, मंदिर का 3D डिजिटल डिजाइन (BIM टेक्नॉलजी), नागर शैली पर आधारित ऊँचा शिखर, चौकोर गर्भगृह, सूर्य की किरणें रामनवमी पर सीधे गर्भगृह में रामलला पर पड़ने की वैज्ञानिक गणना जैसी तकनीक शामिल है.

राम मंदिर: जहां धर्म मिल गया विज्ञान से
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा
<“यह मंदिर आस्था ही नहीं, भारत की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक चेतना का भी जीवंत उदाहरण है।”>
वास्तव में पूरी संरचना में विज्ञान, गणित, संरचनात्मक इंजीनियरिंग, जल-प्रबंधन, सूर्य-गणना, भूकंप विज्ञान और पारंपरिक वास्तुशास्त्र का अद्भुत सामंजस्य है।

नागर शैली का दिव्य चमत्कार शिखर, गर्भगृह, कलश और दिशा-निर्धारण
1. नागर शैली क्या है?
उत्तर भारत की प्राचीन मंदिर वास्तु शैली, जिसका आधार है:
- ऊँचा, नुकीला शिखर
- शिखर के शीर्ष पर गोल आमलक
- उसके ऊपर कलश
- मंदिर एक ऊँचे प्लेटफॉर्म पर
- चौकोर गर्भगृह
- शिखरों की श्रंखला — मुख्य शिखर के आसपास छोटे-छोटे उप-शिखर
राम मंदिर पूरी तरह नागर शैली में बनाया गया है।

मंदिर का वैज्ञानिक दिशा-निर्धारण: रामनवमी पर सूर्यकिरण सीधे रामलला पर
मंदिर को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि:
रामनवमी के दिन सूर्य की पहली किरण सीधे रामलला पर पड़ती है।
यह गणितीय ज्योतिष, सूर्य की वार्षिक अयन चक्र गणना और वास्तुशास्त्र का अत्यंत सटीक उपयोग है। सालभर सूर्य की पोज़िशन बदलती रहती है, लेकिन मंदिर की संरचना इस दिन बिल्कुल सटीक एलाइनमेंट पर है.

360 फीट लंबा, 161 फीट ऊँचा विशालतम पत्थर संरचना
- लंबाई: 360 फीट
- चौड़ाई: 235 फीट
- ऊँचाई: 161 फीट
- मंज़िलें: 3
- प्रत्येक मंज़िल: 20 फीट ऊँची
- खंभे: 392
- दरवाज़े: 44
- नक्काशी: रामायण, देवता, पुष्प, पशु आदि
यह दुनिया के सबसे बड़े पूर्ण पत्थर से बने मंदिरों में से एक है।
000 साल टिकाऊ पत्थर—क्यों चुने गए?

1. गुलाबी बलुआ पत्थर (बंसी पहाड़पुर – राजस्थान)
- 32,800 बड़े पत्थर, हर एक 2 टन
- अत्यधिक compressive strength
- भूकंप के कंपन सोखने की क्षमता
- तापमान व आर्द्रता से प्रभावित नहीं
2. दक्षिण भारतीय ग्रेनाइट (21 फीट प्लिंथ)
- नींव को नमी और कंपन से बचाता है
- बलुआ पत्थर को स्थायित्व देता है
3. प्राचीन ‘राम शिलाएं’
- चूना + मिट्टी से बनी
- धातु/सीमेंट से 10 गुना अधिक टिकाऊ
- 1000 वर्ष की आयु
स्टील या लोहे का उपयोग क्यों नहीं किया गया क्योंकि:
- लोहा 80–90 वर्ष में जंग खाता है
- भूकंप में लचीलापन कम
- संरचना कमजोर होने का खतरा
- 1000 वर्ष टिकाऊ मंदिर बनाना था
भारत के प्राचीन शिल्पशास्त्र ने साबित किया है कि पूर्ण पत्थर आधारित संरचनाएँ सबसे अधिक टिकाऊ होती हैं।
लॉक-एंड-की तकनीक: पत्थर ऐसे फिट जैसे LEGO
मंदिर निर्माण में कोई सीमेंट नहीं, बल्कि लॉक एंड की इंटरलॉकिंग तकनीक
जैसे:
- पत्थर आपस में दाँतेदार फिटिंग से जुड़ते
- भूकंप में कंपन फैल जाता है
- किसी भी स्थान पर दबाव केंद्रित नहीं होता
- पूरी संरचना एक विशाल चट्टान जैसी मजबूत हो जाती है
यह वही तकनीक है जिसका उपयोग कोणार्क, एलोरा, खजुराहो जैसे प्राचीन मंदिरों में हुआ था।
15 मीटर गहरी नींव 56 लेयर RCC की शॉकप्रूफ बेस
अयोध्या में मिट्टी चुनौतीपूर्ण है। इसलिए IIT चेन्नई, CBRI और L&T ने मिलकर दुनिया की सबसे उन्नत धार्मिक संरचना की नींव बनाई:
- 15 मीटर गहरी खुदाई
- 1,32,219 क्यूबिक मीटर मिट्टी हटाई
- 56 लेयर रोलर-कम्पैक्टेड कंक्रीट
- compressive strength: 60 N/mm²
- 21 फीट मोटी ग्रेनाइट प्लिंथ
यह नींव 1000 साल टिकाऊ, ताप-रोधी और भूकंपरोधी है।
8 तीव्रता के भूकंप को भी झेल सकता है राम मंदिर
CSIR–CBRI के वैज्ञानिकों ने नेपाल से अयोध्या तक के ऐतिहासिक भूकंपों का अध्ययन किया।
लैब में सिमुलेशन चलाया गया 8.0 तीव्रता तक का भूकंप भी मंदिर को नुकसान नहीं पहुँचा सकेगा।
कारण:
- गहरी नींव
- इंटरलॉकिंग पत्थर
- फैलने वाला कंपन पाथ
- स्टील का न होना (क्योंकि स्टील कंपन केंद्रित करता है)
70 एकड़ में बना 70% क्षेत्र खुला व हराभरा
- पानी निकासी के लिए हाई-टेक ड्रेनेज सिस्टम
- प्लिंथ को नमी से पूरी तरह सुरक्षा
- हवा-पानी का प्राकृतिक प्रवाह
- पूरी परिधि में वॉकवे और सुरक्षा घेरा
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