“मुनीर मेरे बॉस नहीं” पाकिस्तानी डिफेंस मिनिस्टर का बड़ा स्टेटमेंट, सिविल-मिलिट्री रिश्तों पर नई बहस
CENTRAL NEWS DESK: पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर सिविल और मिलिट्री रिश्तों को लेकर बहस तेज हो गई है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने साफ कहा है कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर उनके बॉस नहीं हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को रिपोर्ट करते हैं और देश एक संवैधानिक सिस्टम के तहत चल रहा है।
फ्रांस 24 को दिए गए इंटरव्यू में जब उनसे सवाल किया गया कि क्या पाकिस्तान में असली कंट्रोल सेना प्रमुख के हाथ में है, तो आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान का एक स्थापित सिस्टम है। उन्होंने माना कि इतिहास में ऐसे दौर रहे हैं जब मिलिट्री ने डायरेक्ट हुकूमत संभाली, लेकिन मौजूदा समय में सरकार काम कर रही है और सेना उसका सपोर्ट कर रही है। आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि सेना का प्रभाव पॉलिटिकल फैसलों पर पहले से ज्यादा बढ़ गया है।
हाइब्रिड मॉडल की फिर चर्चा
दिलचस्प बात यह है कि ख्वाजा आसिफ पहले भी “हाइब्रिड मॉडल” की बात कर चुके हैं। उन्होंने पिछले साल एक इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान में गवर्नेंस सरकार और मिलिट्री के साझा तालमेल से चल रही है। उस समय उन्होंने इस मॉडल को जरूरी बताया था और कहा था कि यह पाकिस्तान की इकॉनमी और एडमिनिस्ट्रेशन की समस्याओं को हल करने में मददगार है। हालांकि ताजा इंटरव्यू में उन्होंने जोर देकर कहा कि पॉलिटिकल सिस्टम संवैधानिक ढांचे के भीतर काम कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान घरेलू और इंटरनेशनल ऑडियंस को भरोसा दिलाने की कोशिश हो सकता है कि पाकिस्तान में सिविलियन कंट्रोल कायम है।
भारत और अफगानिस्तान पर गंभीर आरोप
रक्षा मंत्री ने इंटरव्यू में भारत और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर चला रहे हैं। उनके मुताबिक पाकिस्तान में हो रहे आतंकी हमलों के पीछे इन दोनों देशों की सोच एक जैसी है।
आसिफ ने चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान अफगानिस्तान की सीमा के भीतर दोबारा एक्शन ले सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक काबुल की ओर से शांति की ठोस गारंटी नहीं मिलती, तब तक पाकिस्तान अपने नेशनल इंटरेस्ट की रक्षा के लिए कदम उठाता रहेगा। भारत के साथ रिश्तों पर उन्होंने कहा कि वार की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कोई भी देश खुली जंग नहीं चाहता, लेकिन हालात संवेदनशील बने हुए हैं।
इस्लामाबाद मस्जिद सुसाइड ब्लास्ट
6 फरवरी को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के दौरान एक शिया मस्जिद में सुसाइड ब्लास्ट हुआ। इस हमले में 31 लोगों की मौत हो गई, जबकि 169 लोग घायल हुए। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ग्रुप ने ली है। इस घटना का जिक्र करते हुए आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान में सक्रिय लगभग सभी बड़े आतंकी संगठन क्षेत्रीय सपोर्ट से जुड़े हुए हैं। उन्होंने काबुल सरकार पर आतंकवाद के खिलाफ गंभीर कदम न उठाने का आरोप लगाया और कहा कि इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि मिलीभगत कहना ज्यादा उचित होगा।
इजराइल से रिश्तों पर साफ इनकार
रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलिस्तीनियों को उनका अधिकार मिले बिना इजराइल से रिश्ते नॉर्मल करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस विकल्प पर फिलहाल विचार भी नहीं कर रहा है।
गाजा में संभावित इंटरनेशनल पीस मिशन के सवाल पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की भागीदारी मिशन की शर्तों पर निर्भर करेगी। उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र के पीस मिशनों में काम करने का लंबा अनुभव है और अगर हालात अनुकूल रहे तो यह दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है।

मुनीर बने सबसे पावरफुल शख्स
आसिम मुनीर को पहले चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बनाया गया। हाल ही में हुए संवैधानिक संशोधन के बाद उन्हें व्यापक सैन्य अधिकार मिले हैं। इसके साथ ही परमाणु कमान की जिम्मेदारी भी उनके पास है।
विश्लेषकों का मानना है कि इन पदों के एक साथ होने से मुनीर पाकिस्तान के सबसे पावरफुल शख्स बन गए हैं। हालांकि सरकार की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि अंतिम अथॉरिटी सिविलियन लीडरशिप के पास ही है।
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