Nepal Crisis: काठमांडू में कर्फ्यू, सुशीला कार्की बनीं नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री
Central News Desk: नेपाल का राजनीतिक संकट आखिरकार नए मोड़ पर पहुंच गया है। राजधानी काठमांडू समेत कई हिस्सों में लगे कर्फ्यू और भारी सुरक्षा तैनाती के बीच पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया गया है। शुक्रवार आधी रात को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, सेना प्रमुख और कार्की के बीच अहम बैठक के बाद उनके नाम पर मुहर लग गई।

हिंसक प्रदर्शनों में अब तक 34 की मौत
अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार और मंगलवार को हुए हिंसक प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। हालांकि हालात अब धीरे-धीरे सामान्य होते दिख रहे हैं। काठमांडू की सड़कों पर सेना लगातार गश्त कर रही है।
दिल्ली-काठमांडू बस सेवा ठप
नेपाल में जारी अशांति का असर भारत पर भी पड़ा है। दिल्ली और काठमांडू के बीच चलने वाली डीटीसी बस सेवा रोक दी गई है। दिल्ली सरकार ने बताया कि इस मामले में नेपाल और भारत के दूतावासों से संपर्क किया जा रहा है।
कस्तूरी आपूर्ति पर असर
ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर के सेवकों ने दावा किया है कि नेपाल में अशांति के कारण वहां से आने वाली कस्तूरी की आपूर्ति रुक गई है। इस वजह से मंदिर के अनुष्ठानों में दिक्कत आ रही है।

प्रवासी नेपाली चिंतित
भारत के महाराष्ट्र और अन्य हिस्सों में रह रहे नेपाली प्रवासियों ने नेपाल के हालात को लेकर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया बैन, आर्थिक संकट और भ्रष्टाचार ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया है।
नागरिक समाज का आरोप
नेपाल के नागरिक समाज समूहों ने सेना पर आरोप लगाया है कि वह “सैन्य मध्यस्थता” के तहत राजशाही बहाल करने की साजिश कर रही है। बीएनए (बृहत नागरिक आंदोलन) ने बयान जारी कर कहा कि सेना की बढ़ती भूमिका लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।

सुशीला कार्की पर उम्मीदें
स्थानीय निवासी बिमला खातीवाड़ा समेत कई लोगों ने कार्की के नेतृत्व का स्वागत किया है। उनका कहना है कि एक महिला और कानूनी पृष्ठभूमि वाली नेता के रूप में वे देश को स्थिरता और शांति की ओर ले जाएंगी। कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं और अब देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बनी हैं।
परिवारों की इंसाफ की मांग
प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं। कई परिवारों ने काठमांडू के अस्पतालों के बाहर धरना दिया और सेना अधिकारियों से मुलाकात कर जवाब मांगा।
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