सोने का आयात भारत की अर्थव्यवस्था पर बोझ, खनन बढ़ाने की चुनौती

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Central News Desk: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है, लेकिन उत्पादन के मामले में स्थिति बेहद खराब है। यही कारण है कि भारत को हर साल अरबों डॉलर का सोना आयात करना पड़ता है, जिससे चालू खाता घाटा (CAD) पर भारी दबाव बनता है।

आयात पर निर्भरता

2023 में भारत ने लगभग 1000 टन सोना आयात किया। इसकी कुल कीमत करीब 55 अरब डॉलर (₹4.5 लाख करोड़) रही। यह भारत के कुल आयात बिल का लगभग 9% हिस्सा है।

चालू खाता घाटा और रुपये पर असर

सोने के आयात की वजह से भारत का CAD लगातार बढ़ रहा है। 2023-24 की दूसरी तिमाही में CAD 1.1% GDP तक पहुँच गया। सोने की भारी मांग डॉलर की निकासी बढ़ाती है, जिससे भारतीय रुपया कमजोर होता है।

घरेलू उत्पादन की स्थिति

भारत का वार्षिक सोना उत्पादन सिर्फ 1.2 टन है।

प्रमुख उत्पादन – कर्नाटक की हट्टी गोल्ड माइंस।

कोलार गोल्ड फील्ड (KGF) बंद होने के बाद उत्पादन और भी घट गया।

अन्य देशों से तुलना

चीन – 403 टन

ऑस्ट्रेलिया – 321 टन

रूस – 320 टन

भारत – 1.2 टन

स्पष्ट है कि भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर बेहद पिछड़ी हुई है।

सरकार की रणनीति

नई खनन नीतियों के तहत निजी कंपनियों और विदेशी निवेशकों को लाने की तैयारी। छत्तीसगढ़, झारखंड और कर्नाटक में नई खदानों की खोज जारी। डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्पों को बढ़ावा देकर आयात पर दबाव कम करने की कोशिश।

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत घरेलू खनन बढ़ाता है और सोने के वैकल्पिक निवेश साधनों को बढ़ावा देता है, तो अगले दशक में सोने के आयात बिल को 15–20% तक कम किया जा सकता है।

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