ED केंद्र का हथियार, एजेंसी ने कहा- हमें बंगाल में धमकाया: ममता सरकार

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I-PAC रेड मामले पर सुनवाई, कोर्ट बोला, हम तय करेंगे कौन हथियार और किसे धमकाया गया

CENTRAL NEWS DESK: पश्चिम बंगाल में I-PAC से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश वकीलों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्ष शासित राज्यों में ईडी का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार की तरह कर रही है। इस पर ईडी ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि वह किसी का हथियार नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल में उसके अधिकारियों को धमकाया गया और कार्रवाई में बाधा डाली गई। दोनों पक्षों की तीखी दलीलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसका इस्तेमाल हथियार के रूप में हो रहा है और किसे धमकाया गया, यह अदालत तय करेगी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी है। इससे पहले भी 3 फरवरी को सुनवाई टाली गई थी।

क्या है पूरा I-PAC रेड मामला

I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिसल एक्शन कमेटी एक राजनीतिक रणनीति और चुनाव प्रबंधन से जुड़ी कंपनी है, जो विभिन्न दलों के लिए चुनावी कैंपेन डिजाइन करती है। इस कंपनी और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर 2,742 करोड़ रुपए के कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।

सीबीआई ने 27 नवंबर 2020 को इस मामले में FIR दर्ज की थी। इसके बाद क्या है पूरा I-PAC रेड मामला I-PAC (इंडियन पॉलिटिसल एक्शन कमेटी) एक राजनीतिक रणनीति और चुनाव प्रबंधन से जुड़ी कंपनी है, जो विभिन्न दलों के लिए चुनावी कैंपेन डिजाइन करती है। इस कंपनी और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर 2,742 करोड़ रुपए के कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। आरोप है कि करीब 20 करोड़ रुपए हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचाए गए। 8 जनवरी 2026 को ईडी ने कोलकाता स्थित I-PAC कार्यालय और प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की।

रेड के दौरान ममता बनर्जी पहुंचीं ऑफिस

रेड के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee खुद I-PAC कार्यालय पहुंच गईं। उनके साथ कई TMC नेता और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। ED का आरोप है कि इस दौरान एजेंसी की कार्रवाई में बाधा डाली गई। एजेंसी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से कुछ फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज लेकर बाहर निकलीं और मीडिया से बातचीत की। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि ED ने राजनीतिक मकसद से कार्रवाई की और विधानसभा चुनाव से पहले गोपनीय चुनावी रणनीति से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की।


सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इस मामले में ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। एजेंसी का कहना है कि राज्य सरकार के दबाव में निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। 14 फरवरी की सुनवाई में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा था कि राज्य सरकार ईडी के काम में दखल न दे। अदालत ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर भी रोक लगा दी थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। जवाब में पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि ईडी की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि संबंधित मामला पहले से कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है।

ED की सुप्रीम कोर्ट में तीन बड़ी दलीलें

  1. एजेंसी ने कहा कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारी पहुंचे, जिससे जांच प्रभावित हुई।
  2. ED अधिकारियों के मोबाइल फोन छीने गए और उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया।
  3. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान असामान्य परिस्थितियां थीं, इसलिए एजेंसी सीधे सुप्रीम कोर्ट आई है और CBI जांच की मांग कर रही है।

ED ने यह भी कहा कि उसके अधिकारियों को धमकियां दी गईं और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने से रोका गया। एजेंसी ने आर्टिकल 21 के तहत अपने अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।

ममता सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि ईडी राजनीतिक एजेंडे पर काम कर रही है। विपक्ष शासित राज्यों में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई बढ़ी है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि एक ही मामले पर दो संवैधानिक अदालतों में समानांतर सुनवाई उचित नहीं है। TMC ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ईडी की छापेमारी का उद्देश्य राजनीतिक दबाव बनाना था।

चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी

पश्चिम बंगाल में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में I-PAC रेड और उस पर सियासी बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। एक तरफ राज्य सरकार इसे केंद्र का दबाव बता रही है, तो दूसरी ओर ईडी और केंद्र सरकार इसे कानून के दायरे में की गई कार्रवाई बता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह तथ्यों के आधार पर तय करेगा कि किसने सीमा लांघी और क्या एजेंसी के काम में वाकई बाधा डाली गई। अब 18 मार्च की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि जांच CBI को सौंपी जाएगी या ईडी ही आगे की कार्रवाई जारी रखेगी।

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