कर्मवीर सुंदरलाल और गणेश शंकर विद्यार्थी स्मृति समारोह का आगाज़
एक माह तक चलेगा आयोजन, प्रदर्शनी से लेकर विश्वविद्यालय की माँग तक उठी आवाज़
Central News desk: महुआ डाबर संग्रहालय की ओर से कर्मवीर पंडित सुंदरलाल और गणेश शंकर विद्यार्थी स्मृति समारोह का शुभारंभ शुक्रवार को जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन के सभागार में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता धीरज शर्मा ने की। यह समारोह एक माह तक चलेगा और 25 अक्तूबर तक सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी रहेगी।
पुष्पांजलि और प्रदर्शनी से शुरुआत
समारोह की शुरुआत कर्मवीर सुंदरलाल के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। इस अवसर पर उनके जीवन से जुड़े पत्र, डायरियाँ, टेलीग्राम, स्मृति-चिह्न, समाचार पत्र, पत्रिकाएँ और तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई। कई मूल दस्तावेज पहली बार आम जनता के सामने आए। साथ ही आकाशवाणी निदेशालय द्वारा सुंदरलाल जी पर आधारित ऑडियो डॉक्यूमेंट्री भी प्रस्तुत की गई।

राष्ट्रवादी पत्रकारिता के अग्रदूत
कर्मवीर पंडित सुंदरलाल को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राष्ट्रवादी पत्रकारिता के अग्रदूत और समन्वयवादी चिंतक के रूप में याद किया गया। उन्होंने स्वराज, कर्मयोगी, भविष्य, विश्ववाणी और नया हिंद जैसे पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया और ब्रिटिश शासन की नींव हिलाने वाली प्रसिद्ध कृति “भारत में अंग्रेजीराज” लिखी। वे संविधान सभा के सदस्य और विश्व शांति परिषद के अध्यक्ष भी रहे। कानपुर से उनका गहरा नाता रहा। गणेश शंकर को ‘विद्यार्थी’ उपनाम देने वाले भी वे ही थे।
प्रेरणा का संदेश
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे धीरज शर्मा ने संबोधित करते हुए बताया कि कर्मवीर पंडित सुंदरलाल का जीवन सत्य, साहस और निडर पत्रकारिता का प्रतीक है। उनकी कलम ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाई और समाज को जागरूक करने का जो मिशन उन्होंने शुरू किया, वही आज की पत्रकारिता और राष्ट्र निर्माण के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।
समारोह में अतिथियों ने अपने विचार रखे।
वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश नाथ त्रिपाठी ने कहा कि विद्यार्थी जैसे व्यक्तित्व को गढ़ने वाले पं. सुंदरलाल को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।
दत्तक पौत्र अनवर नक़वी ने बताया कि बाबा के निधन पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने अंतिम संस्कार का खर्च उठाने की पेशकश की थी, लेकिन परिवार ने इसे अस्वीकार कर दिया।
इतिहासकार देवेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि उनकी कलम अंग्रेजी शासन के खिलाफ आग उगलती थी और वे क्रांतिकारियों की रक्षा करते थे।

पत्रकारिता विश्वविद्यालय की माँग
समारोह में ‘कर्मयोगी सुंदरलाल केंद्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय’ की स्थापना की माँग को लेकर हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया गया। महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना ने माँग पत्र का वाचन किया। उपस्थित सभी अतिथियों और गणमान्यजनों ने हस्ताक्षर कर सहमति दी। यह माँग पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपा जाएगा।
गणमान्य उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुलदीप गंगवार ने किया। इस अवसर पर क्रांति कुमार कटियार, प्रखर श्रीवास्तव, देव कबीर, उत्कर्ष श्रीवास्तव, ईशान वाजपेयी, कुंवर जीत, हर्षित सिंह, धीरेंद्र सिंह भदोरिया, सूरज रेखा त्रिपाठी (एडवोकेट), अजमेर सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
जागरण इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन के डॉ. संजय चंदानी, धीरज शर्मा, राजेश याग्निक , रामजी बाजपेई और अक्षिता वर्मा, और अखिलेश मिश्रा भी समारोह में उपस्थित रहे।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
