कानपुर का ‘दरबारी सिंडिकेट’ उजागर 100 करोड़ की कंपनी

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खुली पुलिस–माफिया गठजोड़ की परतें!

अखिलेश दुबे प्रकरण में एक और बड़ा खुलासा सामने आया है। एसआईटी की जांच में पुलिस और माफिया के गठजोड़ की जड़ें अब साफ दिखाई देने लगी हैं। सोमवार को डिप्टी एसपी ऋषिकांत शुक्ला के निलंबन के साथ यह मामला और गहराता जा रहा है। ऋषिकांत पर अखिलेश दुबे के साथ मिलकर करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने और जमीन कारोबार में हिस्सेदारी के आरोप हैं।

ऋषिकांत शुक्ला पर बड़ी कार्रवाई — 100 करोड़ की संपत्ति का खुलासा

एसआईटी जांच में पाया गया कि डिप्टी एसपी ऋषिकांत शुक्ला, अखिलेश दुबे के करीबी रहे हैं और उन्होंने करीब 100 करोड़ रुपये की अकूत संपत्ति बनाई है।

जांच में सामने आया कि आर्यनगर में 11 दुकानें उनके नाम से नहीं बल्कि देवेंद्र दुबे के नाम पर हैं, जो उनकी बेनामी संपत्ति हैं।

12 स्थानों पर संपत्तियों का 92 करोड़ का रिकॉर्ड मिला।

तीन अन्य जगहों की संपत्ति के कागज अभी नहीं मिले, लेकिन वे भी शुक्ला के PAN कार्ड से जुड़ी बताई जा रही हैं।

अखिलेश दुबे के साथ बनाई 100 करोड़ की कंस्ट्रक्शन कंपनी

सूत्रों के मुताबिक, ऋषिकांत शुक्ला, डिप्टी एसपी विकास पांडेय और संतोष सिंह ने अखिलेश दुबे के साथ मिलकर एक कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई थी।
कंपनी में शामिल लोग:

  • ऋषिकांत शुक्ला की पत्नी प्रभा शुक्ला
  • सीओ विकास पांडेय के भाई प्रदीप पांडेय
  • संतोष सिंह के रिश्तेदार अशोक सिंह
  • और अखिलेश दुबे के परिजन

यह कंपनी जमीन और कंस्ट्रक्शन के जरिए काली कमाई को सफेद करने का जरिया बनी। बताया जा रहा है कि इस कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ से अधिक है।

अभी बाकी है ‘बाकी दरबारियों’ की बारी

ऋषिकांत के निलंबन के बाद अब नजरें बाकी अफसरों पर हैं। इन पर भी अखिलेश दुबे के करीबी होने के आरोप हैं:

  • विकास पांडेय (डीएसपी, लखनऊ)
  • संतोष कुमार सिंह (डीएसपी, हरदोई)
  • महेंद्र कुमार सोलंकी (केडीए वीसी के पूर्व पीए, वर्तमान बस्ती)
  • कश्यप कांत दुबे

एसआईटी ने इन सभी को दो बार नोटिस भेजकर पेश होने को कहा, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। सूत्रों का कहना है कि उन्हें डर था कि पूछताछ के बाद गिरफ्तारी न हो जाए।

कैसे चला ‘अखिलेश-ऋषिकांत नेटवर्क’

कानपुर में 1998 से 2009 तक तैनात रहने के दौरान ऋषिकांत शुक्ला ने अखिलेश दुबे गिरोह के साथ गठजोड़ कर लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाया, वसूली और कब्जा कारोबार कराया। पुलिस, केडीए और अन्य विभागों के अफसर इस नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं।

विजिलेंस जांच शुरू, शासन ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

सोमवार को शासन ने प्रमुख सचिव (सतर्कता विभाग) को पूरे प्रकरण पर विस्तृत जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कानपुर पुलिस कमिश्नर ने पहले ही सितंबर में एडीजी प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसके आधार पर शासन ने यह कार्रवाई की है।

अब बड़ा सवाल:

क्या यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है या पूरे “दरबारी सिंडिकेट” पर जल्द गिरेगी गाज?
कानपुर से शुरू हुआ यह नेटवर्क अब प्रदेश के कई जिलों तक फैला बताया जा रहा है।

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