जयपुर में प्रोडक्ट सेफ्टी डिपार्टमेंट की बड़ी कार्रवाई: मैकडॉनल्ड्स आउटलेट पर रेड, 50 लीटर यूज्ड ऑयल और 40 किलो टमाटर नष्ट

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CENTRAL NEWS DESK: राजधानी जयपुर में फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मालवीय नगर स्थित गौरव टॉवर कॉम्प्लेक्स में संचालित McDonald’s – गौरव तिवारी आउटलेट पर रेड की। जांच के दौरान रसोई में इस्तेमाल हो रहे 50 लीटर यूज्ड कुकिंग ऑयल और 40 किलोग्राम स्पॉइल्ड टमाटरों को मौके पर ही डिस्ट्रॉय करवाया गया। अधिकारियों ने ऑयल की क्वालिटी को ह्यूमन कंजम्प्शन के लिए अनफिट पाया। कार्रवाई के दौरान विभाग की टीम ने परिसर में स्थित एक अन्य ईटरी ‘चाट का चस्का’ का भी इंस्पेक्शन किया।

ऑयल मिला अनफिट, टीपीसी लेवल स्टैंडर्ड से अधिक

फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की कमिश्नर डॉ. टी. शुभमंगला के अनुसार इंस्पेक्शन के दौरान पाया गया कि फ्रेंच फ्राइज सहित अन्य फूड आइटम्स को जिस ऑयल में फ्राई किया जा रहा था, वह ओवरयूज के कारण डार्क हो चुका था। ऑन-द-स्पॉट टेस्ट में ऑयल का टोटल पोलर कंपाउंड (टीपीसी) लेवल 28 परसेंट से 31 परसेंट के बीच पाया गया, जबकि परमिसिबल स्टैंडर्ड लिमिट 25 परसेंट है। अधिकारियों ने बताया कि हाई टीपीसी लेवल वाला ऑयल हेल्थ के लिए खतरनाक होता है और इससे फूड पॉइजनिंग, स्टमक इंफेक्शन और लॉन्ग-टर्म हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। इसी आधार पर 50 लीटर ऑयल को तुरंत डिस्पोज करने के निर्देश दिए गए।

40 किलो स्पॉइल्ड टमाटर भी किए गए डिस्ट्रॉय

इंस्पेक्शन के दौरान किचन एरिया में 40 किलोग्राम टमाटर खराब कंडीशन में पाए गए। ये टमाटर स्टोरेज के दौरान सड़ चुके थे और हाइजीन स्टैंडर्ड्स का पालन नहीं किया गया था। विभाग ने इन्हें भी मौके पर डिस्ट्रॉय करवाया। अधिकारियों ने कहा कि फूड आइटम्स का स्टोरेज प्रॉपर टेम्परेचर और क्लीन एनवायरनमेंट में होना जरूरी है।

वॉल्ड सिटी में डेयरी पर रेड, 650 किलो एडल्टरेटेड पनीर सीज

इसी दिन जयपुर सीएमएचओ टीम ने घाटगेट क्षेत्र के चौकड़ी तोपखाना स्थित मदिना डेयरी एंड बेकर्स पर रेड की। निरीक्षण के दौरान बड़ी मात्रा में पनीर का स्टॉक मिला, जो सबस्टैंडर्ड और एडल्टरेटेड प्रतीत हुआ। टीम ने करीब 650 किलोग्राम पनीर सीज कर उसे डिस्ट्रॉय कर दिया। सैंपल्स को लेबोरेटरी टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की लीगल एक्शन लिया जाएगा।

ऑयल और मिल्क पाउडर से तैयार होता था पनीर

पूछताछ में फर्म के ओनर मुस्तफा खान ने बताया कि वह पनीर अलवर जिले के रामगढ़ क्षेत्र से लगभग 200 रुपये प्रति किलोग्राम की रेट पर मंगवाता था। उसने स्वीकार किया कि पनीर ऑयल और मिल्क पाउडर से तैयार किया जाता था और मार्केट में 220 रुपये प्रति किलोग्राम या उससे अधिक कीमत पर सेल किया जाता था। अधिकारियों के अनुसार इस तरह का एडल्टरेटेड पनीर कंजम्प्शन के लिए अनसेफ है और इससे हेल्थ रिस्क बढ़ सकता है।

इन्वेस्टिगेशन जारी, सख्त एक्शन

फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने कहा है कि मिलावट और हाइजीन उल्लंघन के खिलाफ स्पेशल ड्राइव जारी रहेगा। त्योहारों और हाई डिमांड के समय पर विशेष मॉनिटरिंग की जा रही है। कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि कंज्यूमर हेल्थ से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट के तहत सख्त लीगल एक्शन लिया जाएगा। जयपुर में हुई इस कार्रवाई ने साफ संदेश दिया है कि एडल्टरेशन और अनहाइजीनिक प्रैक्टिस के खिलाफ विभाग की सख्ती आगे भी जारी रहेगी।

क्या है TPC ( टोटल पोलर कंपाउंड) लेवल

अगर शॉर्ट में बोले तो जितना ज्यादा टीपीसी, उतना ज्यादा खराब तेल, टीपीसी प्रतिशत बढ़ने का मतलब है कि तेल खराब हो चुका है और स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है। यह एक वैज्ञानिक माप है, जिससे यह पता लगाया जाता है कि कुकिंग ऑयल कितनी बार इस्तेमाल किया गया है।

जब तेल बार-बार गर्म होता है
तेल को बार-बार फ्राई करने पर उसमें केमिकल बदलाव होते हैं। इससे हानिकारक पदार्थ बनते हैं, जिन्हें पोलर कंपाउंड कहा जाता है।

कितना टीपीसी लेवल सही माना जाता है?

Food Safety and Standards Authority of India (एफएसएसएआई) के अनुसार:

  1. 25% तक टीपीसी लेवल – स्वीकार्य सीमा (सेफ लिमिट)
  2. 2. 25% से अधिक – तेल मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त (अनफिट)
  3. 30% या उससे अधिक – गंभीर स्वास्थ्य जोखिम

ज्यादा टीपीसी वाला तेल खाने से क्या खतरे?

  1. पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग
  2. लीवर और किडनी पर असर
  3. हार्ट डिजीज का खतरा
  4. कैंसर का दीर्घकालिक जोखिम
  5. ट्रांस फैट की मात्रा बढ़ना

तेल को कितनी बार इस्तेमाल करना सुरक्षित

  1. डीप फ्राई ऑयल को बार-बार रीयूज नहीं करना चाहिए।
  2. आमतौर पर 2–3 बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  3. हर बार इस्तेमाल के बाद तेल को फिल्टर करना जरूरी है।
  4. गहरा काला रंग, बदबू या ज्यादा धुआं – तेल खराब होने का संकेत है।

कैसे होती है जांच

  1. रिपोर्ट के आधार पर जुर्माना या लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
  2. मौके पर डिजिटल टीपीसी मीटर से टेस्ट किया जाता है।
  3. लैबोरेटरी में केमिकल एनालिसिस से भी पुष्टि की जाती है।

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