फर्जी खातों से 2 करोड़ की ऑनलाइन ठगी: डेढ़ साल से फरार बैंक कर्मचारी गिरफ्तार

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Central News Desk: चूरू पुलिस ने एक हाई-प्रोफाइल ऑनलाइन धोखाधड़ी मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। डेढ़ साल से फरार चल रहे आरोपी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि एक बैंक कर्मचारी निकला, जिसने अपनी पद की आड़ लेकर करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया। आरोपी की पहचान हरीश कुमार जांगिड़ के रूप में हुई है, जो विदेश भाग गया था। पुलिस ने उसे उस वक्त दबोचा, जब वह अपनी बहन की सगाई में शामिल होने के लिए गुपचुप तरीके से राजगढ़ आया था।


बैंक कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड

एसपी जय यादव ने बताया कि राजगढ़ निवासी राजेश कुमार और राकेश कुमार ने अपनी फर्म के पंजीकरण के लिए एक्सिस बैंक के कर्मचारी हरीश कुमार को दस्तावेज सौंपे थे। बैंक कर्मचारी होने के नाते हरीश पर दोनों ने भरोसा किया, लेकिन उसने इस विश्वास का दुरुपयोग किया।

हरीश ने दोनों के दस्तावेज और हस्ताक्षरों की जालसाजी कर बैंक में फर्जी चालू खाते खोल दिए। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए जमा हुए करीब 2 करोड़ रुपये को इधर-उधर करने में किया गया।

दिल्ली साइबर ब्रांच से खुलासा

धोखाधड़ी का मामला तब सामने आया जब दिल्ली साइबर ब्रांच ने राजेश कुमार को सूचित किया कि उनके नाम पर फर्जी खाते खोले गए हैं और उन्हीं खातों में ठगी के पैसे जमा किए जा रहे हैं। शिकायत दर्ज होते ही हरीश जांगिड़ विदेश भाग गया और पुलिस को चकमा दे गया।

पुलिस ने बनाया विशेष दल

मामले की गंभीरता को देखते हुए चूरू एसपी जय यादव ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक किशोरीलाल, वृताधिकारी रोहित सांखला और राजगढ़ थाने के एसएचओ राजेश कुमार शामिल थे। उपनिरीक्षक धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में आरोपी की तलाश शुरू की गई।

बहन की सगाई बनी गिरफ्तारी का कारण

लंबे समय से फरार हरीश को पुलिस पकड़ नहीं पा रही थी, लेकिन अचानक सूचना मिली कि वह अपनी बहन की सगाई में शामिल होने के लिए राजगढ़ लौटने वाला है। पुलिस ने जाल बिछाया और 7 अगस्त को उसे दबोच लिया।

आरोपी न्यायिक हिरासत में, अन्य की तलाश जारी

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है।

बड़े नेटवर्क की आशंका

पुलिस को शक है कि हरीश ने अकेले इस धोखाधड़ी को अंजाम नहीं दिया होगा। उसके पीछे किसी बड़े साइबर गैंग या नेटवर्क की भूमिका हो सकती है। जांच एजेंसियां अब उन सभी खातों और लेन-देन की गहराई से जांच कर रही हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों को घुमाने में किया गया।

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