“लोग बच्चों को रेत पर घसीटते हुए भाग रहे थे” :बॉन्डी बीच हमले की दिल दहला देने वाली आंखों देखी
CENTRAL NEWS DESK: सिडनी का बॉन्डी बीच, जहां लोग सुकून और उत्सव मनाने आते हैं, कुछ ही मिनटों में मौत का मैदान बन गया। हनुक्का की मोमबत्तियां जल रही थीं, संगीत बज रहा था, बच्चे खेल रहे थे और तभी गोलियों की आवाज ने सब कुछ बदल दिया।
टीचर बियांका की जुबानी
26 वर्षीय टीचर बियांका बताती हैं—
“पहले लगा कि आतिशबाजी हो रही है। लेकिन जब लोगों को गिरते देखा, तब समझ आया कि यह गोलियां हैं। लोग अपने बच्चों को गोद में उठाकर या रेत पर घसीटते हुए भाग रहे थे।”

आतिशबाजी का भ्रम बना जानलेवा
चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों ने हनुक्का के समय का फायदा उठाया। पटाखों जैसी आवाजों के कारण लोग कुछ सेकंड तक भ्रम में रहे। इसी दौरान करीब 40 राउंड फायरिंग कर दी गई।
बच्चों को ढाल बनाकर बचाने की कोशिश
कई माता-पिता अपने बच्चों को रेत पर लिटाकर खुद ऊपर लेट गए ताकि गोली बच्चों को न लगे। महिलाएं बच्चों को सीने से लगाकर आड़ की तलाश में दौड़ती रहीं। हर तरफ खून, चीखें और डर का साया था।

फ्लैट से देखा नरसंहार
घटनास्थल के पास रहने वाली जॉर्जी हीथ ने बताया—
“मैंने खिड़की से देखा कि लोग इधर-उधर भाग रहे थे। कुछ ही मिनटों में पुलिस और एंबुलेंस की कतारें लग गईं। ऐसा लगा जैसे नर्क धरती पर उतर आया हो।”

जिंदगी भर का जख्म
हमले में बच गए लोग मानसिक रूप से बुरी तरह टूट चुके हैं। कई चश्मदीदों ने कहा कि यह मंजर वे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। बॉन्डी बीच, जो कभी खुशियों का प्रतीक था, अब एक दर्दनाक याद बन गया है।
news Journalist
