Bihar Election 2025: सीमांचल में सियासत गरमाई – खालिद अनवर का AIMIM और जनसुराज पर तीखा हमला

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सीमांचल में बढ़ते आधार डाटा को लेकर मचा बवाल

Bihar News desk: राजद के वरिष्ठ नेता और निर्वाचन पदाधिकारी खालिद अनवर ने सीमांचल में आधार कार्ड की संख्या में वृद्धि पर सफाई देते हुए कहा कि यह केवल तकनीकी गड़बड़ी है। उन्होंने बताया कि कई ऐसे लोग जो दूसरे राज्यों में माइग्रेट कर चुके हैं या शादी के बाद दूसरी जगह चले गए हैं, उनके नाम अब भी स्थानीय रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इससे वास्तविक स्थिति की तुलना में आंकड़े अधिक दिख रहे हैं।

खालिद ने स्पष्ट किया कि यह स्थिति सिर्फ सीमांचल की नहीं, पूरे बिहार के कई जिलों में देखी जा रही है, लेकिन मुस्लिम बहुल सीमांचल को टारगेट कर बदनाम करने की साजिश हो रही है।


AIMIM को बताया “वोट कटवा”, राजद से गठबंधन से किया इनकार

खालिद अनवर ने AIMIM को सीधे निशाने पर लेते हुए उसे “वोट कटवा पार्टी” बताया। उन्होंने कहा कि AIMIM मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में चुनाव लड़कर सिर्फ एनडीए को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने का काम करती है।
उन्होंने AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान पर तंज कसते हुए कहा कि वे खुद अपना चुनाव हारने जा रहे हैं और अब राजद में शामिल होकर “आठ-दस सीट जीतकर सरकार को ब्लैकमेल” करने की साजिश रच रहे हैं। लेकिन, राजद ऐसी चालों का हिस्सा नहीं बनेगा।


जनसुराज पर भी साधा निशाना: “उम्मीद बेचने वाली राजनीति”

प्रशांत किशोर की जनसुराज यात्रा को लेकर भी खालिद अनवर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जनसुराज केवल लोगों को “झूठी उम्मीदें” बेचने का काम कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई मजबूत रणनीति नजर नहीं आती।
खालिद ने कहा, “हर मतदाता को उम्मीदवार बनाने की बात करने वाले खुद नहीं जानते कि टिकट किसे देना है। ये सब लोगों को गुमराह करने की साजिश है।”


“सीमांचल को बदनाम करने की कोशिश, लेकिन सच्चाई राजद के साथ”

खालिद अनवर ने दोहराया कि सीमांचल को बदनाम करने की हर कोशिश का जवाब जनता खुद चुनाव में देगी। उन्होंने दावा किया कि राजद सीमांचल में अपने मजबूत नेटवर्क और संगठन के दम पर चुनाव लड़ेगा, और किसी भ्रम या गठबंधन की राजनीति का हिस्सा नहीं बनेगा।


चुनावी मौसम में आरोप-प्रत्यारोप तेज

बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले सीमांचल की सियासत तेजी से गर्म हो गई है। राजद ने जहां AIMIM और जनसुराज को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम को राज्य की सियासत में ध्रुवीकरण की नई बिसात के तौर पर देखा जा रहा है।

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