बांग्लादेश चुनाव पर बवाल: 212 सीटों की जीत के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान घिरे, विपक्ष ने उठाए सवाल
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CENTRAL NEWS DESK: बांग्लादेश में हाल ही में हुए आम चुनाव के रिजल्ट के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पीएम तारिक रहमान पर अपोजीशन पार्टीयों ने चुनाव परिणामों में हेरफेर का गंभीर आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव की मतगणना प्रक्रिया में ‘इंजीनियरिंग’ की गई, जिससे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को भारी बहुमत मिला।
हालांकि सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह जीत जनता के विश्वास और समर्थन का परिणाम है। करीब दो दशक बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सत्ता में वापसी हुई है, जिससे देश की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

212 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत
299 सीटों पर हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने 212 सीटों पर जीत दर्ज की। यह जीत इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि वर्ष 2008 से 2024 तक देश में शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग का वर्चस्व रहा था। लगभग 20 साल बाद बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन हुआ है। तारिक रहमान ने दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर जीत हासिल की।
‘इंजीनियर’ कमेंट से शुरू हुआ विवाद
चुनाव नतीजों के बाद नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता नसीरुद्दीन पटवारी ने सोशल मीडिया पर तारिक रहमान को ‘इंजीनियर’ कहकर तंज कसा। उनका इशारा चुनावी ‘इंजीनियरिंग’ की ओर था। यह टिप्पणी तेजी से वायरल हो गई और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई लोगों ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि बिना पढ़ाई के इंजीनियर बन गए। कुछ ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई गई तस्वीरें साझा कीं, जिनमें तारिक रहमान को इंजीनियर की टोपी पहने दिखाया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अपने चुनावी हलफनामे में तारिक रहमान ने अपनी शैक्षणिक योग्यता ‘हायर सेकेंडरी’ यानी बारहवीं तक बताई है।

इलेक्शन कमीशन में शिकायत
नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता आसिफ महमूद ने दावा किया कि उनके पास मतगणना में गड़बड़ी के सबूत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर मतगणना पूरी होने से पहले ही विजेताओं की घोषणा कर दी गई और बाद में आंकड़ों में बदलाव किया गया। जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन ने भी 32 सीटों को लेकर चुनाव आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही, लेकिन मतगणना के दौरान अनियमितताएं हुईं। चुनाव आयोग ने शिकायतों की जांच का आश्वासन दिया है।
प्रधानमंत्री का जवाब
14 फरवरी को आयोजित प्रेस वार्ता में जब तारिक रहमान से पूछा गया कि क्या उन्होंने चुनाव जीतने के लिए ‘इंजीनियरिंग’ की, तो उन्होंने शांत स्वर में जवाब दिया कि उनकी ‘इंजीनियरिंग’ केवल इतनी थी कि उन्होंने लोगों को अपने पक्ष में मतदान के लिए समझाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनादेश का सम्मान करना चाहिए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर अनावश्यक सवाल नहीं उठाने चाहिए।
राजनीतिक विरासत और विवाद
तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं। उन्होंने वर्ष 1988 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी में प्रवेश किया। 2001 के चुनाव में संगठनात्मक भूमिका निभाने के कारण उन्हें पहचान मिली, लेकिन 2006 के बाद उन पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे। वर्ष 2007 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और 2008 में इलाज के लिए वे लंदन चले गए। करीब 17 वर्षों तक वे देश से बाहर रहे। इस दौरान वे पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और बाद में कार्यकारी अध्यक्ष बने। कई मामलों में अदालतों से उन्हें राहत मिली। पिछले वर्ष वे बांग्लादेश लौटे और अपनी मां के निधन के बाद पार्टी की कमान संभाली।
35 साल बाद बांग्लादेश में मेल पीएम
तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही 35 वर्षों बाद बांग्लादेश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिला है। वर्ष 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। उसके बाद से देश की राजनीति में शेख हसीना और खालिदा जिया का प्रभाव रहा।
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